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कोरोनावायरस: हफ्तों पहले चीन सरकार को थी स्थिति की गंभीरता की जानकारी, जिनपिंग के भाषण से हुआ खुलासा

चीन ने कोरोनावायरस के संक्रमण पर काबू पाने का दावा किया (Photo-AP)

चीन ने कोरोनावायरस के संक्रमण पर काबू पाने का दावा किया (Photo-AP)

भाषण में शी जिनपिंग (Xi Jingping) ने कहा कि उन्होंने सात जनवरी को वायरस से मुकाबला करने और शहरों को बंद करने के निर्देश दिए थे जबकि इस आदेश का पालन 23 जनवरी को महामारी के केंद्र रहे शहरों को बंद करने के साथ हुआ.

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    बीजिंग. चीन (China) की सरकारी मीडिया ने हाल में राष्ट्रपति शी जिनपिंग (President Xi Jinping) का भाषण प्रकाशित किया है जिससे पहली बार संकेत मिला है कि नए कोरोना वायरस (Corona Virus) के संक्रमण से निपटने के शुरुआती अभियान का नेतृत्व वह स्वयं कर रहे थे.

    तीन फरवरी को दिए गए भाषण को प्रकाशित कर यह दिखाने की कोशिश की गई कि कम्युनिस्ट पार्टी (Communist Party) के नेतृत्व ने शुरुआत में ही निर्णायक कार्रवाई की, लेकिन इससे जिनपिंग की आलोचना भी शुरू हो गई कि आखिर लोगों को शुरू में ही क्यों आगाह नहीं किया गया.

    7 जनवरी को दिए थे निर्देश 23 जनवरी को हुई कार्यवाही
    भाषण में जिनपिंग ने कहा कि उन्होंने सात जनवरी को वायरस से मुकाबला करने और शहरों को बंद करने के निर्देश दिए थे जबकि इस आदेश का पालन 23 जनवरी को महामारी के केंद्र रहे शहरों को बंद करने के साथ हुआ. उनकी यह टिप्पणी शनिवार को सरकारी मीडिया में प्रकाशित की गई.

    कम्युनिस्ट पार्टी की शीर्ष निकाय स्थायी समिति को संबोधित करते हुए जिनपिंग ने कहा, ‘‘तेजी से फैल रही महामारी की पृष्ठभूमि और रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए 22 जनवरी को मैंने हुबेई प्रांत से लोगों के बाहर जाने पर विस्तृत और सख्त नियंत्रण लागू करने का अनुरोध किया.’’

    नए मामलों में आ रही है कमी
    चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने रविवार को बताया कि लगातार तीसरे दिन कोरोना वायरस के संक्रमण के नए मामलों में कमी आई है और मुख्यभूमि पर 2,009 नए मामले दर्ज किए गए. इसके साथ ही कुल मामलों की संख्या 68,500 हो गई है.

    महामारी के शुरुआती दौर में जिनपिंग की भूमिका को लेकर चीन सरकार ने चुप्पी साधी जो अपने सात साल के कार्यकाल में सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती का सामना कर रहे हैं.

    पहले से थी गंभीरता की जानकारी
    जिनपिंग के भाषण से संकेत मिलता है कि शीर्ष नेताओं को खतरे की जानकारी सार्वजनिक करने से हफ्तों पहले उन्हें स्थिति की गंभीरता की जानकारी थी. जनवरी के आखिर में ही अधिकारियों ने बताया कि विषाणु इंसान से इंसान को संक्रमित कर सकता है जिसके बाद सतर्कता बढ़ी.

    वर्ष 2002-2003 में सार्स विषाणु से फैली महामारी के बाद से ही ऐसे मामलों से निपटने को लेकर चीन सरकार की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में है क्योंकि तब भी महीनों तक मामले को दबाने की कोशिश की गई.

    वुहान में लगाई गई थी बाहर जाने पर रोक
    चीन का वुहान 23 जनवरी को पहला शहर बना जहां पर अप्रत्याशित तरीके से लोगों के बाहर जाने पर रोक लगाई गई, तब से अबतक अन्य शहरों के करीब छह करोड़ लोगों की आवाजाही पर रोक है.

    हुबेई और वुहान प्रशासन ने शुरुआत में महामारी को रोकने में कथित रूप से ढुलमुल रवैया अपनाया जिसकी वजह से उसे लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है. यह नाराजगी इस महीने की शुरुआत में उस समय और बढ़ गई जब विषाणु के बारे चेतावनी देने पर पुलिस उत्पीड़न के शिकार युवा डॉक्टर ली वेनलियांग की भी कोरोना वायरस के संक्रमण से मौत हो गई.

    इस नाराजगी के मद्देनजर पिछले हफ्ते हुबेई और वुहान में तैनात कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया या उन्हें बदल दिया गया. यहां तक कि प्रशासन ने मौजूदा महामारी के प्रति पारदर्शिता बरतने की शपथ ली. हालांकि, वुहान में प्रशासन के दावे की सच्चाई बयां करने वाले सिटिजन जर्नलिस्ट लापता हैं और माना जा रहा है कि उन्हें हिरासत में ले लिया गया है.

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