Home /News /world /

भारत से 3 हजार किलोमीटर दूर समंदर में मंडरा रहा तीसरे विश्व युद्ध का खतरा!

भारत से 3 हजार किलोमीटर दूर समंदर में मंडरा रहा तीसरे विश्व युद्ध का खतरा!

भारत से सिर्फ तीन हजार किलोमीटर के फासले पर मौजूद समुद्र में भयानक जंग छिड़ने का डर दिख रहा है। ये वो दक्षिण चीन का समुद्र है जिस पर चीन अपना दावा करता है। इस समुद्र के अपने एक द्वीप पर चीन ने मिसाइलें तैनात कर दी हैं।

    नई दिल्ली। भारत से सिर्फ तीन हजार किलोमीटर के फासले पर मौजूद समुद्र में भयानक जंग छिड़ने का डर दिख रहा है। ये वो दक्षिण चीन का समुद्र है जिस पर चीन अपना दावा करता है। इस समुद्र में किसी भी देश की दखलंदाजी चीन को बर्दाश्त नहीं होती और इसीलिए अमेरिका को दफा करने के लिए उसने इस समुद्र के अपने एक द्वीप पर मिसाइलें तैनात कर दी हैं। ये मिसाइल 200 किलोमीटर दूर तक उड़ने वाले किसी भी विमान को मार गिराएंगे। ऐसा हुआ तो तीसरा विश्य युद्ध छिड़ सकता है। ऐसा हुआ तो दुनिया का एक हिस्सा मिट जाएगा।

    चीन ने आज एक बयान दिया है कि जिसमें उसने कहा है कि अमेरिका समुद्र में तीसरे विश्व युद्ध की चिंगारी भड़का रहा है। चीन का यह बयान बेहद तीखा है। उसे लग रहा है कि अमेरिका ने गिरोह बनाकर इस समुद्र पर कब्जे की उसकी हसरत को घेर लिया है। ड्रैगन का दावा है कि 35 लाख वर्ग किलोमीटर इलाके में फैला हुआ विशालकाय दक्षिण चीन समुद्र उसका है और साउथ चाइना सी पर कब्जे के लिए चीन के जहाज इस समुद्र पर शार्क की तरह चक्कर काटते हैं।

    दक्षिण चीन के समुद्र के मिसचीफ रीफ पर चीन ने 1994 में कब्जा जमा लिया था। उससे पहले ये अदना सा टापू फिलिपींस के पास था। ये कोई कॉमर्शियल टापू नहीं था। चीन ने इसे कब्जाया और पहले वहां मछुआरों के लिए एक शेल्टर बनाया और बाद में देखते ही देखते इस छोटे से टापू पर तीन मंजिला इमारत बना डाली। इतना ही नहीं यहां एक बास्केटबॉल कोर्ट भी बना दिया। बिजली पैदा करने के लिए यहां पर एक पवनचक्की भी है।

    दक्षिण चीन समुद्र छोटे-छोटे टापुओं से अटा पड़ा है। चीन इस समुद्र पर कब्जे के लिए नकली टापू बनाता जा रहा है। वहीं उसे रोकने के लिए हर महीने अमेरिका अपने एक नौसेनिक बेड़ा गश्त के लिए भेज देता है। लेकिन अमेरिका ने जैसे ही इस बार अपने मिसाइल डिस्ट्रॉयर जहाज USS CURTIS WILBUR को ट्राइटॉन आयलैंड के 12 नॉटिकल मील के फासले पर गश्त के लिए भेजा, चीन ने पूरी दुनिया को डरा दिया। सैटेलाइट की तस्वीरों ने बताया कि चीन ने इस समुद्र के वूडी आइलैंड में सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें तैनात कर दी हैं। बताया गया कि चीन ने दरअसल अपना HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम लगा दिया है इस टापू पर, ताकि उसके आसपास कोई भी जहाज उड़े तो उसे आसानी से निशाना बनाया जा सके।

    यह खतरा इसलिए बड़ा था क्योंकि चीन की मिसाइलों की रेंज थी 200 किलोमीटर। एयर डिफेंस सिस्टम HQ-9 चीन का सबसे आधुनिक मझौली और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस सिस्टम है। ये चीनी सिस्टम HT-233 नाम के राडार का इस्तेमाल करता है जो एक साथ 100 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है। ये चीनी सिस्टम एक साथ 6 निशानों पर 6 मिसाइल दाग सकता है।

    ताइवान ने चीन की मिसाइलों की तैनाती की पुष्टि की, पेंटागन ने भी कह दिया कि हां, चीन की मिसाइलें उस इलाके में लग चुकी हैं। ये वो वक्त था जब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा 10 एशियाई देशों के नेताओं के साथ गुफ्तगू कर रहे थे। इनमें से 4 देश वो थे जिन्हें चीन अपना दुश्मन समझता था। जाहिर है चीन भड़का हुआ था और अब उसने एक और बयान देकर तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। इस बयान में अमेरिका से उसकी चिढ़न साफ दिख रही है।

    चीन रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता वू जान का कहना है कि अमेरिका ही दक्षिण चीन समुद्र को फौज का अड्डा बनाने पर तुला हुआ है। वो चाहता है कि इस इलाके में हथियारों की होड़ हो जाए और इसी वजह से चीन को अपनी रखवाली और मजबूत करनी होगी। हम आजाद हैं अपनी जमीन पर अपनी रखवाली के लिए कोई भी साजोसामान तैनात करने के लिए।

    जाहिर है ड्रैगन आग उगल रहा है। चीन के रक्षा मंत्रालय के बयान में मिसाइलों की तैनाती का जिक्र नहीं था लेकिन ये जरूर कहा गया था कि वो अपनी जमीन पर जो भी तैनात करना चाहे, करने को आजाद है। संकेत साफ हैं, अगर अमेरिका और आसपास के कई और देशों ने उसे समुद्र में नकली टापू बनाने की छूट नहीं दी तो वो हमलावर रुख अपना सकता है। ऐसा हुआ तो वो भविष्यवाणियां सच हो सकती हैं, जिनमें कहा गया कि दक्षिण चीन समुद्र में छुपे तेल और गैस के अरबों डॉलर के भंडार के लालच के चलते तीसरा विश्य युद्ध छिड़ सकता है। कुछ वक्त पहले अमेरिका के लेखकर टॉम क्लैनसी ने SSA नाम का उपन्यास भी इसी भविष्यवाणी पर लिखा था। इसमें इसी समुद्र में तीसरा विश्व युद्ध छिड़ने की कहानी है। इतना ही नहीं, उसी के बाद पश्चिमी देशों में इसी भविष्यवाणी पर बनाया गया एक वीडियो गेम भी बेहद लोकप्रिय हो गया। इसमें पानी के भीतर घूमती अमेरिकी पनडुब्बी को चीनी जहाज को तबाह करने का मिशन पूरा करना होता है।

    भले ही दक्षिण चीनी समुद्र में जंग न छिड़ी हुई हो लेकिन अघोषित जंग एक अरसे से चल रही है। हालात इतने बुरे हैं कि चीन किसी भी कीमत पर इस पानी में फिलिपींस की नावों और जहाजों को बर्दाश्त नहीं कर पाता है। इसी समुद्र के बीच में एक रीफ पर खड़ा एक पुराना अमेरिकी जहाज सियरा मैडरे खुद में एक छोटा सा टापू बन गया है और इस पर कब्जा है फिलिपींस का। लेकिन चीन इस पर कब्जे की ताक में रहता है। 1999 के जंग खाये इस जहाज पर कुछ फिलिपींस मरीन कमांडो रहते हैं। हर महीने पानी और खाने की खेप उन तक पहुंचाना भी एक जंग लड़ने से कम नहीं है। क्योंकि चीन के कोस्ट गार्ड के जहाज किसी भी तरह किसी भी बोट को उस जहाज तक पहुंचने नहीं देते, वो रास्ते में आ जाते हैं।

    फिलिपींस सेना के सेकंड लेफ्टिनेंट एल पारमर का कहना है कि वे हमारी नावों के 20 मीटर के फासले तक आ जाते हैं। जहां-जहां हम जाते हैं, उसके आगे वो भी आते हैं, हमें अपने जहाज बेस तक पहुंचने नहीं देते। अगर हम आगे बढ़ेंगे तो उनके जहाज से टकरा जाएंगे और ऐसा हुआ तो हमें ही नुकसान होगा, हमारी ही जान खतरे में आ जाएगी। वो चाहते हैं ये जंग खाया पुराना जहाज यहां से हटा दें ताकि वो इस रीफ पर भी कब्जा कर लें, जबकि ये इलाका फिलिपींस का है।

    ये हाल सिर्फ फिलिपींस का नहीं है, बल्कि वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई का भी यही हाल है। 1988 में इसी समुद्र में खून बहा था जब चीन ने वियतनामी बोट पर हमला बोल दिया था। उस जंग में 60 वियतनामी मारे गए थे। लेकिन अब अगर चीन के साथ किसी भी देश का इस समुद्र में संघर्ष हुआ तो उसके तीसरे विश्व युद्ध में बदलते देर नहीं लगेगी। ऐसा हुआ तो तबाही मचेगी। दक्षिण चीन का ये समुद्र खून से लाल हो जाएगा।

    Tags: China, Philippines

    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर