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कोरोना फैलने से पहले वुहान लैब में स्टाफ थीं ये वैज्ञानिक, किए चौंकाने वाले खुलासे

दिसंबर 2019 में कोरोना के मामले सामने आने के बाद से चीन की वुहान लैब (Wuhan Institute of Virology) विवादों में आ गई है.

बैट-बोर्न वायरस की एक्सपर्ट डेनिएल एंडरसन (Danielle Anderson) एकमात्र विदेशी वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (Wuhan Institute of Virology) की बीएसएल -4 लैब में रिसर्च किया है. उन्होंने वहां नवंबर 2019 तक काम किया. अब वह मेलबर्न के पीटर डोहर्टी इंस्टीट्यूट फॉर इंफेक्शन एंड इम्युनिटी में काम कर रही हैं.

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    बीजिंग. चीन पर दुनियाभर को कोरोना वायरस (Coronavirus) देने के आरोप लगे हैं. दिसंबर 2019 में कोरोना के मामले सामने आने के बाद से चीन की वुहान लैब (Wuhan Institute of Virology) विवादों में आ गई है. ऑस्ट्रेलियाई वायरोलॉजिस्ट डेनियल एंडरसन कोविड मामले सामने आने के कुछ हफ्ते पहले वुहान लैब में काम कर रही थीं. अब उन्होंने इस वायरस को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं.

    ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, बैट-बोर्न वायरस की एक्सपर्ट डेनिएल एंडरसन एकमात्र विदेशी वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की बीएसएल -4 लैब में रिसर्च किया है. उन्होंने वहां नवंबर 2019 तक काम किया. अब वह मेलबर्न के पीटर डोहर्टी इंस्टीट्यूट फॉर इंफेक्शन एंड इम्युनिटी में काम कर रहा हैं. उन्होंने बताया कि जिस शहर में कोरोना वायरस का उद्भव हुआ, वहां इस लैब में वैज्ञानिक सिर से पैर तक सेफ्टी गियर में रिसर्च करते थे.

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    ब्लूमबर्ग न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में एंडरसन ने पहली बार वुहान लैब में काम करने के बारे में डिटेल शेयर की हैं. उन्होंने कहा कि आधे सच और मैन्यूपुलेटिव इंफोर्मेशन ने लैब के काम के सटीक जानकारी को अस्पष्ट कर दिया है. एंडरसन ने कहा, "ऐसा नहीं है कि यह उबाऊ था, लेकिन यह एक नियमित प्रयोगशाला थी जो किसी अन्य उच्च-नियंत्रण प्रयोगशाला की तरह ही काम करती थी." एंडरसन की रिसर्च इस बात पर केंद्रित है कि इबोला और निपाह जैसे घातक वायरस चमगादड़ों में कोई बीमारी क्यों नहीं पैदा करते हैं.

    42 वर्षीय एंडरसन वायरोलॉजी समुदाय में एक उभरता सितारा हैं. उन्होंने बताया कि वुहान में इबोला पर रिसर्च करना उनके करियर की एक बड़ी उपलब्धि है. 2018 में अपनी पहली यात्रा में एंडरसन संस्थान की अधिकतम बायोकंटेनमेंट लैब से प्रभावित हुईं. कंक्रीट, बंकर-शैली की इमारत में हाईटेक बायोकंटेनमेंट लैब थी. इसमें हवा, पानी और कचरे को फ़िल्टर करने की बेहतर व्यवस्था थी. एंडरसन ने कहा कि लैब में स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए 45 घंटे की ट्रेनिंग लेनी पड़ी थी. पासिंग सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही उन्हें लैब में रिसर्च की परमिशन मिली थी.

    कोरोना वायरस की उत्पत्ति कहां से हुई इस पर लगातार खोजबीन जारी है. हाल ही में WHO की एक टीम ने इस सबंध में चीन का दौरा भी किया था. अब एक नए शोध में खुलासा हुआ है कि COVID-19 के प्रकोप से पहले चीनी शहर वुहान के बाजारों में हजारों जंगली जानवर बेचे गए थे. वुहान, जहां पहला कोरोना वायरस मामला सामने आया था, स्तनधारियों सहित जंगली जानवरों के कारोबार के लिए प्रसिद्ध है.

    हालांकि, एंडरसन इससे इत्तेफाक नहीं रखतीं. उन्होंने बताया कि उनके काम करने के दौरान लैब में कोई भी बीमार नहीं पड़ा. एंडरसन ने बताया, 'मेरी जानकारी में 2019 के अंत तक वुहान लैब में कोई बीमार नहीं हुआ. वायरस से संक्रमित होने के लक्षणों की रिपोर्ट करने की एक प्रक्रिया है. हाई रिस्क वाले लैब में समान रूप से इनका पालन किया जाता है.'

    डेनिएल एंडरसन कहती हैं, 'अगर लोग बीमार होते, तो मुझे लगता है कि मैं भी बीमार होती. मगर मैं बिल्कुल ठीक थी. मुझे वैक्सीनेशन से पहले सिंगापुर में कोरोना का टेस्ट करना पड़ा था. अगर मैं इंफेक्टेड होती तो रिपोर्ट में जरूर आता.'

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    इतना ही नहीं, वुहान में एंडरसन के कई सहयोगी दिसंबर के अंत में निपाह वायरस पर एक सेमिनार के लिए सिंगापुर आए थे. तब भी सबका टेस्ट किया गया था. सबकी रिपोर्ट नेगेटिव आई. लैब में किसी बीमारी के फैलने की कोई बात सामने नहीं आई.

    बता दें कि अभी तक प्रकाशित होने वाले जंगली जानवरों की बिक्री के विस्तृत रिकॉर्ड में ब्रिटिश और चीनी शोधकर्ताओं का अनुमान है कि बीमारी के उभरने से ढाई साल पहले शहर के बाजारों में 47,000 से अधिक जंगली जानवर बेचे गए थे. मई 2017 और नवंबर 2019 के बीच वुहान के चार बाजारों में जंगली जानवरों को बेचने वाली 17 दुकानों की मासिक साइट के दौरे में शोधकर्ताओं ने 38 प्रजातियों की बिक्री का पता लगाया. (इस आर्टिकल को अंग्रेजी में पूरा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)

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