क्लाइमेट रिपोर्ट की चेतावनी- खाद्य उत्पादन को बदलें और भूमि का दुरुपयोग बंद करें

IPCC (Intergovernmental Panel on Climate Change) की रिपोर्ट में कहा गया था कि हमारे पास केवल 2030 तक का समय है कि हम अपनी गलतियों को सुधारें, नहीं तो ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) विनाशकारी साबित होगा.

News18Hindi
Updated: August 9, 2019, 11:55 AM IST
क्लाइमेट रिपोर्ट की चेतावनी- खाद्य उत्पादन को बदलें और भूमि का दुरुपयोग बंद करें
ग्लोवल वार्मिंग के इफेक्ट्स
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Updated: August 9, 2019, 11:55 AM IST
संयुक्त राष्ट्र के वैज्ञानिकों ने गुरुवार को एक प्रमुख रिपोर्ट में चेतावनी देते हुए कहा कि पृथ्वी पर लगभग एक चौथाई बर्फ मुक्त भूमि को नुकसान पहुंचा है, यह कहते हुए कि विनाशकारी ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए और गिरावट को रोकना चाहिए.

IPCC की रिपोर्ट

इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) के क्लाइमेट चेंज मुद्दे पर आए बड़े निष्कर्ष के लगभग एक साल बाद ये चेतावनी आई है. IPCC की रिपोर्ट में कहा गया था कि हमारे पास केवल 2030 तक का समय है कि हम जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता को कम करने और ग्रह को पूर्व से 1.5 डिग्री सेल्सियस की महत्वपूर्ण सीमा तक पहुंचने से रोकें.

ग्लोबल वार्मिंग


दूसरी आईपीसीसी रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन और भूमि क्षरण के दुष्चक्र को उजागर करती है.
IPCC के उपाध्याक्ष वालिस मैसन-डेलमोटे ने कहा, "हम मनुष्य 70% से अधिक बर्फ मुक्त भूमि को प्रभावित करते हैं, इस भूमि का एक चौथाई हिस्सा ख़राब हो जाता है. जिस तरह से हम भोजन का उत्पादन करते हैं और जो खाते हैं वह प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र के नुकसान और जैव विविधता में गिरावट में भूमिका मिभाता है देता." जलवायु परिवर्तन से सूखे, बाढ़ और गर्मी की लहरों की फ्रीक्वेंसी और इंटेंसिटी बढ़ जाती है, जो अपरिवर्तनीय रूप से प्राकृतिक पारिस्थितिकी प्रणालियों को नष्ट कर सकती है और भोजन की कमी को उत्पन्न कर सकती है.

प्रमुख वजहें
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वनों की कटाई और अव्यवस्थित कृषि ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा देती है. वनों की कटाई और अव्यवस्थित कृषि वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को कम करने और ग्रीनहाउस गैसों की विशाल मात्रा का उत्सर्जन करने की भूमि की क्षमता को कमजोर करती है. मैसन-डेलमोटे ने कहा, "जब भूमि का क्षरण होता है, तो यह कार्बन को ग्रहण करने की मिट्टी की क्षमता को कम कर देती है और यह जलवायु परिवर्तन को बढ़ा देती है. जलवायु परिवर्तन कई अलग-अलग तरीकों से भूमि क्षरण को कम करता है. आज 500 मिलियन लोग ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जो मरुस्थलीकरण का अनुभव करते हैं."

ग्लोबल वार्मिंग


वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु संकट को रोकने के लिए हमें तुरंत भूमि को प्रबंधित करने, भोजन बनाने और कम मांस खाने पर जोर देना होगा. आईपीसीसी नोट के मुताबिक रिपोर्ट उम्मीद की पेश करती है, इसमें नुकसान को दूर करने के लिए प्रमुख अवसर बताए गए हैं. कृषिभूमि पर वृक्षारोपण करना, एग्रोफोरेस्ट्री, बेहतर मिट्टी प्रबंधन और फूड वेस्ट को कम करना बेहतर समाधान हैं जो भूमि उत्पादकता को बढ़ावा दे सकते हैं और उत्सर्जन को कम कर सकते हैं.

इस रिपोर्ट के पांच प्रमुख बिंदु

दक्षिण अमेरिका का आकार छोटा होना

वे रासायनिक उर्वरकों, वनों की कटाई और गहन खेती की वजह से पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों में कमी आनी शुरू हो गई है. इस नुकसान प्रक्रिया में, दक्षिण अमेरिका का आकार में दो अरब हेक्टेयर भूमि को नुकसान पहुंचा है.

फूड वेस्ट औक मांसाहार पर रोक लगाने की जरूरत

आईपीसीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर हम वैश्विक उत्सर्जन को कम करना चाहते हैं तो फूड वेस्ट और मांस की खपत को कम करना होगा. डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग में दोनों का बड़ा योगदान है. फूड वेस्ट 8-10% और 14.5% के बीच वैश्विक उत्सर्जन तैयार करता है. रिपोर्ट के मुताबिक उत्पादित सभी खाद्य पदार्थों का 25-30% कभी नहीं खाया जाता है, जबकि दुनिया भर में 821 मिलियन लोग अल्पपोषित हैं.

प्राकृतिक कार्बन सिंक को बहाल करने की जरूरत है

क्लाइमेट चेंज का असर


 

वन और वेटलैंड्स महत्वपूर्ण कार्बन सिंक हैं. लेकिन इंसानी गतिविधियों से ये बहुत कम हो गए हैं. आईपीसीसी ने चेतावनी दी है कि मानव कार्यों के आधार पर कार्बन पर कब्जा करने की उनकी क्षमता की वजह से ये समस्या बनी रह सकती है.

जलवायु परिवर्तन से खाद्य सुरक्षा को खतरा

"भोजन प्रणाली जलवायु परिवर्तन एक प्रमुख कारक है साथ ही जलवायु परिवर्तन से ये खुद भी प्रभावित होता है". ये कहना है जोआओ कैंपारी का, जो डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वैश्विक चैप्टर का नेतृत्व करते हैं.
जलवायु परिवर्तन चरम मौसम की घटनाओं की फ्रीक्वेंसी और इंटेंसिटी को बढ़ाता है, जैसे कि सूखा और बाढ़, जो फसलों और महत्वपूर्ण कृषि अवसंरचना को नष्ट करते हैं.

बायोएनेर्जी इसका उत्तर नहीं है

आईपीसीसी ने पिछले साल अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी थी कि पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.5 डिग्री सेल्सियस ऊपर वैश्विक तापमान रखने पर कार्बन डाइऑक्साइड को कार्बन कैप्चर और स्टोरेज (बीईसीसीएस) जैसी तकनीकों का उपयोग करके वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को हटाने की जरूरत होगी. लेकिन अपनी नई रिपोर्ट में, आईपीसीसी ने कहा कि बड़े पैमाने पर इस तकनीक को जल्दी ही हटाना होगा.

 

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First published: August 9, 2019, 11:51 AM IST
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