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Survey: 45% से ज्यादा रिपब्लिकंस ने Capitol Hill पर हुए हमले का समर्थन किया

45% रिपब्लिकन्स वोटर्स ने किया कैपिटल हिल पर हमले का समर्थन. (फोटो-AFP)
45% रिपब्लिकन्स वोटर्स ने किया कैपिटल हिल पर हमले का समर्थन. (फोटो-AFP)

Republican Voters Support Capitol hill violence: एक सर्वे में सामने आया है कि 45% से भी ज्यादा रिपबलिकंस मतदाता अमेरिकी संसद कैपिटल हिल पर हुए हमले का समर्थन करते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 8, 2021, 7:46 AM IST
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वाशिंगटन. अमेरिका (US) की कैपिटल हिल पर ट्रंप समर्थकों द्वारा की गयी हिंसा (Capitol Hill Violence) की दुनिया भर के कड़ी आलोचना हो रही है. हालांकि एक सर्वे में सामने आया है कि 45% से भी ज्यादा रिपब्लिकंस (Republican Voters) इस हमले का समर्थन करते हैं. इस सर्वे में शामिल करीब 93% डेमोक्रेट्स ने इस हमले को लोकतंत्र के लिए ख़तरा माना है जबकि 45% रिपब्लिकंस वोटर्स ने इस हमले को सही बताया और कहा कि चुनाव धांधली से निपटने का यही सही तरीका था.

बता दें कि बुधवार को निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने अमेरिकी संसद कैपिटल हिल पर हमला कर दिया था. ट्रंप समर्थकों ने न सिर्फ बिल्डिंग में घुसकर तोड़-फोड़ की बल्कि इस हिंसा में 4 लोगों की मौत भी हो गयी है. दरअसल ट्रंप समर्थक इलेक्टोरल कॉलेज की गिनती रोकना चाहते थे क्योंकि इसमें जीत के बाद जो बाइडन को अब संवैधानिक रूप से प्रेजिडेंट इलेक्ट घोषित कर दिया गया है. सुरक्षाकर्मियों ने चार घंटे की मेहनत के बाद संसद भवन को उपद्रवियों से ख़ाली कराया था और इस दौरान 75 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है.

क्या कहता है सर्वे?
YouGov नामक संस्था ने अपने सर्वे में पाया है कि जहां एक तरफ़ ज़्यादातर अमेरिकियों ने संसद पर हमले को लोकतंत्र के लिए ख़तरा बताया वहीं दूसरी तरफ़ इस मामले में पार्टी के आधार पर लोगों की राय में भारी विभाजन देखा गया. संस्था ने 1397 मतदाताओं से बातचीत की जिनमें से 62 फ़ीसद ने इस हिंसा को लोकतंत्र के लिए ख़तरा क़रार दिया जिनमें 93 फ़ीसद डेमोक्रेट्स, 55 फ़ीसद निर्दलीय और 27 फ़ीसद रिपब्लिकन्स थे. रिपब्लिकन्स में 45 फ़ीसद ने ट्रंप समर्थकों की हिंसक कार्रवाई को सही ठहराया जबकि 43 फ़ीसद रिपब्लिकन्स ने इसे ग़लत क़रार दिया. हाल के वर्षों में कई सर्वे में पाया गया है कि अमेरिकी राजनीति में ध्रुवीकरण बढ़ता जा रहा है और पार्टी के आधार पर लोगों के नज़रिए में भारती मतभेद देखे जा रहे हैं.
ट्रंप और व्हाइट हाउस ने की हमले की निंदा


शुक्रवार सुबह ट्रंप एक बार फिर मीडिया के सामने आए और संदेश जारी किया. ट्रंप ने कहा- सभी अमेरिकियों की तरह मैं भी इस हिंसक तबाही और मारपीट की घटना के प्रति काफी गुस्से में हूं. अमेरिका हमेशा से लॉ एंड ऑर्डर पसंद करने वाला देश है और हमेशा ऐसा ही रहेगा. जो भी लोग इस हिंसा में शामिल थे वे हमारे देश का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं, जिन्होंने भी कानून तोड़ा है उन्हें इसकी सजा मिलेगी.

उधर व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी केली मैकएनी ने अमेरिकी कैपिटल पर हुए सशस्त्र विद्रोह की निंदा की. उन्होंने कहा, ''पूरे व्हाइट हाउस की तरफ से मैं इस घटना की कड़ी निंदा करती हूं.'' इन्होंने इस घटना को ''भयावह, निंदनीय और अमेरिकी तरीके के विपरीत'' बताया. हालांकि उन्होंने मीडिया के सवाल नहीं लिए और इसके बाद वहां से चली गई. राष्ट्रपति ट्रंप गुरुवार को सार्वजनिक तौर पर नज़र नहीं आए. उनके सोशल मीडिया अकाउंट भी सस्पेंड हैं.

ट्रंप को ऑफिस से बाहर करने की अपील
बता दें कि अमेरिका के हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव की स्पीकर और शीर्ष डेमोक्रैट नेता नैन्सी पेलोसी ने एक न्यूज़ कॉन्फ़्रेंस में कहा कि उनके पास ट्रंप के कैबिनेट सदस्यों के लिए एक संदेश है. उन्होंने कहा, ''क्या जो कुछ भी हुआ वे लोग उसे सही मानते हैं? क्या वो अगले 13 दिनों तक ये कहने के लिए तैयार हैं कि ये ख़तरनाक आदमी हमारे लोकतंत्र को और अधिक नुकसान पहुंचा सकता है?'' पेलोसी ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के ''राजद्रोह वाले काम'' की वजह से हाउस उनके ख़िलाफ़ महाभियोग चलाने पर मजबूर हो सकता है. उन्होंने मीडिया से कहा, ''हालांकि सिर्फ़ 13 ही बचे हैं, लेकिन कोई भी दिन भयावह हो सकता है.''



उन्होंने बताया कि डेमोक्रैट नेता उनसे लगातार संपर्क कर रहे हैं और ट्रंप को ऑफिस से हटाने का दूसरा प्रयास करने की बात कह रहे हैं. बता दें कि दिसंबर 2019 में भी ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग चलाया गया था. उन पर दोबारा चुनाव जीतने के मौके बेहतर करने के लिए यूक्रेन से ग़लत तरीके से मदद मांग ने का आरोप था. अगर दोबारा महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होती है तो वो अमेरिका के ऐसे पहले राष्ट्रपति होंगे जिन्हें दो बार महाभियोग का सामना करना पड़ेगा.
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