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ताइवान की शांति एवं स्थिरता के लिए खतरा है चीन : साई

भाषा
Updated: October 10, 2019, 4:40 PM IST
ताइवान की शांति एवं स्थिरता के लिए खतरा है चीन : साई
‘नेशनल डे’ पर साई ने कहा कि चीन ताइवान को लगातार धमका रहा है

साई (Tsai) की यह टिप्पणी चीन द्वारा स्वशासित द्वीप के लोकतंत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की कोशिश के बीच आई है.

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ताइपे. ताइवान (Taiwan) की राष्ट्रपति साई इंग-वेन (Tsai Ing-wen) ने ‘नेशनल डे’ पर गुरुवार को कहा कि चीन ताइवान को लगातार धमका रहा है और वह क्षेत्र की शांति एवं स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. साई की यह टिप्पणी चीन द्वारा स्वशासित द्वीप के लोकतंत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की कोशिश के बीच आई है. चीन ताइवान को अपना क्षेत्र बताता है और उसे अलग करने के लिए उसके शेष बचे कूटनीतिक सहयोगियों को दूर करने की कोशिश कर रहा है. साथ ही साई की यह टिप्पणी हांग-कांग में पिछले कुछ महीनों से हो रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के मद्देनजर भी आई है.

साई ने राष्ट्रपति भवन में दिए अपने भाषण में कहा कि चीन अपने ‘एक देश, दो तंत्र’ (One country, Two systems) कार्यक्रम के इस्तेमाल के जरिए हमें लगातार धमका रहा है और सभी तरह के हमले करने के साथ ही क्षेत्र की शांति एवं स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. चीन ने प्रस्ताव दिया है कि ताइवान को एक समान व्यवस्था के तहत चीनी शासन में लाया जाए, लेकिन साई ने कहा कि द्वीप के प्रति बीजिंग की नीतियां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा थीं.

चीन ने 2016 में साई के राष्ट्रपति बनने के साथ ही उनकी सरकार से संपर्क तोड़ लिया था क्योंकि उन्होंने द्वीप पर चीन के दावे को खारिज कर दिया था. ताइवान के बड़े कारोबारी समुदाय को चीन की तरफ आकर्षित कर साई के समर्थन को कम करने के बीजिंग के प्रयासों के बावजूद वह अगले साल होने वाले चुनावों में जीत की सबसे प्रबल दावेदार हैं.

साई ने चीन के प्रति अपनी नीति की आलोचना के बीच जनवरी में फिर से चुनाव की मांग की है.

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First published: October 10, 2019, 4:40 PM IST
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