समलैंगिक शादियों को पोप फ्रांसिस ने बताया बुराई, कहा- कैथोलिक चर्च नहीं दे सकता आशीर्वाद

 सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2017 में दिए एक फैसले में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया और साथ ही लैंगिक रुझानों को निजता का अहम हिस्सा माना. फाइल फोटो

सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2017 में दिए एक फैसले में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया और साथ ही लैंगिक रुझानों को निजता का अहम हिस्सा माना. फाइल फोटो

Pope Francis on Same Sex Unions: वेटिकन ने कहा है कि ईश्वर के अनुसार शादी स्त्री और पुरुष के बीच जीवन भर चलने वाला मिलन है और ईश्वर समलैंगिक शादियों जैसी ‘‘बुराई को आशीर्वाद नहीं दे सकते.’’

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 15, 2021, 11:32 PM IST
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रोम. वेटिकन (Vatical) ने सोमवार को आदेश जारी किया कि कैथोलिक चर्च (Catholic Church) समलैंगिक शादियों (Same Sex Unions) के लिए आशीर्वाद नहीं दे सकता, क्योंकि ईश्वर ‘‘बुराई को आशीर्वाद नहीं दे सकते.’’ इस संबंध में वेटिकन के धर्मपरायणता कार्यालय ने इस सवाल का औपचारिक जवाब जारी किया कि क्या कैथोलिक पादरी वर्ग समलैंगिक शादियों के लिए आशीर्वाद दे सकता है. प्रश्न के उत्तर में दो पन्नों का स्पष्टीकरण दिया गया है जो सात भाषाओं में प्रकाशित है और इसे पोप फ्रांसिस से मान्यता प्राप्त है. वेटिकन ने कहा है कि समलैंगिकों के साथ उचित व्यवहार किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसी शादियों को आशीर्वाद नहीं दिया जा सकता क्योंकि ईश्वर के अनुसार शादी स्त्री और पुरुष के बीच जीवनभर चलनेवाला मिलन है और ईश्वर समलैंगिक शादियों जैसी ‘‘बुराई को आशीर्वाद नहीं दे सकते.’’

हालांकि वेटिकन का ये आदेश चौंकाने वाला है, क्योंकि भारत और अमेरिका सहित तमाम देशों में समलैंगिकों रिश्तों को कानूनी मान्यता मिल रही है. यूरोपीय देशों में समलैंगिक जोड़े शादियां रचा रहे हैं, और दुनिया उनकी खुशी में झूम रही है. हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन एक नए कार्यकारी आदेश के जरिए अमेरिकी सेना में समलैंगिकों के शामिल होने पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया है. ये महत्वपूर्ण इसलिए है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के प्रथम वर्ष में ही समलैंगिकों के सेना में शामिल होने पर प्रतिबंध लगा दिया था. बाइडन के कार्यभार संभालने के बाद से ही उनके पेंटागन की इस नीति में बदलाव करने की संभावनाएं बनी थीं.

बाइडन के इस फैसले का सेवानिवृत्त जनरल लॉयड ऑस्टिन ने अमेरिका के रक्षा मंत्री पद के लिए अपने नाम की पुष्टि के लिए सीनेट के समक्ष पिछले सप्ताह हुई सुनवाई के दौरान इस कदम का समर्थन किया था. ऑस्टिन ने कहा था, ‘‘ मैं इस प्रतिबंध को हटाने की राष्ट्रपति की योजना का समर्थन करता हूं.’’ उन्होंने कहा था, ‘‘ अगर आप सेवा करने के लिए योग्य हैं और मानकों को बनाए रख सकते हैं, तो आपको सेवाएं देने का अधिकार होना चाहिए.’’



बता दें कि भारत में सहमति से समलैंगिक सेक्स अपराध की श्रेणी में नहीं आता है. सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2017 में दिए एक फैसले में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया और साथ ही लैंगिक रुझानों को निजता का अहम हिस्सा माना.

कोर्ट ने 6 सितंबर 2018 को धारा 377 के तहत समलैंगिक संबंधों को वैध करार देते हुए कहा कि लैंगिक रुझान प्राकृतिक होता है और लोगों का उसके ऊपर कोई नियंत्रण नहीं होता है. हालांकि कोर्ट ने नाबालिगों, जानवरों और बिना सहमति के बनाए गए संबंधों पर इस प्रावधान को लागू रखा है.
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