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कोरोना के खिलाफ बेहद कारगर बताई गई चीनी वैक्सीन साबित हो रही फिसड्डी- रिपोर्ट

सांकेतिक फोटो.
सांकेतिक फोटो.

Vaccine Update: कोरोनावैक वैक्सीन अभी भी 50 फीसदी कारगर है. ऐसे में डब्ल्यूएचओ (WHO) ने इसे व्यापक इस्तेमाल के लिए काफी माना है. वहीं, वैज्ञानिकों का कहना है कि डेटा में पारदर्शिता नहीं होने से वैक्सीन पर लोगों का भरोसा प्रभावित हो रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 13, 2021, 12:36 PM IST
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बीजिंग. चीन (China) पर दुनियाभर को कोरोना वायरस (Corona Virus) नाम की मुश्किल में डालने के आरोप थे. ऐसे में चीन अपने वैक्सीन प्रयासों से दुनिया में अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रहा था. इसी बीच उसकी कोशिशों को झटका लगा है. ब्राजील में जारी सिनोवैक (Sinovac) के ट्रायल्स में वैक्सीन की प्रभावकारिता पहले से काफी कम आई है. हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बड़े स्तर पर उपयोग करने के लिए इसे पर्याप्त माना है.

ब्राजील के बुटानटान इंस्टीट्यूट सिनोवैक की वैक्सीन कोरोनावैक वैक्सीन के अंतिम ट्रायल करने वाली पहली संस्था थी. अंतिम चरण के ट्रायल के बाद संस्था ने बताया था कि यह वैक्सीन 78 फीसदी तक कारगर है और बीमारी के गंभीर मामलों में भी पूरी सुरक्षा प्रदान करती है. साओ पोलो स्थित संस्था ने यह जानकारी बीते हफ्ते दी थी. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में पूरे हुए ट्रायल्स में प्रभावकारिता का यह आंकड़ा गिरकर करीब 50 फीसदी आ गया है.

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गौरतलब है कि ब्राजील चीन के टीकाकरण के बड़े उम्मीदवारों में से एक है. यहां वैक्सीन की प्रभावकारिता दर का गिरना नई मुश्किलें पैदा कर सकता है. जबकि, कोरोनावैक वैक्सीन अभी भी 50 फीसदी कारगर है. ऐसे में डब्ल्यूएचओ ने इसे व्यापक इस्तेमाल के लिए काफी माना है. वहीं, वैज्ञानिकों का कहना है कि डेटा में पारदर्शिता नहीं होने से वैक्सीन पर लोगों का भरोसा प्रभावित हो रहा है. खास बात है कि पहले ही ब्राजील और दुनिया के कई हिस्सों में लोगों ने वैक्सीन लगवाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है.

बीते हफ्ते संस्था के जारी बयान के बाद ब्राजील में वैज्ञानिकों का दबाव बढ़ने लगा था. इनमें से कुछ वैज्ञानिकों ने ट्रायल्स के आयोजकों पर लोगों को गुमराह करने के आरोप लगाए थे. ऐसे में बुटानटान ने मंगलवार को कहा कि इन जारी दरों में केवल वही मरीज शामिल हैं, जो कोविड-19 के हल्के से लेकर गंभीर मामलों से जूझ रहे थे. वहीं, जब सभी वॉलिंटियर्स का डेटा इसमें शामिल किया गया तो, कुल प्रभावकारिता दर गिरकर 50.4 प्रतिशत पर आ गई थी.
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