आर्थिक तौर पर युवा भारत का मुकाबला करने के लिए बच्चा नीति में चीन को देनी चाहिये ढील- रिपोर्ट

भारत और चीन.

भारत और चीन.

चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) द्वारा बुधवार को सार्वजनिक किए गए एक वर्किंग पेपर में कहा गया है कि चीन की बढ़ती जनसंख्या समस्या अन्य देशों की तुलना में खराब है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 16, 2021, 9:23 AM IST
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वॉशिंगटन. चीन (China) के एक सेंट्रल बैंक द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर चीन को आर्थिक तौर पर भारत का मुकाबला करना है तो उसे बच्चा नीति के सारे प्रतिबंध खत्म करने होंगे.  चीनी सेंट्रल बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन को ढ़ती उम्र की आबादी की समस्याओं से निपटने के लिए सभी जन्म प्रतिबंधों को खत्म कर देना ताहिए और आर्थिक तौर पर और जनसांख्यकी के आधार पर युवा भारत और इमिग्रेशन के अनुकूल अमेरिका के साथ आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धा करने के लिए आगे की योजना बनानी चाहिए.

चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) द्वारा बुधवार को सार्वजनिक किए गए एक वर्किंग पेपर में कहा गया है कि चीन की बढ़ती जनसंख्या समस्या अन्य देशों की तुलना में खराब है. पेपर मुख्य रूप से इस बात पर ध्यान केंद्रित है कि चीन को अपनी बढ़ती आबादी की समस्या से कैसे निपटा जाना चाहिए. इसमें चार PBOC शोधकर्ताओं ने भारत और अमेरिका से तुलना करते हुए  सुझाव दिया है कि सरकार प्रति घर तीन या अधिक बच्चों की अनुमति दे.



चीन की जन्म दर वर्षों से गिर रही है. सरकार ने 1970 के दशक के अंत से 2016 में एक-बच्चे की नीति को आसान बना दिया, जिससे दंपतियों को दो बच्चे पैदा करने की अनुमति मिली. हालांकि पॉलिसी में ढील देने का काम नहीं किया गया है. राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, चीनी में जन्म दर 2019 में प्रति 1,000 लोगों पर 10.48 गिर गई, जो सात दशकों में सबसे कम है.
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