लाइव टीवी

सीमा पर टेंशन: भारत के पक्ष में आया अमेरिका, कहा- चीन माहौल ख़राब कर रहा है

News18Hindi
Updated: May 22, 2020, 10:22 AM IST
सीमा पर टेंशन: भारत के पक्ष में आया अमेरिका, कहा- चीन माहौल ख़राब कर रहा है
चीन से सीमा विवाद मामले में भारत के पक्ष में आया अमेरिका

व्हाइट हाउस (White House) ने गुरूवार को कहा कि चीन भारत समेत अपने पड़ोसी देशों के साथ उकसावे वाली और बलपूर्वक सैन्य एवं अर्द्धसैन्य गतिविधियों में संलिप्त है. अमेरिका ने स्पष्ट कहा कि दक्षिण एशिया (South Asia) में चीन ने अपने सभी पड़ोसी देशों के लिए माहौल ख़राब किया हुआ है.

  • Share this:
वाशिंगटन. भारत (India) और चीन (China) की सीमा पर एक बार फिर जारी गतिरोध के बीच अमेरिका (US) खुल कर भारत के समर्थन में आ गया है. व्हाइट हाउस (White House) ने गुरूवार को कहा कि चीन भारत समेत अपने पड़ोसी देशों के साथ उकसावे वाली और बलपूर्वक सैन्य एवं अर्द्धसैन्य गतिविधियों में संलिप्त है. अमेरिका ने स्पष्ट कहा कि दक्षिण एशिया (South Asia) में चीन ने अपने सभी पड़ोसी देशों के लिए माहौल ख़राब किया हुआ है. इससे पहले अमेरिका के एक शीर्ष राजनयिक ने भारत का समर्थन किया था जिस पर चीन ने कड़ी आपत्ति जाहिर की थी.

व्हाइट हाउस ने एक रिपोर्ट में कहा, 'बीजिंग पीला सागर, पूर्व तथा दक्षिण चीन सागरों, ताइवान जलडमरूमध्य और चीन-भारत सीमा इलाकों में उकसावे वाली और बलपूर्वक सैन्य तथा अर्द्धसैन्य गतिविधियों में संलिप्त होकर अपने पड़ोसियों से की गई प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करता तथा अपने बयान से विरोधाभासी रुख अपनाता है.' 'चीन गणराज्य की ओर अमेरिका का कूटनीतिक रुख' शीर्षक की यह रिपोर्ट अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी गई है. रिपोर्ट में कहा गया है, 'चूंकि चीन की ताकत बढ़ी है तो अपने हितों के लिए माने जा रहे खतरों को खत्म करने तथा वैश्विक रूप से कूटनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति करने की कोशिशों में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की धमकी देने और बल का इस्तेमाल करने की इच्छा तथा क्षमता प्रबल हुई है.'

एलिस वेल्स ने भी की थी चीन की आलोचना
दरअसल चीन से लगी भारत की सीमा पर तनाव के बीच अमेरिका ने नयी दिल्ली का समर्थन किया. एक शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने बीजिंग पर आरोप लगाया कि वह अपने अतिसक्रिय और परेशान करने वाले व्यवहार से यथास्थिति को बदलने की कोशिश कर रहा है और उसका विरोध करना चाहिए. अमेरिकी विदेश विभाग में दक्षिण एवं मध्य एशिया ब्यूरो की निवर्तमान प्रमुख एलिस वेल्स ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'मुझे लगता है कि सीमा पर जो तनाव है वह इस बात को याद दिलाता है कि चीन आक्रामक रुख जारी रखे हुए है. चाहे वह दक्षिण चीन सागर हो, या भारत से लगी सीमा, हम चीन द्वारा उकसाने वाला और परेशान करने वाला व्यवहार लगातार देख रहे हैं. यह इस बारे में सवाल खड़े करता है कि चीन अपनी बढ़ती शक्ति का इस्तेमाल किस तरह से करना चाहता है.' व्हाइट हाउस ने कहा कि अमेरिका खुली और मुक्त व्यवस्था के साझा सिद्धांतों का समर्थन करने के लिए विदेशी सहयोगियों, साझेदारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सहकारी साझेदारी और सकारात्मक विकल्प तैयार कर रहा है.



 



चीन ने जताया ऐतराज
उधर चीन ने गुरूवार को कहा कि भारत-चीन सीमा मुद्दे पर अमेरिका की एक वरिष्ठ राजनयिक की टिप्पणियां 'निरर्थक' हैं और दोनों देशों के बीच राजनयिक माध्यम से चर्चा जारी है तथा वाशिंगटन का इससे कोई लेना-देना नहीं है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजान ने यहां एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि चीन-भारत सीमा मुद्दे पर चीन की स्थिति स्थिर और स्पष्ट रही है. वेल्स की टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अमेरिकी 'राजनयिक की टिप्पणियां केवल निरर्थक हैं.'

झाओ ने कहा कि चीन के सीमा प्रहरी दृढ़ता से चीन की सीमा की संप्रभुता और सुरक्षा की रखवाली करते हैं तथा भारत की ओर से होने वाली अतिक्रमण की गतिविधियों से मजबूती से निपटते हैं. उन्होंने कहा, 'हमारे सैनिक सीमा क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता की दृढ़ता से रक्षा करते हैं. हम भारतीय पक्ष से मिलकर काम करने, हमारे नेतृत्व की महत्वूपर्ण सहमति का पालन करने, हस्ताक्षिरत समझौतों का पालन करने, स्थिति को जटिल बनाने वाली एकतरफा कार्रवाइयों से बचने का आग्रह करते हैं.' झाओ ने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि वे सीमा क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए ठोस प्रयत्न करेंगे. दोनों पक्षों के बीच राजनयिक माध्यम से चर्चा हो रही है जिससे अमेरिका का कोई लेना-देना नहीं है.'

क्या है मामला ?
बता दें कि बीती पांच मई को पेंगोंग झील क्षेत्र में भारत और चीन के लगभग 250 सैनिकों के बीच लोहे की छड़ों और लाठी-डंडों से झड़प हो गई थी. दोनों ओर से पथराव भी हुआ था. इस घटना में दोनों देशों के सैनिक घायल हुए थे. इसी तरह की एक अन्य घटना में नौ मई को सिक्किम सेक्टर में नाकू ला दर्रे के पास दोनों देशों के लगभग 150 सैनिकों के बीच झड़प हो गई थी. सूत्रों के अनुसार इस घटना में दोनों पक्षों के कम से कम 10 सैनिक घायल हुए थे. न तो भारतीय सेना ने और न ही विदेश मंत्रालय ने दोनों देशों की सेनाओं के बीच बढ़ते तनाव पर कोई टिप्पणी की है.

 

टकराव की हालिया दो घटनाओं पर विदेश मंत्रालय ने पिछले सप्ताह कहा था कि वह चीन से लगती सीमा पर शांति एवं स्थिरिता बनाए रखने को प्रतिबद्ध है और यदि सीमा के बारे में समान धारणा होती तो ऐसी घटनाओं से बचा जा सकता था. साल 2017 में डोकलाम तिराहे क्षेत्र में भारत और चीन के सैनिकों के बीच 73 दिन तक गतिरोध चला था जिससे परमाणु अस्त्र संपन्न दोनों देशों के बीच युद्ध की आशंका उत्पन्न हो गई थी. भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा कही जाने वाली 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा पर विवाद है. चीन दावा करता है कि अरुणाचल प्रदेश दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है, जबकि भारत का कहना है कि यह उसका अभिन्न अंग है. चीन जम्मू कश्मीर का पुनर्गठन किए जाने और लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाने के भारत के कदम की निन्दा करता रहा है. लद्दाख के भी कई हिस्सों पर बीजिंग अपना दावा जताता है.

 

यह भी पढ़ें:
कुछ लोग अधिक, तो कुछ फैलाते ही नहीं हैं कोरोना संक्रमण, क्या कहता है इस पर शोध
Antiviral Mask हो रहा है तैयार, कोरोना लगते ही बदलेगा रंग और खत्म कर देगा उसे
कोरोना संक्रमण से कितने सुरक्षित हैं स्विमिंग पूल, क्या कहते हैं विशेषज्ञ
Covid-19 की तरह किसी महामारी को लंबा नहीं खिंचने देगी क्वांटम कम्प्यूटिंग
कोरोना वायरस से कैसे लड़ेगा आपका शरीर, Genes करते हैं इसका फैसला
First published: May 22, 2020, 10:22 AM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading