चीन में निशाने पर ईसाई समुदाय, कई चर्च ढहाए, प्रार्थना को भी जगह नहीं

चीन की नास्तिक कम्युनिस्ट सरकार की विकासवादी सोच के कारण धार्मिक मान्यताओं के लिए देश में कोई स्थान नहीं है.

भाषा
Updated: September 15, 2018, 5:38 PM IST
चीन में निशाने पर ईसाई समुदाय, कई चर्च ढहाए, प्रार्थना को भी जगह नहीं
सांकेतिक तस्‍वीर
भाषा
Updated: September 15, 2018, 5:38 PM IST
चीन की कम्युनिस्ट सरकार की विकासवादी सोच के कारण धार्मिक मान्यताओं के लिए देश में कोई स्थान नहीं है. विकास परियोजनाओं को चलाने के लिए बड़े पैमाने पर प्राचीन इलाकों को ढहाने का अभियान चल रहा है. इसके कारण हेनान प्रांत में रोमन कैथोलिकों समुदाय के पास प्रार्थना करने के लिए कोई जगह नहीं बची है.

इसका उदाहरण मध्य चीन के कैथोलिक चर्च के बाहर लगे एक सरकारी साइन बोर्ड में देखा जा सकता है. जिसमें बच्चों को प्रार्थना में नहीं शामिल होने की चेतावनी दी गई है. साथ ही चीन में बड़े पैमाने पर “अवैध” चर्च गिराए जा रहे हैं. पादरी अपने समुदाय के लोगों की निजी सूचना अधिकारियों को दे रहे हैं. चीन में ईसाईयों के लिए फिलहाल इसी तरह का माहौल बना हुआ है.

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ऐसा ही अभियान चीन के सभी क्षेत्रों में देखा जा सकता है. यह अभियान दिन प्रति दिन और तेज होता जा रहा है. बता दें कि सन् 1951 में चीन सरकार के इसी तरह के रवैये के कारण, वेटिकन और बीजिंग के आपसी संबंध कटु हो गए थे हालांकि अब उनमें सुधार आया है. इसके साथ ही बीजिंग के बिशप की नियुक्ति के अधिकार को लेकर जारी विवाद भी अब कुछ हद तक सुलझता दिख रहा है.

गौरतलब है कि चीन में बिसप के नियुक्त को लेकर कर हुए इस विवाद के चलते चीन के करीब 1.20 करोड़ कैथोलिक दो समूहों में बंट गए हैं. एक समूह जो सरकार द्वारा मंजूर धर्माधिकारी को मानता है. जबकि दूसरा वह है जो रोम समर्थक चर्च के स्वीकृत नियमों को मानता है.

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ईसाइयों को लेकर इस विवाद में चीन सरकार ने चर्च के शीर्ष पर से क्रॉस हटाने का आदेश दिया है. इसके अलावा सरकार ने चर्च से मुद्रित धार्मिक सामग्रियों और पवित्र चीजों को जब्त कर लिया गया है, और चर्च द्वारा चलाए जाने वाले केजी स्कूलों को बंद कर दिया गया है.

सरकार ने चर्च से राष्ट्रीय झंडा फहराने और संविधान को प्रदर्शित करने को दबाव बनाया है. इसके अतिरिक्त सार्वजनिक स्थानों से धार्मिक प्रतिमाओं को हटाने को भी कहा गया है.

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