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Coronavirus: मास टेस्टिंग, ट्रैवल बैन... जानें कैसे चीन ने 30 दिन में डेल्टा वेरिएंट पर पाया काबू

Coronavirus: मास टेस्टिंग, ट्रैवल बैन... जानें कैसे चीन ने 30 दिन में डेल्टा वेरिएंट पर पाया काबू

खबरों के मुताबिक कोरोना का डेल्टा स्ट्रेन चीन के 17 प्रांतों के 50 शहरों में फैल गया और वुहान में भी एक बार फिर से कोरोना संक्रमण फैल गया. फाइल फोटो

खबरों के मुताबिक कोरोना का डेल्टा स्ट्रेन चीन के 17 प्रांतों के 50 शहरों में फैल गया और वुहान में भी एक बार फिर से कोरोना संक्रमण फैल गया. फाइल फोटो

Coronavirus in China: बड़े पैमाने पर टेस्टिंग, कड़े क्वारंटीन नियम और यातायात पर कड़ाई से प्रतिबंधों के जरिए चीन ने संक्रमण पर काबू पाया है और डेल्टा वेरिएंट संक्रमण के खिलाफ भी ये कारगर रहा है.

    बीजिंग. चीन (China) में जुलाई महीने के अंत में कोरोना वायरस (Coronavirus) के डेल्टा वेरिएंट (Delta Variant) के मामलों ने महामारी को एक बार फिर सिर उठाने का मौका दिया, लेकिन संक्रमण को रोकने के लिए चीन अधिकारियों ने जिस तत्परता और कड़े प्रतिबंधों का इस्तेमाल किया, उसके बारे में अन्य देश सोच भी नहीं सकते. चीन में संक्रमण के नए मामले सामने आने के बाद एक महीने की अवधि पूरी होने को है, लेकिन चीन में संक्रमण के मामले लगभग शून्य हो गए हैं. आइए आपको बताते हैं कि चीन ने डेल्टा वेरिएंट के मामलों पर कैसे पाया काबू –

    नए मामले कब सामने आए
    जुलाई के मध्य में मास्को से आने वाली एक फ्लाइट में चीन के पूर्वी शहर नानजिंग में संक्रमण के ताजा मामलों का पता चला. खबरों के मुताबिक एयरपोर्ट के सफाई कर्मियों में संक्रमण का पता चला था, ये सारे मामले डेल्टा वेरिएंट के थे. डेल्टा वेरिएंट का पहला मामला भारत में सामने आया था. वुहान में 2019 में सामने आई महामारी के बाद से जुलाई में संक्रमण एक बार फिर तेजी से बढ़ा. पूरे चीन में संक्रमण के क्लस्टर बन गए और जिन इलाकों में महीने भर से संक्रमण का कोई मामला नहीं था, महामारी वहां भी पहुंच गई.

    खबरों के मुताबिक कोरोना का डेल्टा स्ट्रेन चीन के 17 प्रांतों के 50 शहरों में फैल गया और वुहान में भी एक बार फिर से कोरोना संक्रमण फैल गया. बता दें कि वुहान में जुलाई तक कोरोना का कोई नया केस नहीं पाया गया था. चीनी अधिकारियों ने कहा कि अगस्त की शुरुआत के बाद से लक्षणों वाला कोई नया केस सामने नहीं आया है. हालांकि चीन के आंकड़ों पर भरोसा करना थोड़ा मुश्किल है. लेकिन, शहरों में हटाए जा रहे प्रतिबंधों और दी जा रही छूट से पता चलता है कि चीनी अधिकारियों द्वारा लागू किए कड़े प्रतिबंधों का असर हुआ है. इसका मतलब ये हुआ कि 20 जुलाई को कोरोना के नए मामले सामने आने के बाद चीन को डेल्टा वेरिएंट संक्रमण पर काबू पाने में महज 30 दिन का वक्त लगा है. चीन में इस समय कोरोना के 2300 केस हैं, हर रोज औसत रूप से तकरीबन 80 नए मामले सामने आ रहे हैं.

    नए मामलों पर चीन ने कैसे पाया काबू
    दिसंबर 2019 में चीन ने पहली बार कोरोना वायरस का सामना किया था, चीनी अधिकारियों ने इससे निपटने के लिए कंटेनमेंट स्ट्रैटजी बनाई थी और कोरोना की 30 से ज्यादा लहरों को काबू किया था. वहीं डेल्टा वेरिएंट के मामले चीनी अधिकारियों को ज्यादा सख्त रवैया अपनाना पड़ा, क्योंकि ये पहले के वेरिएंट से ज्यादा संक्रामक है.

    चीन ने इसके लिए बड़ी संख्या में टेस्टिंग, यात्राओं पर प्रतिबंध और क्वारंटीन आदेशों को लागू किया. साथ संक्रमण को काबू करने में नाकाम रहने पर अधिकारियों पर एक्शन लिया. खबरों के मुताबिक 50 के करीब अधिकारियों पर चीन सरकार ने कार्रवाई की. इनमें स्थानीय सरकार के प्रमुख, स्वास्थ्य अधिकारी, अस्पतालों और एयरपोर्ट के कर्मचारियों को संक्रमण को रोकने में लापरवाही की सजा दी गई.

    बता दें कि पिछले साल मार्च में पीएम मोदी द्वारा लगाए गए लॉकडाउन को दुनिया भर में सबसे कड़े प्रतिबंधों में से एक कहा गया. वहीं ब्रिटेन ने कर्फ्यू और प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया, तो ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में लॉकडाउन का पालन करवाने के लिए मिलिट्री लगाई गई. हालांकि इन लोगों को चीन की कंटेनमेंट स्ट्रैटजी की तरह संक्रमण को काबू पाने में सफलता नहीं मिली.

    चीन ने किस तरह के प्रतिबंध लगाए
    बड़े पैमाने पर टेस्टिंग, कड़े क्वारंटीन नियम और यातायात पर कड़ाई से प्रतिबंधों के जरिए चीन ने संक्रमण पर काबू पाया है. चीन को इस रणनीति के तहत कोरोना को काबू करने में सफलता मिली है और डेल्टा वेरिएंट संक्रमण के खिलाफ भी ये कारगर रहा है. खबरों के मुताबिक चीनी अधिकारियों ने पूरे शहर की टेस्टिंग करने के साथ कई राउंड टेस्टिंग की है. कभी-कभी तो सिर्फ एक मामले मिलने पर भी पूरे शहर की टेस्टिंग की गई. खबरों में कहा गया कि चीन ने नानजिंग में पिछले महीने 10 करोड़ से ज्यादा टेस्टिंग की है. नानजिंग में ही डेल्टा वेरिएंट के नए मामले सामने आए थे, जिसकी आबादी 92 लाख के आसपास है.

    एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय हेनान प्रांत के झेंगझू प्रांत में बिना लक्षणों वाले केस आने के बाद शहर के अधिकारियों ने 1 करोड़ की पूरी आबादी की टेस्टिंग करने का आदेश दे डाला, जबकि चीनी प्रशासन ने शहर के स्वास्थ्य आयोग को निलंबित कर दिया था.

    वहीं जिन इलाकों में संक्रमण फैला था, वहां के लोगों का बीजिंग में घुसना मना था, किसी भी इलाके से कोई प्रवेश नहीं कर सकता था. वहीं संक्रमण के शिकार मरीजों के संपर्क में आने पर क्वारंटीन के कड़े नियम थे. हुनान प्रांत के झंगजियाजी शहर ने तो अपनी पूरी आबादी को लॉकडाउन कर दिया था और सभी टूरिस्ट स्पॉट बंद कर दिए गए थे.

    कड़े प्रतिबंधों का आर्थिक प्रभाव
    हालांकि डेल्टा वेरिएंट के संक्रमण को रोकने के लिए चीन के कड़े प्रतिबंधों का असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा. जुलाई महीने में खपत और मैन्युफैक्चरिंग के आंकड़ों में गिरावट दर्ज की गई है. अगस्त में भी ऐसी ही स्थिति रहने की उम्मीद है. इन्वेस्टमेंट बैंकों ने चीन की वृद्धि दर को घटा दिया है. चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के डायरेक्टर मा शियोवेई ने कहा, ‘हमारा लक्ष्य गर्मी की छुट्टियों के बाद सितंबर में दोबारा स्कूल खुलने और कॉलेज सेशन शुरू होने से पहले संक्रमण को कंट्रोल करना था.’

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    चीन में टीकाकरण की रफ्तार
    सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के मुताबिक 23 अगस्त तक वैक्सीन की 1.94 बिलियन डोज लोगों को दी गई है. वहीं 77 करोड़ लोगों ने वैक्सीन की दोनों खुराक लगवाई है. चीनी अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि उनकी बनाई वैक्सीन डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ सिर्फ 60 फीसदी प्रतिरोधी है, लेकिन कोरोना के गंभीर मामलों में सौ फीसदी प्रभावी हैं.

    Tags: China Nanjing City, Coronavirus in China, Coronavirus testing, Covid 19 vaccination, Delta Variant cases in China, कोरोना वायरस, कोरोना वायरस टेस्टिंग, चीन, डेल्टा वैरिएंट

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