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चीन की इस लेखिका को लॉकडाउन के अनुभव साझा करना पड़ा भारी, बन गईं देशद्रोही!

फांग फांग का असली नाम वांग फांग है. वो 65 साल की हैं. अपने लॉकडाउन के अनुभवों को वो वीबो अकाउंट पर लिखती थी. वीबो को चीन का ट्विटर भी माना जाता है.
फांग फांग का असली नाम वांग फांग है. वो 65 साल की हैं. अपने लॉकडाउन के अनुभवों को वो वीबो अकाउंट पर लिखती थी. वीबो को चीन का ट्विटर भी माना जाता है.

फांग फांग (Fang Fang) लॉकडाउन के दौरान अपने प्रत्येक दिन का हाल ऑनलाइन डायरी के तौर पर सोशल मीडिया पर शेयर करती थीं. वहां के लोगों को उनके लेखों से हिम्मत मिलती था मगर कुछ समय बाद उन्हें देशद्रोही कहा जाने लगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 28, 2020, 12:06 PM IST
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दुनिया में कोरोना वायरस (Coronavirus) का कहर जारी है. भारत में भी कोरोना संक्रमित लोगों के आंकड़ों में वृद्धि हो रही है. सबसे पहले चीन (China) को कोरोना की मार झेलनी पड़ी थी. कई जानकारों का मानना है कि चीन के वुहान (Wuhan) शहर से ही कोरोना का संक्रमण दुनिया में फैला था. जनवरी के महीने से ही वुहान में लॉकडाउन (Lockdown) लगा था और बड़ी संख्या में लोग कोरोना संक्रमित हो रहे थे. उस वक्त वुहान की एक लेखिका फांग फांग (Fang Fang) ने लॉकडाउन में अपने अनुभवों को लोगों के साथ शेयर किया था.

फांग फांग लॉकडाउन के दौरान अपने प्रत्येक दिन का हाल ऑनलाइन डायरी के तौर पर सोशल मीडिया पर शेयर करती थीं. वहां के लोगों को उनके लेखों से हिम्मत मिलती था मगर कुछ समय बाद उन्हें देशद्रोही कहा जाने लगा. असल में फांग फांग अपनी ऑनलाइन डायरी में सरकार की आलोचना करती थीं. लॉकडाउन के वक्त अपने अकेले बिताए समय के बारे में लिखती थीं और अपने लेखन से प्रशासन की कमियों को भी सामने लाती थीं.

शुरुआत में डायरी की हुई तारीफ



फांग फांग का असली नाम वांग फांग है. वो 65 साल की हैं. अपने लॉकडाउन के अनुभवों को वो वीबो अकाउंट पर लिखती थी. वीबो को चीन का ट्विटर भी माना जाता है.
बीबीसी से बात करते हुए फांग फांग ने बताया कि वो ये डायरी अपने दिमाग को सक्रिय रखने के लिए लिखती थीं और साथ ही वो लोगों को बताना चाहती थीं कि लॉकडाउन के दौरान वो अपने आसपास क्या महसूस कर रही हैं. फांग फांग ने एक लेखक और जागरूक नागरिक के तौर पर अपनी डायरी के माध्यम से लोगों को ये बताया कि अकेले रहने में कैसा एहसास होता है, इतने लोगों को मरते हुए देखने का दर्द कैसा होता है और कोरोना संक्रमण जैसे संकट के दौरान प्रशासन ठीक से ना काम करे तो कैसा अनुभव होता है. शुरुआत में तो उनकी तारीफ हुई. चीन की मीडिया ने भी उनके लेखन को प्रेरणादायक बताया मगर उनके लिए मुश्किलें तब बढ़ गईं जब उनकी लेखनी को अंतरराष्ट्रीय पटल पर भी जगह मिलने लगी. विदेशी मीडिया भी उनको कवर करने लगा और अंग्रेजी भाषा में उनके लेखों का अनुवाद होना शुरु हो गया. फिर चीन में उनका विरोध भी शुरु हो गया. लोग उनको देश विरोधी कहने लगे.

लगा देशद्रोह का ठप्पा, मिलने लगी धमकियां

फांग फांग ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान लिखी गई उनकी डायरी को छापने से प्रकाशकों ने मना कर दिया. प्रशासन ने उन्हें दुश्मन की तरह देखना शुरु कर दिया और उनकी नई और पुरानी किताबों को छापना बंद कर दिया गया. फांग फांग ने कहा- "ये एक लेखक के साथ बहुत ही बुरा व्यवहार है. हो सकता है कि ये इसलिए किया गया हो क्योंकि मैंने सरकार की तारीफ ना कर के आम लोगों के लिए सहानुभूति को दर्शाया". फांग फांग ने बताया कि उन्हें गाली भरे कई मैसेज आए और लोगों ने उन्हें धमकियां भी दीं. वो इन धमकियों और विरोध को देखकर काफी चिंतित थीं.

इतने विरोध के बावजूद फांग फांग ने कहा कि वो अपनी बात कहती रहेंगी और किसी तरह का कोई समझौता नहीं करेंगी.
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