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china stunned by indias diplomatic victory over jammu and kashmir said it will cause regional unrest

जम्मू-कश्मीर पर भारत की कूटनीतिक जीत से बौखलाया चीन, कहा- इससे क्षेत्रीय अशांति फैलेगी

जी-20 की बैठक जम्मू कश्मीर में कराने की खबरों पर चीन ने आपत्ति जताई

जी-20 की बैठक जम्मू कश्मीर में कराने की खबरों पर चीन ने आपत्ति जताई

इस बार फिर कुछ ऐसा हुआ है जिससे चीन और पाक दोनों बौखला गए हैं. अगले साल जी-20 देशों का आयोजन भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर में कराने की योजनाओं की खबरों से चीन को मिर्ची लगी है और चीन ने इसका विरोध किया है.

बीजिंग. वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते कद को देखकर हमेशा हिन्दुस्तान के खिलाफ साजिशें रचने  वाला चीन एक बार फिर भारत की सफल कूटनीति को देखकर बौखला गया है. 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद वहाँ  हो रहे विकास और शांति चीन,पाकिस्तान के गले नहीं उतर रही यही वजह है कि दोनों देश कश्मीर को लेकर लगातार भारत के खिलाफ साजिश रचते रहे हैं.

इस बार फिर कुछ ऐसा हुआ है जिससे चीन और पाक दोनों बौखला गए हैं,दरअसल अगले साल जी-20 देशों का आयोजन भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर में कराने की योजनाओं की खबरों से चीन को मिर्ची लगी है और चीन ने इसका विरोध किया है.

कश्मीर को लेकर चीन ने सँयुक्त राष्ट्र का राग अलापा
चीन ने अपने करीबी सहयोगी पाकिस्तान के स्वर में स्वर मिलाते हुए कहा कि-सम्बन्धित पक्षों के मुद्दे को राजनीतिक रंग देने से बचना चाहिए. गुरुवार (30 जून) को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लीजियान ने एक मीडिया ब्रीफिंग में मीडिया के एक पश्न का उत्तर देते हुए कहा “हमने ताजा घटनाक्रम का संज्ञान लिया है.”
झाओ ने कहा, “कश्मीर पर चीन का रुख सतत और बिल्कुल स्पष्ट है. यह भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से चला आ रहा मुद्दा है. संयुक्त राष्ट्र के चार्टर,सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय सहमतियों के अनुरूप इसका उचित समाधान निकलना चाहिए.”
उन्होंने कहा, “संबंधित पक्षों को एकपक्षीय कदम के साथ हालात को जटिल बनाने से बचना चाहिए. हमें बातचीत और संवाद से विवादों का समाधान करने का प्रयास करना चाहिए ताकि क्षेत्रीय शांति तथा स्थिरता बनी रहे.”

क्या चीन बैठक में शामिल होगा?
झाओ ने मिडिया से बात करते हुए कहा “जी-20 अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के लिए प्रमुख मंच है. हम सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का आव्हान करते हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के सतत रूप से उबरने पर ध्यान दें,इस प्रासंगिक मुद्दे को राजनीतिक रंग देने से बचें और वैश्विक आर्थिक शासन को सुधारने के लिए सकारात्मक योगदान दें.”

जब उनसे यह पूछा गया कि “जी-20 समूह का सदस्य होने के नाते क्या चीन बैठक में भाग लेगा,इस सवाल के जवाब में झाओ ने कहा “हम बैठक में शामिल होंगे या नहीं इस बारे में विचार करेंगे.”

पीओके पर चीन के अवैध निर्माण को बताया विकास
झाओ से जब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के विवादित क्षेत्र में चीन द्वारा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के अवैध निर्माण पर भारत की आपत्ति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा “दोनों मामले बिल्कुल अलग प्रकृति के हैं. चीन ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का विकास करने और वहां के लोगों की आजीविका सुधारने के लिए परियोजनाएं संचालित की हैं.”

झाओ ने कहा “कुछ परियोजनाएं कश्मीर के उस हिस्से में हैं जो पाकिस्तान के नियंत्रण में है. परियोजनाएं चलाने वाली सम्बंधित चीनी कम्पनियां स्थानीय लोगों की मदद के उद्देश्य से यह करती हैं ताकि उनकी अर्थव्यवस्था, विकास और आजीविका में सुधार हो.”

धारा 370 हटने के बाद जम्मू कश्मीर में प्रस्तावित यह पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय बैठक
जम्मू कश्मीर 2023 में जी-20 के बैठक की मेजबानी को लेकर पूरी तरह तैयार है. इस प्रभावशाली समूह में विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं. जम्मू कश्मीर प्रशासन ने बृहस्पतिवार को समग्र समन्वय के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई थी. अगस्त 2019 में जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लिए जाने के बाद यहाँ प्रस्तावित यह पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय बैठक होगी.

पाकिस्तान भी कर चुका है नापाक शिकायत
पूरे मसले पर पाकिस्तान 25 जून को ही अपना विरोध दर्ज करा चुका है. पाकिस्तान ने कहा था कि “वह कश्मीर में जी-20″ के देशों की बैठक के आयोजन के भारत के प्रयास को खारिज करता है और उम्मीद करता है की समूह के सदस्य देश कानून एवम न्याय के अनिवार्य तत्वों को पूरी तरह संज्ञान में लेते हुए इस प्रस्ताव का स्पष्ट विरोध करेंगे.”
पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता आसिम इफ्तिखार अहमद ने एक बयान में कहा “इस्लामाबाद ने भारतीय मीडिया में आ रही उन खबरों पर संज्ञान लिया है जिनमें संकेत है कि भारत जी-20 की कुछ बैठकें जम्मू-कश्मीर में करने पर विचार कर सकता है.”
उन्होंने कहा “पाकिस्तान भारत के ऐसे किसी प्रयास को पूरी तरह खारिज करता है.यह भलीभाँति ज्ञात तथ्य है कि जम्मू कश्मीर पाकिस्तान और भारत के बीच अंतरराष्ट्रीय तौर पर मान्य विवादित क्षेत्र है और सात दशक से अधिक समय से यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडे में रहा है.”

Tags: China, Jaamu kashmir

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