चीन जुलाई से ही लोगों को दे रहा कोरोना वैक्सीन, चुनाव के चक्कर में ट्रंप भी दे सकते हैं इजाजत

चीन जुलाई से ही लोगों को दे रहा कोरोना वैक्सीन, चुनाव के चक्कर में ट्रंप भी दे सकते हैं इजाजत
डोनाल्ड ट्रंप (फ़ाइल फोटो)

US election 2020: चीन ने बाद अब डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) भी ट्रायल में आगे चल रही वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) को इमरजेंसी की स्थिति में इस्तेमाल की इजाजत दे सकते हैं. चीन ने माना है कि वो जुलाई से ही वैक्सीन का इस्तेमाल कर रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 25, 2020, 9:40 AM IST
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बीजिंग/वाशिंगटन. चीन (China) ने सोमवार को कबूल किया कि वह ट्रायल में आगे चल रही वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) को जुलाई से ही चुनिंदा क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को दे रहा है. चीन ने ये भी माना है कि जो वैक्सीन दी गयी है उस पर अभी पूरी तरह से मुहर नहीं लगी है. उधर फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन की ही देखादेखी ट्रंप (Donald Trump) प्रशासन नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों के मद्देनज़र ब्रिटेन की कोविड-19 वैक्सीन को आपातकालीन अनुमति देने पर विचार कर रहा है.

ट्रंप जिस वैक्सीन को इजाजत देने की प्रक्रिया में है उसे फ़ार्मास्युटिकल कंपनी एस्ट्राज़ेनेका और ऑक्सफ़ोर्ड साथ मिलकर बना रहे हैं. हालांकि अखबार की इस रिपोर्ट को ट्रंप प्रशासन ने फिलहाल सिरे से खारिज कर दिया है और एस्ट्राज़ेनेका ने भी इससे जुड़ी कोई जानकारी होने से इनकार किया है. उधर चीन ने कहा है कि वो जिस कोरोना वायरस वैक्सीन पर काम कर रहा है उसने उसे हाल के सप्ताह में मुख्य कर्मचारियों पर टेस्ट किया है. हालांकि, चीन के वैक्सीन ट्रायल से सभी ख़ुश नहीं हैं. पापुआ न्यू गिनी ने पिछले सप्ताह अपने यहां 180 चीनी नागरिकों को आने से रोक दिया था. ऐसा भी बताया गया था कि वो लोग ट्रायल वैक्सीन में 'प्रतिरोधक' हो चुके हैं.






जुलाई से ही दी जा रही है वैक्सीन
चीन के एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया है कि चीन की सरकार कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में काम करने वालों को जुलाई से वो कोरोना वैक्सीन दे रहा है जिसपर अभी पूरी तरह से मुहर नहीं लगी है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के विज्ञान और तकनीक केंद्र के प्रमुख चेंग चोंगेई ने सरकारी मीडिया संस्था सीसीटीवी से बातचीत में कहा कि सरकार ने सार्स-कोविड-2 (यानी कोविड-19) की वैक्सीन स्वास्थ्य कर्मियों और सीमा पर तैनात अधिकारियों को 'आपातकालीन इस्तेमाल' के तौर पर देने की अनुमति दी थी. चेंग वैक्सीन विकसित करने वाली टास्क-फ़ोर्स का नेतृत्व कर रहे हैं.

चेंग ने बाताया कि सात दिनों से चीन में कोई भी स्थानीय संक्रमण का नया मामला सामने नहीं आया है. सीमा पर काम करने वालों के बारे में माना जाता है कि उन्हें जोख़िम ज़्यादा है. चीन में क्लीनिकल ट्रायल के बाहर वैक्सीन इस्तेमाल करने का यह पहला ऐसा मामला है जिसकी पुष्टि हुई है. इस बात की अभी पूरी जानकारी नहीं है कि इन लोगों को कौनसी वैक्सीन दी गई और कितने लोगों को दी गई, मगर चेंग का कहना है कि यह पूरी तरह क़ानून का पालन करते हुए किया गया जिसके तहत गंभीर स्वास्थ्य संकट को देखते हुए ग़ैर-प्रमाणित वैक्सीन के सीमित उपयोग की अनुमति होती है.

साइड इफेक्ट से बचाव के लिए भी तैयार
चेंग ने सीसीटीवी से कहा, 'हमने एक पूरी योजना की श्रृंखला तैयार की है जिसमें मेडिकल सहमति-पत्र, साइड इफ़ेक्ट मॉनिटरिंग प्लान, बचाव की योजना और मुआवज़े को लेकर योजना शामिल है ताकि यह निश्चित किया जा सके कि यह आपातकालीन इस्तेमाल पूरी तरह से व्यवस्थित और निगरानी के दायरे में है.' उन्होंने बताया कि पतझड़ और सर्दियों से पहले इसे दूसरे समूहों पर टेस्ट करने की भी योजना बनाई गई है. बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन दुनिया भर में 170 संभावित वैक्सीनों को लेकर चल रहे काम पर नज़र रखे हुए है.

चीन में कई वैक्सीन तीसरे चरण के परीक्षण के दौर में पहुंच चुके हैं. इस चरण में हज़ारों लोगों को वैक्सीन देकर इसके सुरक्षित और प्रभावी होने का परीक्षण किया जाएगा. सरकारी कंपनी चाइना नेशनल बायोटेक ग्रुप को अपने वैक्सीन के इंसानों पर परीक्षण के लिए संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, पेरू, मोरक्को और अर्जेंटीना में इजाज़त मिल गई है. कंपनी ने बताया है कि बीस हज़ार लोग बाहर के इन देशों में परीक्षण में हिस्सा ले रहे हैं. चीन की दूसरी कंपनियाँ सीनोवैक और कैनसीनो बायोलॉजिक्स भी रूस, इंडोनेशिया और ब्राज़ील में परीक्षण कर रही हैं.
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