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चीन पर नेपाल की 150 हेक्टेयर जमीन हड़पने का आरोप, आर्मी चीफ नरवणे भी पहुंचे काठमांडू

चीन पर नेपाल की 150 हेक्टेयर जमीन हड़पने का आरोप, आर्मी चीफ नरवणे भी पहुंचे काठमांडू

भारत-नेपाल की नजदीकियों से बढ़ी चीन की बेचैनी (फाइल फोटो)

भारत-नेपाल की नजदीकियों से बढ़ी चीन की बेचैनी (फाइल फोटो)

India-Nepal Border Dispute: सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे बुधवार को तीन दिवसीय यात्रा पर नेपाल पहुंच गए हैं. भारतीय अधिकारियों के अनुसार उनकी यात्रा दोनों देशों की सेनाओं के बीच मित्रता के लंबे समय से जारी संबंधों को गहरा करेगी. इसी बीच चीन पर आरोप लगा है कि उसने नेपाल की 150 हेक्टेयर जमीन हड़प ली है.

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    काठमांडू. ब्रिटेन के एक प्रमुख अखबार ने दावा किया है कि चीन (China) ने नेपाल (Nepal) के क्षेत्र में 150 हेक्टेयर से अधिक जमीन हड़प ली है. हालांकि चीन के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि यह पूरी तरह बेबुनियाद अफवाह है. उधर भारतीय सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे (General MM Naravanes) को भी बुधवार को नेपाल की तीन दिवसीय यात्रा के तहत काठमांडू पहुंच गए. इस यात्रा के दौरान भारत-नेपाल सीमा विवाद पर भी बातचीत की संभावना जताई जा रही है.

    चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन की प्रतिक्रिया द टेलीग्राफ अखबार की खबर पर आई है जिसने नेपाल के राजनेताओं के हवाले से खबर प्रकाशित की थी कि चीन ने सीमा के पास पांच क्षेत्रों में 150 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर कब्जा कर लिया है. अखबार के मुताबिक चीन ने पूर्ववर्ती डूब क्षेत्र पर दावे के लिए एक नदी के बहाव की दिशा को भी बदल दिया. खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए वांग ने कहा कि मैं बताना चाहता हूं कि खबर पूरी तरह बेबुनियाद अफवाह है.

    जब वांग से इस बारे में साक्ष्यों के लिए कहा गया तो उन्होंने कहा, जब यह अफवाह है तो इस खबर को जारी करने वालों को पहले सबूत पेश करने चाहिए. द टेलीग्राफ अखबार के संवाददाता ने इस संदर्भ में कहा कि हमारे पास प्रमाण हैं. हमने नेपाल के राजनेताओं से बात की है और उन्होंने ऐसा कहा है. हम चाहते हैं कि चीनी पक्ष प्रतिक्रिया दे. द टेलीग्राफ के संवाददाता ने कहा, हमने नेपाल में चीनी दूतावास से प्रतिक्रिया के लिए संपर्क किया था लेकिन वहां से जवाब नहीं मिला.

    जनरल नरवणे द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी पर करेंगे बातचीत
    उधर सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे बुधवार को तीन दिवसीय यात्रा पर नेपाल पहुंच गए हैं. भारतीय अधिकारियों के अनुसार उनकी यात्रा दोनों देशों की सेनाओं के बीच मित्रता के लंबे समय से जारी संबंधों को गहरा करेगी तथा दोनों पक्षों को आपसी लाभ के लिए द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने के रास्ते तलाशने का अवसर देगी. नरवणे की यात्रा का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के बीच सीमा विवाद से उपजे तनाव की पृष्ठभूमि में संबंधों में पुन: सामंजस्य स्थापित करना है. जनरल नरवणे नेपाल के सेना प्रमुख जनरल पूर्ण चंद्र थापा के निमंत्रण पर नेपाल की यात्रा करेंगे.

    भारतीय दूतावास के प्रवक्ता नवीन कुमार ने कहा कि जनरल नरवणे की यात्रा दोनों देशों की सेनाओं के बीच मित्रता के लंबे समय से जारी और परंपरागत बंधन को और गहरा करेगी. नरवणे एक चल अस्पताल के लिए एक एम्बुलेंस और चिकित्सा उपकरण भेंट करेंगे, अस्पताल का संचालन नेपाली सेना करेगी. नेपाल की सेना के सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना प्रमुख बृहस्पतिवार सुबह सेना के पवेलियन में शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि देंगे. अधिकारियों ने कहा कि सेना प्रमुख का इस यात्रा के दौरान नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी और प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली से मुलाकात करने के अलावा कई अन्य असैन्य एवं सैन्य नेताओं के साथ बातचीत करने का कार्यक्रम है.

    नरवणे ने कहा- दोनों देशों के रिश्ते सामान्य
    जनरल नरवणे ने कहा, 'मैं नेपाल की यात्रा करने और अपने समकक्ष नेपाल के सेना प्रमुख जनरल पूर्ण चंद्र थापा से मुलाकात के लिए उनकी ओर से मिले निमंत्रण को लेकर उत्साहित हूं. मुझे विश्वास है कि यह यात्रा दोनों देशों की सेनाओं के बीच मित्रता के बंधन को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.' सेना प्रमुख ने कहा कि वह प्रधानमंत्री ओली से मुलाकात के अवसर के लिए भी आभारी हैं.



    भारत द्वारा सेना प्रमुख को नेपाल भेजने के फैसले को नयी दिल्ली द्वारा म्यामां, मालदीव, बांग्लादेश, श्रीलंका, भूटान और अफगानिस्तान के साथ संबंधों में नयी ऊर्जा भरने की व्यापक कवायद का हिस्सा माना जा रहा है. चीन द्वारा क्षेत्र में अपना प्रभुत्व बढ़ाने के प्रयासों के मद्देनजर ऐसा किया जा रहा है. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह द्वारा आठ मई को उत्तराखंड के धारचूला से लिपुलेख दर्रे को जोड़ने वाली 80 किलोमीटर लंबी रणनीतिक सड़क का उद्घाटन करने के बाद नेपाल ने विरोध जताया था, तब से दोनों देशों के संबंधों में तनाव आ गया था.undefined

    Tags: Bharat Nepal seema vivad, Boycott china, China, Indo-Nepal Border, Indo-Nepal Border Dispute, Nepal, Nepal and China Border

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