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चीन-ताइवान संकट: जानें साउथ चाइना सी में मेक इन इंडिया तकनीक कैसे ड्रैगन को देगी जवाब

वियतनाम का मानना है कि साउथ चाइना सी के बड़े इलाके पर उसका जो हक है वहां पर भारत की तकनीक से पैनी नजर रखी जा सकेगी.

वियतनाम का मानना है कि साउथ चाइना सी के बड़े इलाके पर उसका जो हक है वहां पर भारत की तकनीक से पैनी नजर रखी जा सकेगी.

China-Taiwan Crisis: सूत्रों के मुताबिक, वियतनाम सरकार समुद्री सीमाओं की निगरानी के लिए भारतीय तकनीक से बने सर्विलेंस सिस्टम को सबसे उपयुक्त मान रही है. यही नहीं वियतनाम के वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों का यह रुझान इसलिए भी खास मायने रखता है क्योंकि दोनों देशों के बीच इस साल भारत वियतनाम सैन्य अभ्यास का तीसरा संस्करण शुरू होगा. इसके जरिए दोनों देश एक दूसरे की सैन्य जरूरतों को समझेंगे और उसके मुताबिक सहयोग करेंगे.

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    हाइलाइट्स

    ताइवान चीन संकट के इस दौर में जब चीन ने गहन सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है
    भारतीय तकनीक से बने सर्विलांस सिस्टम में रडार सिस्टम, जैमर और माइक्रो ड्रोन प्रमुख हैं.

    चीन ताइवान संकट के दौर में उसका दूसरा पड़ोसी वियतनाम भी चौकन्ना हो गया है. साउथ चाइना-सी इलाके में निगरानी के लिए लिए भारतीय तकनीक के सर्विलांस सिस्टम का सहारा ले रहा है. वियतनाम सेना के शीर्ष सैन्य अधिकारी भारत सरकार से इस बाबत संपर्क साधा है और बनाई विस्तृत योजना की जानकारी पता की. वियतनाम का मानना है कि साउथ चाइना सी के बड़े इलाके पर उसका जो हक है वहां पर इससे पैनी नजर रखी जा सकेगी.

    ताइवान चीन संकट के इस दौर में जब चीन ने गहन सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है, तो उसका पड़ोसी देश से वियतनाम भी सतर्क हो गया है. साउथ चाइना सी में वियतनाम से सटे समुद्री इलाके में चीन हमेशा से ही अपना दावा पेश करता रहा है, जिसको यह दक्षिण पूर्वी एशियाई देश अपने अधिकारों का हनन मानता है. एक बार फिर चीन के इन खतरनाक मंसूबे उजागर होने के बाद वियतनाम के सैन्य अधिकारियों ने भारतीय तकनीकी और रुख किया है.

    वियतनाम सेना के शीर्ष जर्नल, वियतनाम दूतावास के अधिकारी भारतीय तकनीक से बने उपकरणों का निरीक्षण क‍िया है और 17 अगस्त को इस देश के अधिकारियों ने तफ्सील से मेड इन इंडिया तकनीक के बारे में जाना और इनकी खूबियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी ली. सूत्रों के मुताबिक, वियतनाम सरकार समुद्री सीमाओं की निगरानी के लिए भारतीय तकनीक से बने सर्विलेंस सिस्टम को सबसे उपयुक्त मान रही है. यही नहीं वियतनाम के वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों का यह रुझान इसलिए भी खास मायने रखता है क्योंकि दोनों देशों के बीच इस साल भारत वियतनाम सैन्य अभ्यास का तीसरा संस्करण शुरू होगा. इसके जरिए दोनों देश एक दूसरे की सैन्य जरूरतों को समझेंगे और उसके मुताबिक सहयोग करेंगे.

    मेक इन इंडिया तकनीक साउथ चाइना सी में कैसे चालों का होगी अचूक जवाब
    वियतनाम और चीन की सीमा 1200 किलोमीटर से भी ज्यादा है. पिछले दो दशकों में साउथ चाइना सी में अधिकार को लेकर चीन लगातार अपना दावा पेश करता रहा है. दोनों देशों के बीच कई बार वार्ता भी हुई है, लेकिन चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आई है. ताजा मामला इस साल मार्च के महीने का है जब चीन ने वियतनाम से सटे समुद्री इलाके में सैन्य अभ्यास किया, जिसका वियतनाम ने विरोध क‍िया. इसके बाद ताइवान और चीन के बीच विवाद का दौर शुरू हो गया जहां पर भी अपने सैन्य ताकत की नुमाइश की और अपने पड़ोसी देश पर दबाव बनाया. वियतनाम को भी आशंका है कि कहीं चीन दोबारा समुद्री इलाकों में अपनी हरकत न शुरू कर दे.

    भारतीय तकनीक से बने सर्विलांस सिस्टम में रडार सिस्टम, जैमर और माइक्रो ड्रोन प्रमुख हैं. वजह बिल्कुल साफ है दुर्गम समुद्री इलाकों में इनको 50 किलोमीटर दूर तक भी भेजा जा सकता है और कोई भी संदिग्ध हरकत समुद्र में अगर होती है तो तुरंत उसकी तस्वीर ली जा सकती है. मौजूदा परिस्थितियों में भारत के पास ही यह तकनीक है और इसीलिए वियतनाम का रुझान उन्नत सर्वेलांस सिस्टम पर पड़ा है.

    रक्षा विशेषज्ञ का कहना है क‍ि अब जरा साउथ चाइना सी में चीन की नापाक हरकतों पर नजर डालें तो यह पता चलेगा कि पिछले 5 सालों में अलग अलग तरीके की हरकतें चीन ने की हैं. इसमें सैन्य अभ्यास, पड़ोसी देशों के सैन्य नावों को नुकसान पहुंचाना और उनके नागरिकों को बंधक बना लेना शामिल है. इस इलाके में बार-बार उसके पड़ोसी देश से अपना विरोध दर्ज कराते हैं, लेकिन चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है. ताइवान और अब वियतनाम इसके अलावा फिलीपींस मलेशिया के साथ भी चीन का समुद्री सीमा का विवाद है. ऐसे बदलते वक्त में भारत की ओर से दक्षिण पूर्वी एशिया के इस देश को दिया गया यह तकनीकी सहयोग भारत सरकार की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को भी आगे बढ़ा रहा है और एक मजबूत गठबंधन खड़ा कर रहा है.

    Tags: China-Taiwan, Make in india

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