चांद से नहीं दिखती चीन की महान दीवार, क्या आप जानते हैं इससे जुड़ी ये 10 खास बातें?

चीन की महान दीवार 7वीं सदी ईसापूर्व से ही बननी शुरू हो गई थी और अगले 2000 सालों तक बनती रही (फोटो- AP)
चीन की महान दीवार 7वीं सदी ईसापूर्व से ही बननी शुरू हो गई थी और अगले 2000 सालों तक बनती रही (फोटो- AP)

चीन की महान दीवार (The Great Wall of China) को दुनिया में लगभग सभी जानते हैं लेकिन इससे जुड़े कई मिथक (Myths) भी प्रचलित हो चुके हैं. खैर इतनी बड़ी संरचना (Huge Structure) को लेकर मिथक बनना स्वाभाविक ही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 8, 2020, 7:17 AM IST
  • Share this:
फिलहाल भारत के साथ पूर्वी लद्दाख (Eastern Ladakh) के इलाके में एलएसी (LAC) पर भले ही तनाव है और चीन (China) पाक के बाद भारत का नंबर दो दुश्मन बना हुआ है लेकिन भारत और चीन में कई समानताएं भी हैं. दोनों ही न सिर्फ दुनिया की दो प्राचीनतम सभ्यताएं (Oldest Civilization) हैं बल्कि अगर भारत के पास दुनिया का एक अजूबा (Wonder) ताजमहल (Taj Mahal) है, तो चीन के पास भी दुनिया का एक और अजूबा चीन की महान दीवार (The Great Wall of China) है.

ऐसा हो ही नहीं सकता कि कोई इसे न जानता हो लेकिन इससे जुड़े कई मिथक (Myths) भी प्रचलित हो चुके हैं. खैर इतनी बड़ी संरचना (Huge Structure) को लेकर मिथक बनना स्वाभाविक ही है. बहरहाल हम यहां आपको चीन की इस ऐतिहासिक दीवार (Historical Wall) के बारे में ऐसी ही कुछ चौंकाने वाली बातें बता रहे हैं-
यह दीवार 7वीं सदी ईसापूर्व से ही बननी शुरू हो गई थी. हालांकि तब इसका शुरुआती भाग ही बना था. यह दीवार कुल 2000 सालों में बनकर पूरी हुई. इसे सबसे ज्यादा बनवाया क्विन राजवंश के क्विन शी हुआंग ने.
यह भी मजेदार है कि इस दीवार के समय के साथ कई सारे नाम रहे हैं. आज भले ही इसे चीन की महान दीवार या द ग्रेट वॉल ऑफ चाइना नाम से जाना जाता हो लेकिन इससे पहले इसे पर्पल फ्रंटियर और अर्थ ड्रैगन भी कहा जाता था. 19वीं शताब्दी के अंत से ही इसका नाम चीन की महान दीवार प्रचलित हुआ.
अपने एक चौड़े बिंदु पर यह दीवार 30 फीट चौड़ी है और इसकी दीवार की अधिकतम ऊंचाई 12 फीट है. वहीं इसका वॉच टावर (जो दीवार का सबसे ऊंचा बिंदु भी है) 26 फीट ऊंचा है.
कुछ अध्ययनों के मुताबिक इस दीवार का निर्माण पूरा करने में लगे लोगों की संख्या 8 लाख थी. यानि इसे कुल मिलाकर 8 लाख लोगों ने बनाया.
यह प्रचलित मिथक यह भी है कि यह दीवार एक मात्र इंसान निर्मित ढांचा है, जो आकाश से भी दिखता है लेकिन अगर आप धरती से मात्र 2 मील ऊपर से भी देखेंगे तो यह आपको किसी इंसान के टूटे बाल जैसी दिखेगी. ऐसे में इस दीवार का चांद से देखे जाने पर भी साफ नजर आना मिथक मात्र है.
इस दीवार के निर्माण का एकमात्र मकसद उत्तर के इलाके से होने वाले बाहरी आक्रमणों से सुरक्षा नहीं था बल्कि आयात की जाने वाली वस्तुओं पर कर चोरी को रोकना और तत्कालीन प्रवासन को नियंत्रित करना भी था.
साल 1987 में विलियम लिंडसे नाम के एक लंबी दूरी के ब्रिटिश धावक ने 1500 मील लंबी चीन की दीवार को पैदल ही नाप दिया था.
कहा यह भी जाता है कि चीन की महान दीवार के निर्माण के दौरान ही चीनी लोगों ने एक पहिये वाली माल ढोने वाली गाड़ी का आविष्कार किया था. इसे व्हीलबारो कहा जाता है. यह निर्माण के दौरान ही काफी प्रचलित भी हो गई थी.
दीवार पर अधिकार के लिए कई शताब्दियों के दौरान यहां पर हजारों लड़ाईयां लड़ी गईं. कई राजवंश और साम्राज्यों में लड़ाईयां हुईं. जो इस पर अधिकार करता, उसे दुश्मन को हराना आसान हो जाता. यहां आखिरी लड़ाई 1938 में जापानी युद्ध के दौरान लड़ी गई.
दुनिया की सबसे लंबी दीवार "दुनिया का सबसे लंबा कब्रिस्तान" भी है. दीवार के निर्माण के दौरान सैकड़ों हजारों लोग मारे गए और उनमें से कई को दीवार के नीचे दफन किया गया, जिससे यह दुनिया का सबसे लंबा कब्रिस्तान बन गया.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज