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भारत से मदद के भरोसे के बाद चीन से ट्रेड डील तोड़ेगा मालदीव, कहा- यह बड़ी गलती थी

News18Hindi
Updated: November 20, 2018, 8:30 AM IST
भारत से मदद के भरोसे के बाद चीन से ट्रेड डील तोड़ेगा मालदीव, कहा- यह बड़ी गलती थी
मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह (फाइल फोटो)

मालदीव की नई सरकार ने चीन के साथ हुए फ्री ट्रेड समझौते (FTA) से बाहर निकलने का फैसला किया है. सरकार ने माना है कि एक छोटे देश का दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ समझौता करने का फैसला एक बड़ी गलती थी.

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मालदीव की नई सरकार ने चीन के साथ हुए फ्री ट्रेड समझौते (FTA) से बाहर निकलने का फैसला किया है. इतना ही नहीं वहां की सरकार ने माना है कि एक छोटे देश का दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ समझौता करने का फैसला एक बड़ी गलती थी.

सोलिह ने बीते शनिवार को राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने माले पहुंचे थे. इस दौरान नए राष्ट्रपति सोलिह ने बताया था कि कैसे चीन ने उनके देश को लूटा है और मालदीव कर्ज में डूब गया. सोलिह से मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने मालदीव को कर्ज से उबरने के लिए हर संभव मदद का भरोसा दिया था. माना जा रहा है कि भारत से मदद का भरोसा मिलने के बाद ही मालदीव ने चीन से ट्रेड डील खत्म करने का फैसला लिया.

मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख मोहमेद नशीद ने कहा, "चीन और मालदीव के बीच ट्रेड असंतुलन इतना बड़ा है कि कोई भी दोनों देशों के बीच एफटीए होने के बारे में सोच नहीं सकता है." उन्होंने आगे कहा, "चीन हमसे कुछ भी खरीद नहीं रहा है. यह एक एकतरफा समझौता है."


नवनियुक्त राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने पद संभालने के बाद शनिवार को कहा कि राष्ट्रीय कोष को लूट लिया गया है और देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है.

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पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन ने पिछले साल दिसंबर में बीजिंग के साथ एफटीए साइन किया था. पूर्व राष्ट्रपति और वर्तमान में सोलिह के सलाहकार नशीद ने कहा कि जीरो टैरिफ अग्रीमेंट को लागू करने के लिए जरूरी कानून को संसद में पास नहीं किया जाएगा.


नशीद ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, 'संसद ने ही इसकी सहमति दी थी लेकिन इसे लागू करने के लिए कुछ और कानूनों की जरूरत है. हम उन कानूनों को लागू नहीं करेंगे.' फिलहाल माले स्थित चीनी एसेंबली की तरफ से इस संबंध में कोई बयान नहीं आया है.हालांकि, चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया है कि संस्कृति और पर्यटन मंत्री लुओ शुगांग और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सोलिह से कहा है कि चीन ने दोनों देशों के संबंधों को बेहतर बनाने की पूरी कोशिश की है.

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चीन ने अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत मालदीव्स में हाईवे और हाउसिंग निर्माण में कई बिलियन डॉलर खर्च किये हैं.

कर्ज में डूबा मालदीव
मालदीव में क्रिटिक्स का कहना है कि चीन के नेतृत्व में आए इंफ्रास्ट्र्क्चर बूम के चलते मालदीव पूरी तरह कर्ज में डूब चुका है और फ्री ट्रेड डील के चलते स्थिति और बिगड़ सकती है. मालदीव के कस्टम डेटा के मुताबिक, इस साल जनवरी से अगस्त के बीच मालदीव ने चीन से 342 मिलियन डॉलर का इम्पोर्ट किया. जबकि इसका एक्सपोर्ट सिर्फ 265,270 डॉलकर का रहा. मालदीव ने भारत से 194 मिलियन डॉलर का इम्पोर्ट किया. इस दौरान इसने भारत को 1.8 मिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट किया.

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चीन को बड़ा झटका
यदि मालदीव इस समझौते से बाहर निकल जाता है तो यह चीन के लिए बड़ा झटका होगा. बता दें कि अपने प्रोजेक्ट्स के लिए चीन को मलेशिया से लेकर नेपाल तक कई छोटे देशों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. चीन का सहयोगी माना जाने वाला पाकिस्तान भी उसका विरोध कर रहा है.

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First published: November 19, 2018, 9:47 PM IST
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