शार्ली एब्डो ने फिर छापे पैग़ंबर मोहम्मद के कार्टून, 2015 में हुआ था आतंकी हमला

शार्ली एब्डो ने फिर छापे पैग़ंबर मोहम्मद के कार्टून, 2015 में हुआ था आतंकी हमला
शार्ली एब्डो ने फिर छापे विवादित कार्टून

Charlie Hebdo republishes Mohammed cartoons: शार्ली एब्डो ने एक बार फिर पैगंबर मोहम्मद के विवादित कार्टून छापकर हंगामा खड़ा कर दिया है. मैगजीन का कहना है कि एक दिन बाद उन 14 लोगों पर मुकदमा शुरू होने वाला है जिन पर आतंकियों की मदद करने का आरोप है, ये मारे गए कार्टूनिस्टों की याद में है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 2, 2020, 7:23 AM IST
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पेरिस. फ्रांस (France) की व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्डो (Charlie Hebdo) ने एक बार फिर पैग़ंबर मोहम्मद (controversial Mohammed cartoons) के उन कार्टूनों को फिर से प्रकाशित किया है जिनके चलते उसे आतंकी हमले का शिकार होना पड़ा था. पत्रिका का कहना है कि इन कार्टूनों को इसलिए फिर से छापा गया है क्योंकि एक दिन बाद ही उन 14 लोगों पर मुकदमा शुरू होने वाला है जिन्होंने शार्ली एब्डो के दफ़्तर पर हमला करने वालों की मदद करने का आरोप है.

बता दें कि शार्ली एब्डो के दफ्तर पर सात जनवरी 2015 को बड़ा आतंकी हमला हुआ था. इस हमले में पत्रिका के प्रसिद्ध कार्टूनिस्टों समेत 12 लोगों की मौत हो गई थी. कुछ दिन बाद पेरिस में इसी सी जुड़े एक अन्य हमले में पांच लोगों की जान चली गई थी. इन हमलों के बाद फ्रांस में चरमपंथी हमलों का सिलसिला शुरू हो गया था. पत्रिका के ताज़ा संस्करण के कवर पेज पर पैग़ंबर मोहम्मद के वे 12 कार्टून छापे गए हैं, जिन्हें शार्ली एब्डो में प्रकाशित होने से पहले डेनमार्क के एक अख़बार ने छापा था. इनमें से एक कार्टून में पैग़ंबर को सिर पर बम बांधे दिखाया गया था. साथ में फ्रेंच भाषा में जो हेडलाइन लिखी गई थी, उसका अर्थ था- 'वो सब कुछ इसके लिए ही था.'

पाकिस्तान ने किया कड़ा विरोध
पैग़ंबर के कार्टून छापने को लेकर पाकिस्तान ने शार्ली एब्डो की निंदा की है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस संबंध में दो ट्वीट किए गए हैं. इनमें कहा गया है, "फ्रांसीसी पत्रिका शार्ली एब्डो द्वारा पैग़ंबर मोहम्मद के बेहद आपत्तिजनक व्यंग्यचित्र फिर से छापने के फ़ैसले की पाकिस्तान कड़ी निंदा करता है."





आगे लिखा गया है, "अरबों मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए जानबूझकर किए गए इस काम को प्रेस की आज़ादी या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर सही नहीं ठहराया जा सकता. इस तरह के काम शांतिपूर्ण वैश्विक सह-अस्तित्व और सामाजिक सौहार्द की भावना को नुक़सान पहुंचाते हैं."

पत्रिका ने दिया कानून का हवाला
पत्रिका ने सम्पादकीय में लिखा है कि 2015 के हमले के बाद से ही उससे कहा जाता रहा है कि वह पैग़ंबर पर व्यंग्यचित्र छापना जारी रखे. उन्होंने आगे लिखा 'हमने ऐसा करने से हमेशा इनकार किया. क़ानून हमें ऐसा करने की इजाज़त देता है. मगर ऐसा करने के लिए कोई अच्छी वजह होनी चाहिए थी. ऐसी वजह जिसका कोई अर्थ हो और जिससे एक बहस पैदा हो. इन कार्टूनों को जनवरी 2015 के हमलों पर सुनवाई शुरू होने वाले हफ़्ते में छापना हमें ज़रूरी लगा.'

14 लोगों पर मुक़दमे से फिर तनाव
इन 14 लोगों पर शार्ली एब्डो के पेरिस वाले दफ़्तरों पर हमला करने वाले लोगों के लिए हथियार जुटाने और उनकी मदद करने के अलावा बाद में यहूदी सुपरमार्केट और एक पुलिसकर्मी पर हमला करने में मदद का आरोप लगा है. तीन लोगों पर उनकी ग़ैरमौजूदगी में मुक़दमा चल रहा है क्योंकि माना जा रहा है कि वे उत्तरी सीरिया या इराक़ भाग गए हैं. बता दें कि सात जनवरी को सैड और चेरिफ़ कोची नाम के भाइयों ने शार्ली एब्डो के दफ़्तर में घुसकर फ़ायरिंग की थी और एडिटर स्टीफ़ेन चार्बोनियर, चार कार्टूनिस्टों, दो स्तंभकारों, एक कॉपी एडिटर, एक केयरटेकर और एक मेहमान की हत्या कर दी थी. हमले में एडिटर के अंगरक्षक और एक पुलिस अधिकारी भी मारे गए थे.

पुलिस ने जब इन भाइयों की तलाश शुरू की तो एक बंधक संकट पैदा हो गया. इनके एक सहयोगी ने एक महिला पुलिसकर्मी की हत्या कर दी और एक यहूदी सुपरमार्केट में कई लोगों को बंधक बना लिया. इस शख़्स ने नौ जनवरी को चार यहूदियों की हत्या कर दी. बाद में उसकी भी पुलिस की गोली से मौत हो गई. मरने से पहले रिकॉर्ड एक वीडियो में इस शख़्स ने कहा था कि इन हमलों को इस्लामिक स्टेट समूह के नाम पर अंजाम दिया गया है. शार्ली एब्डो के दफ़्तर पर हमला करने वाले भाइयों की भी पुलिस की गोली से मौत हो गई थी.
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