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    चीन, व्यापार, इमिग्रेशन और जलवायु परिवर्तन, अमेरिका के नए राष्ट्रपति बाइडन से क्या उम्मीद कर सकता है भारत?

    जो बाइडन (फाइल फोटो)
    जो बाइडन (फाइल फोटो)

    मार्च 2020 में जो बाइडन ने कहा था, 'दुनिया की 95 प्रतिशत से अधिक आबादी हमारी सीमाओं से बाहर है, हम उन बाजारों को अपनाना चाहते हैं. हमें अमेरिका में बहुत ही बेहतरीन निर्माण करने और दुनिया भर में सबसे अच्छा व्यापार करने की आवश्यकता है.'

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 12, 2020, 12:08 PM IST
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    वॉशिंगटन. अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव (US President Election) में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन (Joe Biden) ने मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को हराकर जीत दर्ज की है. जो बाइडन जनवरी 2021 में देश के 46वें राष्ट्रपति की शपथ लेंगे. अमेरिका एक सुपरपावर देश है उसके शासनाध्यक्ष के बदलने से अंतरराष्ट्रीय संबंधों और विदेश नीतियों पर भी बड़ा प्रभाव दिखाई देता है. बाइडन के सत्ता ग्रहण करने के बाद अमेरिका के साथ चीन (China) के रिश्ते भविष्य में आसान नजर नहीं आएंगे. जबकि चीन चाहता था कि अमेरिका में ट्रंप दोबारा सत्ता संभालें. अब चीन के परिपेक्ष्य में भारत (India) के अमेरिका के साथ व्यापारिक, आप्रवासन और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर क्या भविष्य होगा, आइए इस पर एक नजर डाल लेते हैं.

    रणनीतिक रूप से जो बाइडन के विचार
    16 अगस्त, 2020 को 'स्वतंत्रता दिवस' के मौके पर भारतीय समुदाय को वर्चुअली रूप से संबोधित करते हुए जो बाइडन ने कहा था, '15 साल पहले मैं भारत के साथ ऐतिहासिक असैन्य परमाणु समझौते को मंजूरी देने के प्रयासों का नेतृत्व कर रहा था, मैंने कहा था कि यदि संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत निकट सहयोगी बन गए तो दुनिया एक सुरक्षित जगह होगी, मैंने भारत के साथ खड़े होने और इसके क्षेत्र और सीमा की रक्षा करने को कहा था.' बाइडन की पहली बात का अर्थ है कि वह भारत के साथ अच्छे असैन्य परमाणु संबंध स्थापित करना चाहते हैं और दूसरी इस बात की व्याख्या करती है कि वह भारत के क्षेत्रों और सीमाओं को चीन से सुरक्षित रखने की बात कर रहे हैं.

    बाइडन का व्यापारिक दृष्टिकोण
    'वॉय अमेरिका मस्ट लीड अगेन' शीर्षक विदेशी मामलों की पत्रिका में मार्च 2020 में जो बाइडन ने कहा था 'दुनिया की 95 प्रतिशत से अधिक आबादी हमारी सीमाओं से बाहर है, हम उन बाजारों को अपनाना चाहते हैं, हमें संयुक्त राज्य अमेरिका में बहुत ही बेहतरीन निर्माण करने और दुनिया भर में सबसे अच्छा व्यापार करने की आवश्यकता है, व्यापार बाधाओं को तोड़ना और राष्ट्रपति के रूप में, मैं तब तक कोई नए व्यापार समझौता नहीं करूंगा जब तक कि हम अमेरिका में निवेश और वैश्विक अर्थव्यवस्था में खुद को सुसज्जित नहीं कर लेते हैं. बाइडन के बयानों का सीधा सा अर्थ है कि अमेरिका और चीन के व्यापारिक रिश्ते भविष्य में ठीक नहीं लग रहे हैं जो कि भारत के परिपेक्ष्य से सुगम है. बाइडन की विदेश नीति ट्रंप के विपरीत है साफ नजर आ रही है.



    अप्रवासन के नजरिए से
    जो बाइडन और कमला हैरिस की वेबसाइट पेज पर आप्रवासन पर लिखा है कि ट्रंप की नीतियां देश हित में नहीं हैं, पीढ़ियों के लिए, आप्रवासियों ने हमारे सबसे मूल्यवान प्रतिस्पर्धी लाभ और नवाचार और हमारी उद्यमशीलता की भावना को मजबूत किया है. राष्ट्रपति के रूप में वह अमेरिका के आव्रजन प्रणाली का आधुनिकीकरण करेंगे. इस नजरिए से देखा जाए तो अमेरिका में कम से कम 5 लाख भारतीयों का नागरिकता का रास्ता साफ हो जाएगा. इसमें ट्रंप प्रशासन द्वारा H1B वीजा के मानदंडों में बड़ा उलटफेर होगा, साथ ही रोजगार आधारित वीजा की सीमा को भी समाप्त करने की संभावना है. वहीं, जोड़ों के लिए H4 वीजा के मानदंडों में भी बदलाव होने के आसार हैं.

    मानवाधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों पर बल
    अमेरिका में मुस्लिम-अमेरिकन समुदाय पर भी बाइडन ने अपने विचार रखे थे. उन्होंने कहा था, 'भारत सरकार को कश्मीर के सभी लोगों के अधिकारों को बहाल करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने चाहिए, कश्मीर के हालात लोकतंत्र को कमजोर करते हैं. बाइडन भारत के असम में एनआरसी लागू करने से नाराज थे. उन्होंने भारत सरकार के इस कदम को धर्मनिरपेक्ष, बहु जातीय और बहु-धार्मिक लोकतंत्र के नजरिए से अनुचित माना था. बाइडन के विचार से यह अर्थ निकलता है कि बाइडन की पार्टी की विचारधारा मानवाधिकार की पक्षकार है और उनके नजरिए में कश्मीर से अनुच्छेद 370 का विलयन और असम में एनआरसी जनहित में नहीं हैं. वहीं, भविष्य में मोदी सरकार के साथ डेमोक्रेटिक दल की दाल गलना भी मुश्किल लग रहा है.

    जलवायु परिवर्तन का मुद्दा
    अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति की शपथ ग्रहण करने जा रहे जो बाइडन ने एक ट्वीट में जलवायु परिवर्तन जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर एक ट्वीट कर अपने विचार प्रकट किये थे. उन्होंने लिखा था, 'यह नहीं है कि आप दोस्तों के बारे में कैसे बात करते हैं और यह नहीं है कि आप जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों को कैसे हल करते हैं.' बाइडन के इस ट्वीट का अर्थ है कि वह जलवायु परिवर्तन के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय पटल पर हल करने के पक्षकारों में से एक हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को जलवायु परिवर्तन का हर्जाना सबसे ज्यादा भुगतना पड़ रहा है. उन्होंने अमेरिका के जंगलों में अक्सर लगने वाली आग और कैलिफोर्निया में आए भयंकर तूफान को लेकर दुख प्रकट किया. वह जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत जैसे विकासशील देशों के साथ सहयोग की पेशकश करने के पक्ष में हैं.
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