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चीन की नई 'मौसमी' रणनीति, आर्टिफिशियल बर्फबारी और बारिश की कर रहा तैयारी

तस्वीर चीन की है, जहां कर्मी बारिश कराने के कोशिश में क्लाउड सीडिंग के लिए रॉकेट दाग रहे हैं. (फोटो:CNN/File Photo)
तस्वीर चीन की है, जहां कर्मी बारिश कराने के कोशिश में क्लाउड सीडिंग के लिए रॉकेट दाग रहे हैं. (फोटो:CNN/File Photo)

दोनों देशों के बीच सीमा पर विवाद (India-China Conflict) जारी है. तमाम बैठकों के बाद भी कोई हल नहीं निकल सका है. भारत में कुछ जानकारों का कहना है कि भविष्य में होने वाले विवादों में वेदर मॉडिफिकेशन प्रोग्राम चीन के लिए मददगार साबित हो सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 5, 2020, 4:07 PM IST
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बीजिंग. बीते कुछ वर्षों में चीन (China) ने तकनीक के क्षेत्र में काफी तरक्की हासिल की है. इस बार चीन अपने वेदर मॉडिफिकेशन प्रोग्राम (Weather Modification Program) को काफी तेजी से बढ़ाने पर विचार कर रहा है. चीन 55 लाख स्क्वॉयर किमी को इलाके को कवर करने की योजना बना रहा है. खास बात है कि यह इलाका भारत के कुल आकार से 1.5 गुना तक बड़ा होगा. चीन आपदा से निपटने, खेती बढ़ाने, जंगलों की आग और सूखे का सामना करने के लिए कदम उठा रहा है. हालांकि, एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि इसका असर सीमापार भी पड़ सकता है.

चीन के स्टेट काउंसिल की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, चीन 2025 तक विकसित वेदर मॉडिफिकेशन सिस्टम तैयार कर लेगा. स्टेटमेंट में बताया गया है कि आने वाले 5 सालों में आर्टिफिशियल बारिश या बर्फभारी से कवर इलाका 55 लाख स्क्वॉयर किमी तक पहुंच जाएगा. जबकि, 5 लाख 80 हजार किमी दायरा ओलावृष्टि से बचने की तकनीक से कवर हो जाएगा.

इसके अलावा चीन कई जरूरी आयोजनों को लिए भी काफी समय से तैयारी कर रहा है. 2008 में हुए ओलंपिक्स से पहले चीन ने स्मॉग (Smog) कम करने और बारिश से बचने के लिए बादल बोए थे. खास बात है कि बादल बोने की यह तकनीक दशकों से चली आ रही है. हालांकि, इस काम में कई परेशानियां भी हैं, लेकिन तमाम अनिश्चितताओं के बाद भी चीन इसमें बड़ी रकम निवेश कर रहा है. चीनी न्यूज एजेंसी शिनहुआ के मुताबिक, बीते साल वेदर मॉडिफिकेशन प्रोग्राम ने चीन के शिनिजियांग के पश्चिमी इलाके में ओलावृष्टि से होने वाले नुकसान में 70 फीसदी की कमी की है.



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भारत-चीन विवाद पर पड़ सकता है असर
दोनों देशों के बीच सीमा पर विवाद जारी है. तमाम बैठकों के बाद भी कोई हल नहीं निकल सका है. भारत में कुछ जानकारों का कहना है कि भविष्य में होने वाले विवादों में वेदर मॉडिफिकेशन प्रोग्राम चीन के लिए मददगार साबित हो सकता है. कुछ एक्सपर्ट्स ने अनुमान लगाया है कि वेदर मॉडिफिकेशन प्रोग्राम में सफलता की सफलता की वजह से चीन कई नए महत्वाकांक्षी जियोइंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स का कारण बन सकता है. खासतौर से तब जब देश क्लाइमेट चेंज की परेशानी से जूझ रहा है.

इस तरह से पर्यावरण में रिफ्लेक्टिव कणों का बोया जाना तापमान को तो कम कर सकता है, लेकिन इसके कई अनदेखे परिणाम भी हो सकते हैं. कर्नाटक में मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन में क्लाइमेट एक्सपर्ट्स धनश्री जयराम के मुताबिक, 'रेग्युलेशन के बगैर, एक देश के प्रयास दूसरे देशों को भी प्रभावित कर सकते हैं.'
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