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भारत-चीन को संबंधों में उतार-चढ़ाव के 'अजीब चक्र' को तोड़ना चाहिए: चीनी मंत्री

भाषा
Updated: December 1, 2019, 12:40 PM IST
भारत-चीन को संबंधों में उतार-चढ़ाव के 'अजीब चक्र' को तोड़ना चाहिए: चीनी मंत्री
'भारत-चीन थिंक टैंक फोरम'

चीन के उप विदेश मंत्री लुओ (Vice Foreign Minister Luo) ने बीजिंग (Beijing) में आयोजित 'चौथे भारत-चीन थिंक टैंक फोरम' में कहा, चीन और भारत का एक साथ उदय 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है.

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बीजिंग. चीन (China) के उप विदेशमंत्री लुओ झाओहुई (Vice Foreign Minister Luo Zhaohui) ने कहा है कि भारत और चीन (India and China) को अपने मतभेदों को नियंत्रित करने की कोशिश से परे जाकर द्विपक्षीय संबंधों में उतार-चढ़ाव के 'विचित्र चक्र' को तोड़ना चाहिए. लुओ ने बीजिंग (Beijing) में आयोजित 'चौथे भारत-चीन थिंक टैंक फोरम' में कहा, चीन और भारत का एक साथ उदय 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है. बता दें कि पीएम मोदी की मई 2015 में चीन यात्रा के दौरान इस फोरम की स्थापना की गई थी.

चीनी विदेश मंत्रालाय ने जारी किया बयान
चीनी विदेश मंत्रालाय की ओर से जारी बयान के अनुसार लुओ ने कहा कि दोनों देशों को मतभेदों को नियंत्रित करने के तरीकों से आगे बढ़कर द्विपक्षीय संबंधों में उतार-चढ़ाव के विचित्र चक्र को तोड़ना चाहिए, आपसी विश्वास मजबूत करना चाहिए, मतभेदों से उचित तरीके से निपटना चाहिए, साझे विकास के मार्ग तलाशने चाहिए और बड़े विकासशील देशों के शांतिपूर्वक रहने और मिलकर विकास करने के तरीके खोजने चाहिए. भारत और चीन के शीर्ष राजनयिक इस बैठक में इस बात पर सहमत हुए कि दोनों देशों को क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्तर पर सहयोग करना चाहिए और एशियाई सदी को साकार करने के लिए बहुआयामी संबंधों को अवश्य कायम रखना चाहिए

फोरम का आयोजन करते हैं ये

चौथे भारत-चीन थिंक टैंक फोरम का आयोजन इंडियन काउंसिल ऑफ वल्डर्स अफेयर्स (आईसीडब्ल्यूए) और चाइनीज एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज (सीएएसएस) ने संयुक्त रूप से किया. इस साल फोरम का विषय था- 'एशियाई सदी में भारत-चीन के संबंध'. बैठक में भाग लेने वाले अधिकारियों ने सर्वसम्मति से यह विचार जाहिर किया कि दोनों देशों को द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर करीबी सहयोग करना चाहिए.

पीएम मोदी की चीन यात्रा के दौरान हुई थी स्थापना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मई 2015 में चीन यात्रा के दौरान थिंक-टैंक फोरम की स्थापना की गई थी. यहां शनिवार को संपन्न हुए चौथे भारत-चीन थिंक टैंक फोरम में दोनों देशों के राजनयिकों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए कई मुद्दों पर चर्चा की.
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परस्पर समझ बढ़ाने में मदद की फोरम ने
भारतीय दूतावास ने यहां जारी एक बयान में कहा, 'एशियाई सदी में भारत-चीन संबंध' के तहत इस मंच ने भारत और चीन के बीच करीबी विकास साझेदारी बनाने सहित विभिन्न मुद्दों पर गहराई से चर्चा की. यह चर्चा दोस्ती और खुलेपन की भावना के साथ हुई तथा इसने दोनों देशों के बीच परस्पर समझ बढ़ाने में योगदान दिया. बैठक में भाग लेने वालों ने इसके बारे में सर्वसम्मत विचार प्रकट किया कि पड़ोसी एवं तेजी से विकास करने वाले देश होने के नाते यह जरूरी है कि भारत और चीन, दोनों देश द्विपक्षीय रूप से और क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्तर पर सहयोग करेंगे. भारत-चीन संबंध उभरती एशियाई सदी के लिए एक अहम संबंध है.

बैठक में हिस्सा लेने वाले 15 सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व आईसीडब्ल्यूए के महानिदेशक टीसीए राघवन ने किया. राघवन ने कहा कि उपमहाद्वीप की दो बड़ी शक्तियां, भारत और चीन को अवश्य ही बहुआयामी संबंध कायम रखना चाहिए. चीन में नियुक्त भारत के उप राजदूत ए. विमल ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि यह सदी बेशक भारत और चीन की है. उन्होंने कहा कि हमें शोध कार्यों के लिये युवा विद्वानों की एक दूसरे देशों के शोध केंद्रों में संक्षिप्त यात्रा या तीन या छह महीनों का इंटर्नशिप कराने पर विचार करना चाहिए.

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First published: December 1, 2019, 11:31 AM IST
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