लाइव टीवी

अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस ने नाकाम की चीन की चाल! UNSC में वापस लेना पड़ा कश्मीर पर प्रस्ताव- रिपोर्ट

News18Hindi
Updated: December 18, 2019, 8:45 AM IST
अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस ने नाकाम की चीन की चाल! UNSC में वापस लेना पड़ा कश्मीर पर प्रस्ताव- रिपोर्ट
जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल-370 हटाए जाने के बाद से हालात सामान्य होने लगे हैं.

चीन (China) ने अमेरिका (America) के दबाव के बाद इस प्रस्ताव को वापस लेने की हामी भरी है. बता दें कि भारत (India) सिक्योरिटी काउंसिल का सदस्य नहीं है, इसलिए वह चर्चा में शामिल नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 18, 2019, 8:45 AM IST
  • Share this:
संयुक्त राष्ट्र. जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में आर्टिकल 370 (Article 370) हटाए जाने के बाद से पाकिस्तान (Pakistan) और चीन (China) लगातार भारत पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाते रहे हैं. कश्मीर की स्थिति पर चीन ने संयुक्त राष्ट्र  सुरक्षा परिषद् (यूएनएससी) में बंद कमरे में चर्चा कराने का प्रस्ताव रखा था. हालांकि मीडिया के मुताबिक, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस के विरोध के बाद चीन ने अपने इस प्रस्ताव को वापस ले लिया है. बताया जाता है कि चीन ने अमेरिका के दबाव के बाद इस प्रस्ताव को वापस लेने की हामी भरी है. फ्रांस ने भी चीन को कड़े शब्दों में हिदायत दी है कि कश्मीर का मसला भारत और पाकिस्तान के बीच का है और इसमें किसी भी तीसरे देश को हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत इस पूरे मामले में अपनी नजर बनाए हुए है. बता दें कि भारत सिक्योरिटी काउंसिल का सदस्य नहीं है, इसलिए वह चर्चा में शामिल नहीं है. भारत को फ्रांस के एक अधिकारी ने बताया कि हम अपने स्टैंड पर कायम हैं और कश्मीर को लेकर हम क्या सोचते हैं यह सबको पता है. कश्मीर के मुद्दे को द्विपक्षीय रूप से देखना होगा.

यूएनएससी में इस मुद्दे पर ब्रिटेन ने भी अपना रुख साफ कर दिया है. उन्होंने कहा कि कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच का है, इसलिए इस मुद्दे पर चर्चा का कोई सवाल ही नहीं है. इसी तरह रूस का कहना है कि यूएनएससी के एजेंडे में दूसरे अहम वैश्विक मुद्दे पर चर्चा होगी. रूस ने कहा कि हमारे पास और भी कई तरह के अहम मुद्दे हैं, इसलिए हम कश्मीर के मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं करेंगे. 15 सदस्यों वाली यूएनएससी में शामिल इंडोनेशिया ने भी कश्मीर के मुद्दे पर चर्चा से ऐतराज किया है. इंडोनेशिया ने कहा कि लाइन ऑफ कंट्रोल पर सुरक्षा बलों को बढ़ाना किसी भी देश को आंतरिक मामला है इसपर किसी भी दूसरे देश को आपत्ति नहीं होनी चाहिए.

इसे भी पढ़ें :- कश्मीर मामले पर अमेरिकी सांसद ने कहा, भारत अपनी स्थापना के लोकतांत्रिक मूल्यों को बरकरार रखे



भारत दौरे से पहले चीन बनाना चाहता था दबाव
सीमा के मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत के लिए चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत आने वाले हैं. चीन की कोशिश थी कि वह भारत दौरे से पहले यूएनएससी में कश्मीर का मुद्दा उठाकर भारत में पर किसी भी तरह का दवाब बना सके. जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के भारत सरकार के निर्णय के बाद जारी किए गए मानचित्र को देखते हुए चीन चर्चा कराना चाहता था.

इसे भी पढ़ें :- UNHRC में आज कश्मीर का मुद्दा उठाएगा पाकिस्तान, भारत भी मुंहतोड़ जवाब देने को तैयार

यूएनएससी में पहले पाकिस्तान को मिली थी हार
जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल-370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान ने ये मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उठाया था, लेकिन वहां पर उसे मुंह की खानी पड़ी थी. चीन को छोड़कर अन्य किसी भी देश ने पाकिस्तान का कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ नहीं दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक, रूस और अमेरिका जैसे देशों ने इसे भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मामला बताया था. गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 को लेकर चीन और पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में गलत आंकड़े पेश किए और भारत की छवि खराब करने की कोशिश की लेकिन उसे अन्य देशों का सहयोग नहीं मिला.

इसे भी पढ़ें :- भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, भारत को UNSC का अस्‍थाई सदस्य बनाने का पाकिस्तान सहित 55 देशों ने किया समर्थन

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए दुनिया से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: December 18, 2019, 8:05 AM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर

भारत

  • एक्टिव केस

    5,095

     
  • कुल केस

    5,734

     
  • ठीक हुए

    472

     
  • मृत्यु

    166

     
स्रोत: स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार
अपडेटेड: April 09 (08:00 AM)
हॉस्पिटल & टेस्टिंग सेंटर

दुनिया

  • एक्टिव केस

    1,099,679

     
  • कुल केस

    1,518,773

    +813
  • ठीक हुए

    330,589

     
  • मृत्यु

    88,505

    +50
स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
हॉस्पिटल & टेस्टिंग सेंटर