US-भारत चिंतित: चीन-ईरान में 400 अरब डॉलर की डील, तेल-हथियार का लेन-देन होगा

चीन-ईरान में 400 अरब डॉलर की डील का रास्ता साफ़
चीन-ईरान में 400 अरब डॉलर की डील का रास्ता साफ़

China-Iran Trade and Military Deal: डील के तहत चीन (China) ईरान (Iran) से बेहद सस्‍ती दरों पर तेल (Crude Oil) खरीदेगा, वहीं इसके बदले में बीजिंग ईरान में 400 अरब डॉलर का निवेश करने जा रहा है. इस डील में सिर्फ निवेश शामिल नहीं है बल्कि ईरान को चीन से घातक आधुनिक हथियार भी देगा.

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तेहरान/बीजिंग. अमेरिका (US) को जवाब देने के लिए चीन (China) ने आगे बढ़कर ईरान (Iran) के साथ हाथ मिला लिया है. ये देशों के बीच हुए सबसे बड़े समझौतों (China-Iran Trade and Military Deal) में से एक है. इस डील के तहत चीन ईरान से बेहद सस्‍ती दरों पर तेल (Crude Oil) खरीदेगा, वहीं इसके बदले में बीजिंग ईरान में 400 अरब डॉलर का निवेश करने जा रहा है. इस डील में सिर्फ निवेश शामिल नहीं है बल्कि ईरान को चीन से घातक आधुनिक हथियार भी देगा. भारत के चीन से तनावपूर्ण संबंधों (India-China Rift) के मद्देनज़र ये डील ईरान-भारत के चाहबार पोर्ट प्रोजेक्ट पर भी असर डाल सकती है.

न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान और चीन के बीच 25 साल के रणनीतिक समझौते पर सहमति बन गयी है. इस समझौते को बस ईरान की संसद मजलिस से मंजूरी मिलना बाकी है. डील के मुताबिक चीन ईरान में बैंकिंग, दूरसंचार, बंदरगाह, रेलवे, और ट्रांसपोर्ट जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश करने की योजना बना रहा है. इस डील के बाद ईरान को चीनी जीपीएस सिस्टम बाइदू तक भी पहुंच मिल जाएगी. इसके लगा चीन से ईरान को 5G सर्विस शुरू करने में मदद के आलावा परमाणु ऊर्जा से संबंधित कार्यक्रम शुरू करने में भी मदद मिलेगी. ईरान साल 2018 से ही अमेरिका के कड़े प्रतिबंध झेल रहा है और उसके तेल निर्यात पर इसका काफी बुरा असर पड़ा है. चीन को सस्ते में तेल देने का सौदा ईरान के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है.

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निवेश के आलावा ट्रेनिंग और हथियार भी
इस डील में बाद चीन और ईरान में सैन्य सहयोग भी पहले के मुकाबले काफी तेजी से शुरू हो जाएगा. इस सैन्‍य सहयोग में हथियारों का विकास, संयुक्‍त ट्रेनिंग और खुफिया सूचनाओं की ट्रेनिंग भी शामिल है. इसके आलावा आतंकवाद, ड्रग्स और इंसानों की तस्‍करी के साथ सीमापार अपराधों को रोकने के लिए भी संयुक्त टीमें बनाई जाएंगी. चीन और ईरान के बीच अगर यह डील सफल हो जाती है तो अमेरिका और भारत को बड़ा झटका लग सकता है. ट्रंप प्रशासन लंबे समय से इस प्रयास में है कि ईरानी प्रशासन की सैन्‍य और परमाणु महत्‍वाकांक्षाओं को देखते हुए उसे अलग-थलग कर दिया जाए. यही नहीं चीन अगर इस इलाके में अपनी सैन्‍य पकड़ बना लेता है तो पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्‍य प्रभाव पर संकट आ जाएगा. चीन अफ्रीका के जिबूती में पहले ही विशाल नेवल बेस बना चुका है.

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अमेरिका-भारत की चिंताएं बढ़ेंगी!
रिपोर्ट के मुताबिक इस डील से भारत को भी झटका लग सकता है. भारत ने ईरान के बंदरगाह चाबहार के विकास पर अरबों रुपये खर्च कर चुका है. अमेरिका के दबाव की वजह से ईरान के साथ भारत के रिश्ते नाजुक काफी नाजुक दौर में पहुंच गए हैं और कभी भी चीन की इस डील के चलते भारत को ईरान के प्रति अपना पक्ष स्पष्ट करना पड़ सकता है. चाबहार व्यापारिक के साथ-साथ रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण है. यह चीन की मदद से विकसित किए गए पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से महज 100 किलोमीटर दूर है.

भारत को भी अमेरिका, सऊदी अरब, इजरायल बनाम ईरान में से किसी एक देश को चुनना पड़ सकता है. ईरान भारत का भी मुख्य तेल आपूर्तिकर्ता था, लेकिन अमेरिका के दबावों की वजह से नई दिल्ली को तेहरान से तेल आयात को तकरीबन खत्म करना पड़ा है. अमेरिका ने आरोप लगाया है कि चीन बौद्धिक संपदा अधिकार की चोरी कर रहा है और वहां पर बिजनेस करने वाली अमेरिकी कंपनियों पर जब तकनीक के हस्‍तांतरण का दबाव डाल रहा है. इसके आलावा कोरोन संक्रमण और साउथ चाइना सी के मुद्दे पर भी दोनों देश आमने-सामने हैं.
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