नेपाल पर कब्जे के लिए US-चीन में लगी है होड़, दोनों का निशाना है भारत

नेपाल पर कब्जे के लिए US-चीन में लगी है होड़, दोनों का निशाना है भारत
अमेरिका-चीन दोनों ही नेपाल में भारत का प्रभाव ख़त्म करना चाहते हैं.

नेपाल (India-Nepal Rift) के बदले रवैये के पीछे अमेरिका (US) और चीन (China) के बीच जारी तनातनी को भी माना जा रहा है. ये दोनों ही देश नेपाल में भारत के प्रभाव को कम कर नेपाल की सरकार और वहां के संसाधनों पर कब्ज़ा जमाने की फिराक में हैं.

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नई दिल्ली. भारत (India) के प्रति नेपाल (Nepal) के रुख में आए बदलाव के पीछे सिर्फ चीन (China) ही नहीं अमेरिका (US) की राजनीति भी कम कर रही है. नेपाल के बदले रवैये के पीछे अमेरिका और चीन के बीच जारी तनातनी को भी माना जा रहा है. ये दोनों ही देश नेपाल में भारत के प्रभाव को कम कर नेपाल की सरकार और वहां के संसाधनों पर कब्ज़ा जमाने की फिराक में हैं. अमेरिका और चीन की एजेंसियों के बीच नेपाल में सरकारी तंत्र को अपने कब्जे में लेने की होड़ मची हुई है.

मिली जानकारी के मुताबिक जहां चीन नेपाल में अपना दबदबा कायम कर रणनीतिक तौर से भारत को सालों से घेरने की कोशिश में लगा हुआ है. वहीं अमेरिका नेपाल में अपना प्रभाव कायम कर भारत और चीन दोनों को मॉनिटर करना चाहता है. इसी को लेकर अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी CIA ने सालों से वहां ख़ुफ़िया ऑपरेशंस चलाए हुए हैं. जानकारों की मानें तो अमेरिका ने जोशुआ-1 नाम के ऑपेरशन के तहत सबसे पहले नेपाल में जारी राजशाही को ख़त्म किया और वहां लोकतांत्रिक सरकार को मजबूत स्थिति में पहुंचाया. इसके बाद ऑपरेशन जोशुआ-2 -के तहत नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार को सत्ता में मजबूती के साथ काबिज़ करने के पीछे भी अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसियों का हाथ ही था.

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अब शुरू हुआ है ऑपरेशन जोशुआ-3
अमेरिकी सरकार के इशारे पर ख़ुफ़िया एजेंसी CIA ने अब जोशुआ-3 ऑपरेशन शुरू किया है जिसका लक्ष्य नेपाल और वहां की सरकार को आर्थिक तौर पर कमजोर कर अमेरिकी मदद पर निर्भर बनाना है. इस मकसद के साथ अमेरिका की दो एजेंसियां पीस कॉर्प्स और मिलेनियम चैलेंज कॉर्पोरेशन नेपाल में बड़े पैमाने पर फंडिंग में जुटी हैं. उधर चीन भी पीछे नहीं है और BRI यानी बेल्ट रोड इनिशिएटिव और दूसरे प्रोजेक्ट्स के जरिए नेपाल से भारत के प्रभाव को ख़त्म करने की कोशिशों में लगा है. इसी के मद्देनज़र चीन ने इंटेलीजेंस एजेंसी से जुड़ी रहीं हाओ यांकी को नेपाल का राजदूत बनाकर भेजा है.

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नेपाल में चीन की राजदूत रहीं हैं इंटेलिजेंस कमेटी में
हाओ यांकी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की इंटेलिजेंस कमेटी में रही हैं और चीनी ख़ुफ़िया एजेंसी मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी से भी जुड़ी रही हैं. नेपाल से पहले हाओ यांकी यूरोप के मामलों को देखती थीं. नेपाल में अमेरिकी योजनाओं को असफल करने और भारत के प्रभाव को ख़त्म करने के लिए हाओ यांकी ने केपी ओली सरकार से काफी अच्छे रिश्ते बना लिए हैं. इसका नतीजा अब पार्टी के सीनियर नेता और पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड भी ओली की कुर्सी छीनने की अपनी जिद से पीछे हटते नज़र आ रहे हैं.

फिलहाल नेपाल की सरकार में जारी राजनीतिक संकट चीन के दखल के बाद ही शांत पड़ता नज़र आ रहा है. अमेरिका और चीन दोनों ही मुल्क नेपाल की सरकार पर अपना प्रभाव कायम करना चाहते और इसके लिए साम,दाम,दंड भेद का इस्तेमाल करने से नही चूक रहे हैं. ज्यादातर चीजों के लिए सालों से भारत पर आश्रित रहे नेपाल ने अब दो मुल्कों के विकल्प देखकर भारत के हितों की अनदेखी करनी शुरू कर दी है.
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