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पाकिस्तान को FATF की ब्लैक लिस्ट में डालने की राह में रोड़ा अटका सकता है चीन

भाषा
Updated: October 31, 2019, 11:47 PM IST
पाकिस्तान को FATF की ब्लैक लिस्ट में डालने की राह में रोड़ा अटका सकता है चीन
चीन पाकिस्तान को एफएटीएफ की काली सूची में डालने का विरोध करेगा

पेरिस (Paris) में 16 अक्टूबर को एफएटीएफ (FATF) ने यह फैसला किया था कि अगले साल फरवरी तक पाकिस्तान (Pakistan) को ‘ग्रे लिस्ट’ में रखा जाए. इसके साथ ही पाकिस्तान को ये निर्देश दिया था कि वह आतंकवाद का वित्तपोषण और धनशोधन रोकने के लिए और उपाय करे. नहीं तो उसे काली सूची में डाल दिया जाएगा.

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बीजिंग. पाकिस्तान (Pakistan) के समर्थन में आते हुए चीन (China) ने गुरुवार को कहा कि एफएटीएफ का मकसद किसी देश पर प्रतिबंध लगाना या उसे दंडित करना नहीं है. चीन, पाकिस्तान की घरेलू आतंकवाद रोधी वित्तपोषण प्रणाली में सुधार में मदद करने के लिए वैश्विक धन शोधन रोधी निगरानी संस्था के सभी पक्षों के साथ मिलकर काम करेगा.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग की टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है जब चीनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि बीजिंग, पेरिस के ‘फाइनेंशियल एक्शन टास्क फॉर्स’ (Financial Action Task Force) द्वारा पाकिस्तान को काली सूची में डालने का विरोध करेगा.

'चीन की भारत के साथ विश्वास की कमी'
चीन ने अपने विदेश मंत्रालय के नीति योजना के उप महानिदेशक याओ वेन की पाकिस्तानी मीडिया को की गई टिप्पणी को भी कमतर करने की कोशिश की. उन्होंने पाकिस्तानी मीडिया से कहा था कि पाकिस्तान के साथ रिश्तों की तुलना में चीन की भारत के साथ विश्वास की कमी है.

प्रवक्ता से वेन की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया मांगी गई कि चीन एफएटीएफ द्वारा पाकिस्तान को काली सूची में डालने का विरोध करेगा. प्रवक्ता गेंग ने कहा कि धनशोधन रोधी निकाय का लक्ष्य किसी देश पर प्रतिबंध लगाना या उसे दंडित करना नहीं है.



ऐसे पाक को बचा रहा है चीन
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सरकारी एसोसिएटिड प्रेस ऑफ पाकिस्तान के मुताबिक, वेन ने कहा कि चीन नहीं चाहता है कि कोई एक देश एफएटीएफ का राजनीतिकरण करे. समाचार एजेंसी ने उनके हवाले से कहा कि कुछ देश हैं जो चाहते हैं कि पाकिस्तान को काली सूची में डाला जाए. हमारा मानना है कि यह उनका राजनीतिक उद्देश्य है. चीन इसके खिलाफ है. चीन इंसाफ के लिए खड़ा है.

चीन के एफएएफटी द्वारा पाकिस्तान को काली सूची में डालने का विरोध करने की वेन की टिप्पणी से इस तरह की चिंताएं उपजी हैं कि क्या चीन पाकिस्तान में रहने वाले आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-E-Mohammad) के सरगना मौलाना अज़हर मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने की राह में जैसा रोड़ा अटकता रहा था, वैसा ही इस मामले में भी करेगा?

पहले भी आतंकी को बचा चुका है चीन
चीन अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित करने की भारत, अमेरिका (America), फ्रांस (France) और ब्रिटेन (Britain) की कोशिशों को 10 साल तक बाधित करता रहा और इस साल मई में उसने मामले पर से अपनी तकनीकी रोक तब हटाई जब अमेरिका ने मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ले जाने की धमकी दी. इस समय एफएटीएफ के प्रमुख चीनी अधिकारी शिआंगमिन लियू हैं. वह चीन के केंद्रीय बैंक के विधि विभाग के पूर्व महानिदेशक थे.



गैंग ने पत्रकारों से कहा कि एफएटीएफ धन शोधन रोकथाम और आतंकवाद के वित्तपोषण की गतिविधियों से लड़ने के लिए एक अहम संस्था है.

उन्होंने कहा कि एफएटीएफ का उद्देश्य सभी देशों को धन शोधन और आतंकवादी वित्तपोषण की अवैध गतिविधियों या अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली के दुरुपयोग से लड़ने में बेहतर मदद करना है. एफएटीएफ का लक्ष्य किसी भी देश को प्रतिबंधित करना या उसे दंडित करना नहीं है.

अगले साल फरवरी तक हो सकती है कार्रवाई
पेरिस (Paris) में 16 अक्टूबर को एफएटीएफ ने सैद्धांतिक रूप से यह निर्णय किया था कि अगले साल फरवरी तक पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में रखा जाए और इस्लामाबाद को निर्देश दिया था कि वह आतंकवाद का वित्तपोषण और धनशोधन रोकने के लिए और उपाय करे. नहीं तो उसे काली सूची में डाल दिया जाएगा.

भारत के साथ विश्वास की कमी की वेन की टिप्पणी पर, खासकर चेन्नई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच दूसरी अनौपचारिक शिखर वार्ता के मद्देनजर, गेंग ने कहा, ‘‘ चीन और पाकिस्तान सभी मौसम के रणनीतिक साझेदार हैं और वे करीबी सहयोगी हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘ चेन्नई में राष्ट्रपति शी, और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात के संबंध में, मेरा मानना है कि दोनों पक्षों ने बयान जारी किए हैं और दोनों पक्षों ने वैश्विक, क्षेत्रीय रणनीतिक मुद्दों पर एक दोस्ताना माहौल में विचारों का आदान प्रदान किया है और करीबी साझेदारी विकसित करने पर सहमत हुए हैं.’’

प्रवक्ता ने कहा कि पिछले कुछ सालों में भारत और चीन के बीच सहयोग तेजी से बढ़ा है. हमारे पास लोगों के बीच संपर्क का तंत्र है. कई क्षेत्रों में हमें सार्थक नतीजे मिले हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ मेरा मानना है कि यह हमारी आपसी समझ और विश्वास में योगदान देता है और यह हमारी पारस्परिक समझ तथा विश्वास में योगदान देता है.’’

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First published: October 31, 2019, 11:47 PM IST
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