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अपने फायदे के लिए चीन ने पाकिस्तान की नौसेना को दी नई शक्ल, बढ़ा रहा कर्ज का बोझ

 चीन और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच साउथ चाइना समुद्र के द्वीप हैनन में बैठक भी हुई थी

चीन और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच साउथ चाइना समुद्र के द्वीप हैनन में बैठक भी हुई थी

चीन (China) अपना दबदबा कायम करने के लिए ऑल वेदर स्ट्रेटेजिक को-ऑपरेटिव पार्टनरशिप के नाम पर पाकिस्तान (Pakistan) को धीरे धीरे सैन्य ताक़त देकर क़र्ज़दार बना रहा है.

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नई दिल्ली. तेल के खेल में चीन (China) पाकिस्तान की नौसेना (Pakistan Navy) को नई शक्ल देने में लगा है. ऑल वेदर स्ट्रेटेजिक को-ऑपरेटिव पार्टनरशिप के नाम पर चीन, पाकिस्तान (Pakistan) को धीरे धीरे सैन्य ताक़त देकर क़र्ज़दार बना रहा है. जंगी जहाज़ों से लेकर सबमरीन तक, रडार से लेकर लॉन्ग रेंज सर्फेस टू एयर मिसाइल तक चीन, पाकिस्तान को सब कुछ मुहैया करा रहा है. चीन ने अपनी ताक़त को समुद्री इलाकों तक बढ़ाने के लिए एक ऐसा प्लान बनाया जिससे न सिर्फ वो फ़ारस की खाड़ी पर अपना दबदबा बढ़ा सके बल्कि इसके साथ ही अमेरिका (America) को भी चुनौती दे सके. ऐसे में चीन को सबसे ज़्यादा जरूरत ऐसे देश की थी जो न सिर्फ उसे अरब सागर में एक सैन्य बंदरगाह दे बल्कि उसी के मुताबिक़ चले. पाकिस्तान हर तरह से उसकी इस उम्मीद पर खरा उतरा है.

व्यापार और तेल के आयात के लिए समुद्री मार्ग के जरिए निर्भरता कम और जमीनी मार्ग के जरिए ज़्यादा हो इसके लिए चीन ने पाकिस्तान से CPEC का प्रोजेक्ट शुरू किया. बलूचिस्तान के पास ग्वादर के पोर्ट को विकसित करना शुरू किया इसके एवज़ में चीन ने पाकिस्तान को पैसा और सैन्य मदद दी. आज पाकिस्तान की नौसेना पूरी तरह से चीन पर निर्भर है. चीन के जंगी बेड़े और सबमरीन ग्वादर में कई बार दिखाई पड़े हैं.

पाकिस्तानी नौसेना को अपना रंग दे रहा चीन
पिछले एक दशक में चीन ने पाकिस्तान की नौसेना को अपना रंग देना शुरू किया. पाकिस्तान में जंगी जहाज़ों से लेकर सबमरीन तक, रडार से लेकर लॉन्ग रेंज सर्फेस टू एयर मिसाइल तक चीन की है. इसी के मद्देनज़र पाकिस्तान के लिए चीन 8 सबमरीन तैयार कर रहा है. प्रोजेक्ट S-26 के तहत पाकिस्तान ने चीन से 8 यूआन क्लास एयर इंडीपेंडेट सबमरीन का करार किया है. 2015 में पाकिस्तान का चीन से 4.8 बिलियन डॉलर का करार हुआ था. इन 8 सबमरीन में से 4 चीन में और बाकी 4 कराची शिपयार्ड में ट्रांसफ़र टेक्नॉलॉजी के तहत बनाई जानी है. पाकिस्तान को 2023 तक पहली चार पनडुब्बी मिलने की उम्मीद है. जबकि बाकी चार 2028 तक पाकिस्तान के कराची बंदरगाह में तैयार होने का प्लान है. यही नहीं प्रोजेक्ट -333 के तहत पाक नौसेना के लिए VLF स्टेशन यानी वैरी लो फ़्रीक्वेंसी स्टेशन बनाने का काम तो 2011 से ही तुर्बत में चीन की तरफ से जारी है.

पाकिस्तान नेवी ने 2011-14 के बीच फ़ास्ट अटैक क्राफ़्ट ( मिसाइल ) चीन से ख़रीदे हैं जिसकी कीमत 43.5 मिलियन डॉलर है. कांट्रेक्ट के तहत तीसरा FAC कराची में 2015 में शुरू किया गया था जो कि 2017 तक पूरा होना था. चीन ने अपने सबसे ताक़तवर युद्धपोत में से एक Type-054A/P युद्धपोत की लॉन्चिंग भी कर दी है. पाकिस्तान की नौसेना 2009 -2013 के बीच 4 जैंग्वई -2 क्लास F-22 फ्रीगेट यानी कि जंगी जहाज खरीद चुकी है और दूसरे चरण के लिए 4 अतिरिक्त F-22 फ्रीगेट को ट्रांसफ़र ऑफ़ टेक्नॉलॉजी के तहत पाकिस्तान में बनाएगा. इन फ्रीगेट में C-602 एंटी शिप मिसाइल लगाई जानी है और ये मिसाइल भी चीन से ट्रांसफ़र ऑफ़ टेक्नोलॉजी के जरिए ली जाएगी.

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चीन से ये हथियार भी खरीदने की योजना बना रहा पाक
वहीं नौसेना के एयर डिफेंस के लिए भी चीन से FN-16 SHORADS जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल भी पाकिस्तान अपनी नौसेना के लिए चीन से ख़रीदने का प्लान बना रहा है. जिसकी कीमत 13.256 मिलियन डॉलर के क़रीब है. हाल ही में चीन और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच साउथ चाइना समुद्र के द्वीप हैनन में बैठक भी हुई थी जिसमें चीन-पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की मीटिंग के बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने चीन-पाकिस्तान की दोस्ती को 'ऑल वेदर स्ट्रेटेजिक कॉपरेटिव पार्टनरशिप' करार दिया था. हैनन वही जगह है जहां चीन का सबसे बड़ा अंडरग्राउंड सबमरीन बेस है, टनल नुमा इस बेस की सैटेलाइट इमेज हाल ही में सामने आई थी. इस तस्वीर में चीन की एक पनडुब्बी दाखिल होती हुई दिखाई पड़ रही थी.

पाकिस्तान की नौसेना को मज़बूत कर एक तरह से वो अपने लिए सुरक्षित रास्ता तलाश रहा है. चीन का 80 फ़ीसदी तेल समुद्री रास्ते से मलक्का स्ट्रेट से होकर गुज़रता है और वो इस कोशिश में है कि ग्वादर के रास्ते पाइपलाइनों के जरिए या ट्रेन के जरिए सीधा चीन तक पहुंचाया जा सके. पाकिस्तान के भारत के प्रति रवैये को कैश करने के लिए चीन ने अपनी डिफेंस इंडस्ट्री के दरवाज़े खोल दिए हैं.

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