ढूंढ-ढूंढ कर इस घटना का हर सबूत मिटा रहा है चीन, खुलेआम खेली थी खून की होली

चीन ने अब तक इस घटना के बारे में जानकारी देने वाले 3,200 से अधिक स्रोतों को या तो मिटा दिया या सेंसर कर के वैसा करा दिया जैसा वह चाहता है.

News18Hindi
Updated: June 2, 2019, 4:05 PM IST
ढूंढ-ढूंढ कर इस घटना का हर सबूत मिटा रहा है चीन, खुलेआम खेली थी खून की होली
चीन ने अब तक इस घटना के बारे में जानकारी देने वाले 3,200 से अधिक स्रोतों को या तो मिटा दिया या सेंसर कर के वैसा करा दिया जैसा वह चाहता है.
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Updated: June 2, 2019, 4:05 PM IST
चीन के इतिहास में 30 मई, 1989 से चार जून 1989 तक जिस घटना को अंजाम दिया गया, उस घटना के हर सबूत को चीन मिटा देना चाहता है. टोरंटो यूनिवर्सिटी और हांगकांग यूनिवर्सिटी ने इसी साल एक सर्वे के बाद यह रिपोर्ट प्रकाशित की थी. इस रिपोर्ट के अनुसार चीन आज से 30 साल पहले थ्येनआनमन चौक पर खेली गई खून की होली का हर सबूत मिटा देने पर अमादा है. रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाले दावे में कहा कि चीन ने अब तक इस घटना के बारे में जानकारी देने वाले 3,200 से अधिक स्रोतों को या तो मिटा दिया या सेंसर कर के वैसा करा दिया जैसा वह चाहता है.

यह घटना है, थ्येनआनमन चौक पर हुए खुलेआम कत्लेआम की. अगर ब्रिटिश डॉक्यूमेंट्स पर भरोसा करें तो चीन में सरेआम खेली गई इस खून की होली में कम से कम 10,000 लोग मारे गए थे. लेकिन चीन ने हमेशा दावा करता है कि वहां एक शख्स की जान नहीं गई थी. अब जब इस घटना के 30 साल हो गए हैं, चीनी मीडिया और विदेशी मीडिया उस जगह पर जाने कोशिश करते हैं तो चीन ने वहां जोन के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं.



क्या छिपा रहा है चीन, क्यों नहीं बताता छात्रों के कत्‍लेआम की कहानी
साल 1989 के मई के आखिरी दो दिन और जून के शुरुआती चार दिन को चीन में लोकतंत्र की स्‍थापना से जोड़कर देखा जाता है. यूं तो साल 1949 में ही चीन में छिड़े गृह युद्ध में कम्युनिस्ट पार्टी ने जीत हासिल कर अध्यक्ष माओत्से तुंग के नेतृत्व में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्‍थापना की थी. लेकिन इस सरकार से लोग खफा थे. इसी नाराजगी को जताने के लिए सड़कों पर उतरे थे लोग.



इस चीनी नेता की मौत के बाद दोबारा गृह युद्ध के मुहानी पर पहुंच गया था चीन
चीनी सरकार से नाखुश लोग दबी आवाज में काफी समय से इसका विरोध कर रहे थे. लेकिन मई महीने में विरोधी सुर के नेता हू याओबैंग की मौत हो गई. इस मौत को हत्या मानकर चीनी लोग सड़कों पर उतरने लगे. खासतौर पर इनमें छात्र. इसके बाद चीन के ऐतिहास‌िक थ्येनआनमन चौक पर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया. महज तीन दिन में इस चौक पर हजारों की संख्या में छात्र पहुंच गए.
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चीन की सरकार ने रौंद दिया था छात्रों को
छात्रों के आंदोलन ने एक बड़ा रूप ले लिया था. थ्येनआमनन चौक पर ऐसा महौल बना जैसे चीन में एक नया लोकतंत्र स्‍थापित होने वाला है. चौंक पर आने वाले प्रदर्शनकारी लगातार संस्थागत भ्रष्टाचार को खत्म करने की मांग कर रहे थे. लेकिन उनके खून के होली कारण ये नहीं बना. असल में दो जून तक इस आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य चीन से कम्युनिस्ट पार्टी की सत्ता को हटाने की मांग करने लगे.

30 मई को ही थ्येनआमनन चौक पर छात्रों ने एक लोकतंत्र की मुर्ति स्‍थापित कर दी थी. इस मूर्ति की चर्चा चिंगारी की तरह पूरे देश में फैली. यह एक ऐसा प्रतीक था, जिसे चीन की कम्‍युनिस्ट पार्टी को हटाकर लोग सत्ता में बिठाना चाहते थे.



इसके बाद पूरे में विरोध प्रदर्शन के सुर उठने लगे. चारों ओर अफरातफरी का माहौल बना गया. आनन-फानने में दो जून की देर रात कम्युनिस्ट पार्टी ने मार्शल लॉ लागू कर दिया. तीन जून की रात से ही इस चौंक पर पहु्ंचे हजारों प्रदर्शनकारी खासतौर पर छोत्रों को तितर-बितर करने का अभियान शुरू हो गया. आखिरकार चार जून 1989 को देंग जियांगपिंग और दूसरे नेताओं ने सेना को यह आदेश दे दिया कि थ्येन आनमन चौक को पूरी तरह खाली करा‌ लिया जाए.

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प्रदर्शनकारी ने चौक छोड़ने से मना कर दिया. कुछ घंटों के इंतजार के बाद चीनी सेना ने यहां अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. इस घटना में हुई बर्बरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रदर्शनकारियों को इस जगह से हटाने के लिए चीनी सेना मिलिट्री टैंक लेकर पहु्ंची थी.

हालांकि चीन ने हमेशा दावा किया है कि प्रदर्शनकारियों को हटाने में एक भी शख्स की जान नहीं गई थी. लेकिन ब्रिटिश दस्तावेजों समेत कई रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इस मौके पर दस हजार से ज्यादा लोगों की हत्या कर दी गई थी.

इस घटना के दौरान बीजिंग के थियानमेन स्क्वायर की ओर बढ़ रहे पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के टैंकों को रोकते हुए एक शख्स की तस्वीर चार जून 1989 को एसोसिएट प्रेस (AP) के एक फोटोग्राफर ने खींच ली थी. इस तस्वीर को गॉडेस ऑफ डेमोक्रेसी (लोकतंत्र की देवी) कहा जाता है. इस तस्वीर को 'टैंक मैन' नाम से भी जानते हैं.



क्यों थ्येनआमनन चौक पर ही घटी ये घटना
चीन का थ्येनआमनन चौक ऐतिहासिक‌ थीन की स्‍थापना का साक्षी है. असल में जब साल 1949 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान कमजोर हुआ तब चीन को आजाद कराने का अभियान छिड़ा. इसे गृह युद्ध के नाम से जाना जाता है. तब कम्युनिस्ट पार्टी ने चीन के अधिकांश हिस्से पर काबू पाकर इसे पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना कहा. बाद में यही चीन बना. तब कम्युनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष माओत्से तुंग के नेतृत्व में सरकार बनी.

इसके बाद अक्टूबर, 1949 को चीन के थ्येनआनमन चौक पर ही उनके सम्मान के लिए आजाद चीन के लाखों लोग एकत्रित हो गए थे. बाद में इसी चौक पर चीन के संस्थापक माओत्से तुंग का स्मारक बना. इसलिए इसी चौक पर एक बार फिर से लोग इकट्ठा हुए थे. लेकिन आज यही चौक हजारों लोगों की मौत का साक्षी बन गया है और चीन हर मुमकिन कोशिश इस घटना को छिपाने की कोशिश कर रहा है.

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