डोनाल्ड ट्रंप को फिर से व्हाइट हाउस में देखना चाहता है चीन, जानिए क्यों

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग

चीन, अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव (US President Election 2020) में ट्रंप की जीत से फायदे की संभावना तलाश रहा है क्योंकि शी जिनपिंग चीन को वैश्विक स्तर पर सुपरपावर बनाने के मिशन में जुटे हुए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 21, 2020, 7:40 PM IST
  • Share this:
वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अपने कार्यकाल के शुरुआती दौर से ही चीन (China) पर लगातार हमला बोल रहे हैं. इसके साथ ही वह चीन की हर दूसरी बात को वह सिरे से खारिज कर रहे हैं. बावजूद इसके चीन व्हाइट हाउस (White House) में ट्रंप की मौजूदगी दोबारा चाहता है क्योंकि बीजिंग (Beijing) अपने सुपरपावर विरोधी के पतन के इंतजार में है. गौरतलब है कि चार दशक पहले दोनों देशो में औपचारिक संबंधों का निर्माण हुआ था. इन रिश्तों पर तब से अब तक कोई संज्ञान नहीं लिया गया है. चीन हाल में इस बात का ऐलान कर चुका है कि वह अमेरिका के साथ नए शीत युद्ध (Cold War) की स्थिति नहीं चाहता है.

कोरोनावायरस के लिए चीन को ठहराया जिम्मेदार

इधर, ट्रंप अपने 'अमेरिका फर्स्ट बैनर' के तले चीन को उनके देश और दुनिया के लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा बता चुके हैं. वह चीन के साथ ट्रेड वॉर (Trade War) भी शुरू कर चुके हैं. ट्रंप के इस कदम से चीन को व्यापार में बिलियन डालर्स का नुकसान उठाना पड़ रहा है. इतना ही नहीं ट्रंप ने चीन की तकनीकी कंपनियों के लिए भी कई समस्याएं खड़ी कर दी हैं. इसके अलावा वह दुनियाभर में फैला खतरनाक वायरस कोरोना के लिए भी चीन को दोषी मान इसकी पूरी जिम्मेदारी उसपर थोप दी है. बावजूद इसके चीन, अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव (President Election) में ट्रंप की जीत से फायदे की संभावना तलाश रहा है क्योंकि शी जिनपिंग चीन को वैश्विक स्तर पर सुपरपावर बनाने के मिशन में जुटे हुए हैं.



चीन के प्रति सख्त अमेरिका
ट्रंप चीन के प्रति चाल पर चाल चल रहे हैं क्योंकि उन्होंने चीन को जलवायु परिवर्तन समझौते (Climate Change) और एशिया-प्रशांत वाणिज्यिक सौदे (Asia Pacific Commercial Deal) से भी बाहर रास्ता दिखा दिया है. इसके साथ ही चीनी उत्पादों पर बिलियन डॉलर्स के टैरिफ (Tariff) का भार लाद दिया है. ट्रंप ने कोरोनावायरस के चलते देश को विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) से अलग कर लिया है. लेकिन ऐसा देखा जा रहा है कि जिस जगह से अमेरिका अपने पैर पीछे खींच रहा है, वहां चीन अपना पैर आगे अड़ा दे रहा है. जिनपिंग चीन को जलवायु परिवर्तन के खिलाफ युद्ध के नेता के तौर पर गढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर खुद को मुक्त व्यापार का खिलाड़ी घोषित कर रहा है. चीन वादा कर रहा है कि वह कोरोना की वैक्सीन को विकासशील देशों के साझा करेगा.

ये भी पढ़ें: बाइडेन ने कमला हैरिस को दी बधाई, कहा- व्हाइट हाउस में मनाएंगे अगला Birthday 

नाईजीरिया में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने चलाई ताबड़तोड़ गोलियां, कई मरे

बकनैल यूनिवर्सिटी में राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंध के प्रोफेसर झू झीकुन का मानना है 'राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप की जीत होती है तो इससे चीन को दुनिया में सुपरपावर बनने के लिए और वक्त मिल जाएगा. चीन के नेतृत्व को अंतरराष्ट्रीय सहयोग, बहुपक्षवाद और वैश्वीकरण पर अपना रुख सख्ती से रखने का मौका मिलने की उम्मीद है.' वहीं, अमेरिका में हार्वर्ड केनेडी स्कूल में चीन पर विशेषज्ञ फिलिप कॉ का भी मानना है कि ट्रंप का दूसरा कार्यकाल चीन के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. उनका यह भी कहा कि इससे अमेरिका अपने पुराने सहयोगियों से दूरी बना रहा है. यही कारण है इस खाली जगह पर चीन खुद को स्थापित करने में लगा है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज