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रूसी-चीनी वायु सेना ने की संयुक्त हवाई गश्त, शक्ति प्रदर्शन कर पश्चिमी देशों को दिया सख्त संदेश

Tu-160 में K-36DM इजेक्शन सीटों के साथ पायलट, को-पायलट, बॉम्बार्डियर और डिफेंसिव सिस्टम ऑपरेटर एक साथ बैठ सकते हैं. (Image: Sputnik News)

Tu-160 में K-36DM इजेक्शन सीटों के साथ पायलट, को-पायलट, बॉम्बार्डियर और डिफेंसिव सिस्टम ऑपरेटर एक साथ बैठ सकते हैं. (Image: Sputnik News)

China Russia Bombers: रूस ने सबसे पहले Tu-160 बॉम्बर का निर्माण 1970 में शुरू किया था. 1987 में परीक्षण के बाद रूस ने इ ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

चीन और रूस ने जापान सागर और पूर्वी चीन सागर के पानी पर एक संयुक्त हवाई गश्त में भाग लिया
आठ घंटे तक विमानों ने हवा से बातें कर अपनी शक्ति प्रदर्शन से पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा की
वायु टास्क फोर्स को रूस के अत्याधुनिक Su-30SM और Su-35S जेट्स ने सुरक्षा प्रदान की थी

बीजिंग. रूस और चीन के मजबूत होते रिश्तों का उदहारण अब बड़ी मिलिट्री एक्सरसाइज के रूप में भी देखने को मिल रहा है. रूस के रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि रूसी Tu-95MS रणनीतिक मिसाइल (Russian Tu-95MS) ले जाने वाले बमवर्षक और चीनी H-6K रणनीतिक बमवर्षक जेट विमानों (Chinese H-6K strategic bomber jets) ने जापान सागर और पूर्वी चीन सागर के पानी पर एक संयुक्त हवाई गश्ती में भाग लिया. आठ घंटे तक विमानों ने हवा से बातें कर अपनी शक्ति प्रदर्शन से पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा कर दी.

30 नवंबर को रूसी एयरोस्पेस फोर्सेस और चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की वायु सेना ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक नया संयुक्त हवाई गश्त किया जिसमें रूस का टीयू -95MS रणनीतिक मिसाइल ले जाने वाला बमवर्षक भी शामिल हुआ था. तास की एक रिपोर्ट के अनुसार रूसी एयरोस्पेस फोर्स और चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के हांग-6K रणनीतिक बमवर्षकों ने जापान सागर और पूर्वी चीन सागर के पानी पर हवाई गश्त की. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि रूसी मिसाइल ले जाने वाले बमवर्षकों की उड़ान लगभग आठ घंटे तक चली. चीन के साथ अपने परमाणु बमवर्षक की गड़गड़ाहट के साथ रूस ने पश्चिमी देशों को एक सख्त संदेश दिया है कि किसी भी विपरीत स्थिति में वह परमाणु हमले से नहीं चूकेगा.

पहली बार दोनों देशों के हवाई क्षेत्रों में क्रास लैंडिंग
दोनों देशों की वायु टास्क फोर्स को रूस के अत्याधुनिक Su-30SM और Su-35S जेट्स ने सुरक्षा प्रदान की थी. साथ ही ऐसा पहली बार हुआ कि रूसी और चीनी रणनीतिक बमवर्षकों ने अपने संयुक्त हवाई गश्त के दौरान पहली बार दोनों देशों के हवाई क्षेत्रों में क्रास लैंडिंग की (Russian and Chinese strategic bombers made cross landings). रूसी मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि हवाई गश्त के इतिहास में पहली बार, रूसी विमान पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के एक हवाई क्षेत्र में उतरे और चीनी विमान रूसी संघ के क्षेत्र के हवाई क्षेत्र में उतरे.

क्या होते हैं बॉम्बर
52 हजार फ़ीट की ऊंचाई से उड़कर बमबारी करने की क्षमता रखने वाले Tu बॉम्बर से अमेरिका भी खौफ खाता है. यह बॉम्बर अधिकतर दूसरे देशों में जाकर परमाणु बम गिराने के लिए काम में लिए जाते हैं. परमाणु बमों के अलावा पारंपरिक मिसाइल, रणनीतिक क्रूज मिसाइल और कम दूरी की निर्देशित मिसाइल भी इस बॉम्बर की मदद से दागी जा सकती है. बेहद तेज रफ्तार से उड़ने वाले इस बॉम्बर की खूबी है यह कि यह रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आता.

रूस ने सबसे पहले Tu-160 बॉम्बर का निर्माण 1970 में शुरू किया था. 1987 में परीक्षण के बाद रूस ने इसे अपनी वायु सेना के बेड़े में शामिल कर लिया. तब से अब तक रूस कई बार इस विमान को अपग्रेड कर चुका है. फ़िलहाल रूस के पास ऐसे 16 Tu-160 बॉम्बर मौजूद हैं और 10 नए Tu-160 बॉम्बर का निर्माण चल रहा है.

Tags: China, Military exercise, Nuclear weapon, Russia

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