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चीन की सरकार ने एक चौथाई विदेशी मीडिया वेबसाइटों पर लगा दी पाबंदी

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Updated: October 22, 2019, 6:01 PM IST
चीन की सरकार ने एक चौथाई विदेशी मीडिया वेबसाइटों पर लगा दी पाबंदी
चीन में 'ग्रेट फायरवाल' के जरिये वेबसाइट्स पर प्रतिबंध लगाया जाता है. आधुनिक रूप से यह दुनिया का सबसे प्रभावशाली सेंशरशिप उपकरण है.

चीन (China) में 215 समाचार संगठन (News Organisations) काम कर रहे हैं. इनमें 23 फीसदी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. चीन की सरकार वेस्‍टर्न वेबसाइट्स और ऑनलाइन सर्विसेस के प्रति अच्छी राय नहीं रखती है. सोशल मीडिया साइट्स (Social Media websites) को टारगेट किया जाता है. वीडियो (Video) साझा करने वाली साइट्स को भी बंद कर दिया जाता है. बीजिंग (Beijing) का मानना है कि इनका असर पूरे समुदाय (Community) पर होता है.

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  • Last Updated: October 22, 2019, 6:01 PM IST
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वुजहेन. चीन (China) ने विदेशी समाचार संगठनों (Foreign News Organisations) के एक धड़े पर रोक लगा दी है. इसके तहत चीन के नागरिक इन संस्थानों की वेबसाइट्स (Websites) की खबरें देख और पढ़ नहीं सकेंगे. प्रेस पर निगरानी रखने वाली चीन की एक एजेंसी ने मंगलवार को यह जानकारी दी. फॉरिन कॉरेस्पोंडेंट्स 'क्लब ऑफ चाइना' (FCCC) ने कहा कि अब चीन के नागरिक यहां चल रहे 215 समाचार संगठनों में 23 प्रतिशत की विषय-वस्तु (Content) नहीं पढ़ सकेंगे. इन समाचार संगठनों के पत्रकार चीन में रहकर काम करते हैं.

अंग्रेजी के 31 फीसदी समाचार संगठनों पर लगाया प्रतिबंध
फॉरिन कॉरेस्पोंडेंट्स 'क्लब ऑफ चाइना' ने बताया कि चीन में मुख्य रूप से अंग्रेजी (English Websites) में काम करने वाले 31 फीसदी समाचार संगठनों पर प्रतिबंध (Ban) लगा दिया गया है. प्रतिबंधित वेबसाइटों में बीबीसी, ब्लूमबर्ग, द गार्जियन, द न्यूयॉर्क टाइम्स, द वॉल स्ट्रीट जर्नल, वॉशिंगटन पोस्ट, योमीयूरी सिम्बन और कई अन्य शामिल हैं. चीन में तथाकथित 'ग्रेट फायरवाल' के जरिये वेबसाइट्स पर प्रतिबंध लगाया जाता है. आधुनिक रूप से यह दुनिया का सबसे प्रभावशाली सेंशरशिप उपकरण है.

'वेस्‍टर्न वेबसाइट्स के प्रति अच्‍छी राय नहीं रखता है चीन'

बीजिंग (Beijing) की एक कंसल्टेंसी फर्म का कहना है कि चीन की सरकार वेस्‍टर्न वेबसाइट्स और ऑनलाइन सर्विसेस के प्रति अच्छी राय नहीं रखती है. सोशल मीडिया साइट्स (Social Media websites) को टारगेट किया जाता है. वीडियो (Video) साझा करने वाली साइट्स को भी बंद कर दिया जाता है. बीजिंग का मानना है कि इनका असर पूरे समुदाय (Community) पर होता है. फर्म का कहना है कि यह नियंत्रण की बात है. चीन की सरकार वेब पर कंट्रोल चाहती है. सरकार की कोशिश रही है कि स्थानीय इंटरनेट सेवा प्रदान (Local Internet Service Providers) करने वालों के साथ काम किया जाए.

साइट्स पर नियंत्रण के लिए ट्रैफिक पर रखी जाती है नजर
कंसल्‍टेंसी फर्म ने कहा कि इस तरह के नियंत्रण (Control) के लिए चीन इंटरनेट ट्रैफिक पर भी नज़र रखता है. इसके लिए ग्रेट फायरवाल (Great Firewall) का इस्तेमाल करता है. चीन में इंटरनेट पर जानकारियों का आदान-प्रदान कुछ चुनिंदा गेटवे से गुजरकर जाता है. इनकी निगरानी (Monitoring) सरकार के पास रहती है. कभी-कभी उन वेबसाइट्स को ब्लॉक भी कर दिया जाता है, जो सरकार को पसंद नहीं होतीं. सरकार ने डोमेन नेम भी ब्लॉक किए हैं, जिसके बाद ये साइटें खोजना असंभव हो जाता है. हालांकि, फायरवाल (Firewall) को तोड़ा भी जा सकता है. चीन में इंटरनेट यूजर्स प्रॉक्‍सी साइट्स (Proxy websites) का इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा कई तरीके हैं, जिससे प्रतिबंधित साइट्स (Banned Sites) का कंटेट इस्तेमाल किया जा सकता है.
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First published: October 22, 2019, 5:27 PM IST
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