चीन ने छोटे-छोटे मुस्लिम बच्चों को किया परिवार से अलग, स्कूलों में किया कैद

चीन इन बच्चों को बचपने से ही उनकी जड़ों से अलग करने का व्यवस्थित कार्यक्रम चला रहा है.

News18Hindi
Updated: July 5, 2019, 11:25 PM IST
चीन ने छोटे-छोटे मुस्लिम बच्चों को किया परिवार से अलग, स्कूलों में किया कैद
चीनी मुसलमानों के बच्चों को उनके माता-पिता से दूर कर रहा है चीन (फाइल फोटो)
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Updated: July 5, 2019, 11:25 PM IST
एक नए रिसर्च के मुताबिक शिनजियांग प्रांत में चीन लगातार मुस्लिम बच्चों को उनके परिवारों, धार्मिक विश्वासों और भाषा से अलग कर रहा है. चीन ने एक साथ कई हजार बच्‍चों को बड़े से कैंपस में बंद कर रखा गया है और इस इलाके में तेजी से पुनर्शिक्षा स्कूल बनाए जाने का काम कर रहा है.

आमतौर पर उपलब्ध डॉक्यूमेंट्स और दूसरे देशों में शरण लिए हुए कई परिवारों के साथ किए गए इंटरव्यू के मुताबिक बीबीसी ने ऐसे कई डॉक्यूमेंट्स जुटाए हैं, जिनके अनुसार चीन के शिनजियांग प्रांत के बच्चों के साथ होने वाली ये ज्यादतियां सामने आई हैं.

चीन बचपन से ही बदलना चाहता है इन बच्चों के संस्कार
बीबीसी के लिए लिखी गई रिपोर्टर जॉन सडवर्थ की रिपोर्ट के मुताबिक जुटाई गई जानकारियों के अनुसार एक ही कस्बे में चार सौ से अधिक बच्चों ने किसी न किसी तरह हिरासत में लिए जाने के चलते अपने परिजनों को खो दिया है. ये बच्चे वर्तमान में या तो इन्हीं बोर्डिंग कहे जाने वाले पुनर्शिक्षा स्कूलों में हैं या फिर जेलों में.

दरअसल चीन इन बच्चों को बचपने से ही उनकी जड़ों से अलग करने का व्यवस्थित कार्यक्रम चला रहा है. इस पर रिपोर्ट करने वाले पत्रकार ने बताया कि चीन के इस इलाके में काम करने वाले विदेशी पत्रकारों पर नज़र रखी जाती है और उनका पीछा भी किया जाता है, ऐसे में स्थानीयों से बात करना मुश्किल है. ऐसे में इन्होंने तुर्की में रह रहे ऐसे बच्चों के परिजनों से बात की है.

तुर्की में जाकर बस चुके हैं ज्यादातर मुसलमान
54 अलग-अलग इंटरव्यू में परिजनों ने इस प्रांत से गायब हुए 90 बच्चों की कहानियां सुनाईं. ये सभी लोग शिनजियांग में बसे चीन के उइगर समुदाय से हैं. चीन के इस समुदाय के तुर्की से भी नजदीकी रिश्ते हैं. ऐसे में हजारों की संख्या में चीन के इस प्रांत से मुसलमान तुर्की में पढ़ने, व्यापार करने, परिजनों से मिलने या अपने चीन की ओर से इस समुदाय पर पड़ रहे धार्मिक दबाव से बचने के लिए तुर्की भाग आए हैं.
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पिछले तीन सालों में तुर्की आए मुसलमान वापस चीन नहीं लौट रहे हैं क्योंकि चीन ने वहां पर मुसलमानों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया है. इन लोगों को चीन ने विशाल जेलों में बंद कर रखा है, जिन्हें वह सुधारगृह कहता है. चीन कहता है कि हिंसक धार्मिक कट्टरता से बचने के लिए वह इन लोगों को प्रशिक्षण दे रहा है.

इन बच्चों को भी इनके परिजनों की तरह पुनर्शिक्षण स्कूल के नाम पर चीन ने बंधक बना रखा है (सांकेतिक फोटो)


छोटी-छोटी बातों के चलते गिरफ्तार कर लिए जाते हैं मुसलमान
हालांकि समय-समय पर सामने आए सबूतों के मुताबिक इनमें से लाखों मात्र अपनी धार्मिक पहचान के चलते गिरफ्तार किए गए हैं. इन्हें मात्र इसलिए गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि इन्होंने नमाज़ पढ़ी, बुर्का पहना या फिर तुर्की में किसी से संबंध रखा.

यहां मौजूद बच्चों के लिए चीन तेजी से स्कूलों को बड़ा कर रहा है. इसके अलावा वह नए हॉस्टलों का निर्माण भी कर रहा है. उसका प्रयास इन हॉस्टल्स की क्षमता को बढ़ाना है.

तेजी से बढ़ चुकी है किंडरगार्टन में बढ़ने वाले बच्चों की संख्या
मात्र साल 2017 में इस प्रांत में किंडरगार्टन स्कूलों में रजिस्टर स्टूडेंट्स की संख्या 5 लाख से ज्यादा बढ़ी है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इनमें 90% से ज्यादा उइगर और दूसरे मुस्लिम समुदायों के बच्चे हैं.

इससे यह हुआ है कि जिस शिनजियांग में कभी सबसे कम बच्चे स्कूल जाते थे, अब वहां स्कूल जाने वाले बच्चों का प्रतिशत चीन में सबसे ज्यादा हो चुका है. चीन ने सिर्फ दक्षिणी शिनजियांग इलाके में किंडरगार्टन स्कूल बनाने पर 1.2 अरब रुपये खर्च किए हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक ये बच्चे बोर्डिंग में हैं और चीन बहुत तेजी से नए बोर्डिंग हॉस्टल बना रहा है. इसके अलावा इन स्कूलों में चीनी भाषा के अलावा कोई और भाषा बोलना वर्जित है. अगर कोई बच्चा ऐसा करता है तो उसे सजा देने के नियम हैं.

इन बच्चों के परिवार वालों का कहना है कि इन बच्चों को चीन के शिनजियांग प्रांत के स्कूलों में बंद करके रखा गया है


स्कूलों की सुरक्षा पर खर्च होती है मोटी रकम
प्रशासन ने प्रांत के परिवारों के लिए निर्देश जारी किए थे. इसके एक पैरा में लिखा था, स्कूलों को मजबूत मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग करनी चाहिए. परिजनों का मानना है कि इसका मतलब कैंपों में जैसा सलूक उनके माता-पिता के साथ हो रहा है, वैसा ही उनके साथ भी किया जाएगा.

इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई स्कूलों में सर्विलांस सिस्टम लगे हैं. अलार्म लगे हैं और 10 हजार वोल्ट की बिजली इन तारों में दौड़ती है. कुछ स्कूलों में सुरक्षा पर होने वाला खर्च, स्कूल के दूसरे हर खर्च से ज्यादा है.

यह नीति 2017 में जारी हुई थी. उस समय हिरासत के मामले नाटकीय तरीके से बढ़े थे. जानकार मानते हैं, मेरा मानना है कि ये सांस्कृतिक नरसंहार का संकेत है.

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First published: July 5, 2019, 10:48 PM IST
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