वेटिकन से समझौते के तहत चीन में पहले बिशप की नियुक्ति की गई

वेटिकन से समझौते के तहत चीन में पहले बिशप की नियुक्ति की गई
चीन में बिशप की नियुक्ति की गई

चीन में करीब 1.20 करोड़ कैथोलिक (Catholic) ईसाई हैं जो दशकों से सरकार संचालित एसोसिएशन और वेटिकन समर्थक गैर मान्यता प्राप्त भूमिगत चर्च के बीच बंटे हुए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 28, 2019, 4:27 PM IST
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चीन (China) और वेटिकन (Vatican City) के बीच मेलमिलाप को बढ़ावा देने के लिए हुए करार के बाद पहली बार पोप और बीजिंग (Beijing) की संयुक्त मंजूरी के बाद चीन में बिशप की नियुक्ति की गई है. चीन में करीब 1.20 करोड़ कैथोलिक (Catholic) ईसाई हैं जो दशकों से सरकार संचालित एसोसिएशन और वेटिकन समर्थक गैर मान्यता प्राप्त भूमिगत चर्च के बीच बंटे हुए हैं. एसोसिएशन का पादरी कम्युनिस्ट पार्टी चुनती है. लेकिन पिछले साल सितंबर में हुए समझौते के तहत कैथोलिक बिशप की नियुक्ति चीन और वेटिकन की सहमति से हुई है.

चीन के आधिकारिक चर्च ‘चाइनीज कैथोलिक पैट्रियोटिक एसोसिएशन’ ने बताया कि सोमवार को याओ शुन को आंतरिक मंगोलिया स्वायत्त क्षेत्र के उलानकाब का बिशप नियुक्त किया गया. चीन के कानून के मुताबिक फादर और बिशप को अपना पंजीकरण करना होता है और देश के आधिकारिक चर्च के साथ काम करना पड़ता है.

वेटिकन के धर्मपीठ (होली सी) प्रेस ऑफिस के मेतियो ब्रूनी की ओर से जारी बयान के मुताबिक एंतोनियो याओ शुन की नियुक्ति को पोप से भी मंजूरी मिली है. यह वैटिकन और चीन के बीच हुए अस्थायी करार के अंतर्गत पहली नियुक्ति है. इस मुद्दे को लेकर दोनों देशों के संबंध 1951 में खराब हुए थे.



चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में बुधवार को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक चीन बिशप की कमी का सामना कर रहा है. 98 धर्मक्षेत्र में करीब एक तिहाई में कोई बिशप नहीं है और जिनमें हैं वे भी वृद्ध हो गए हैं और सेवानिवृत्त होने वाले हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक एक और अन्य बिशप की नियुक्ति बुधवार को होनी है. अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई. पोप फ्रांसिस ने चीन की ओर से नियुक्त सात पादरियों को मान्यता इस भय के बावजूद दी है कि चीन इसका इस्तेमाल आधिकारिक चर्च से असंबद्ध श्रद्धालुओं की पहचान कर कार्रवाई में कर सकता है.

चीन में कैथोलिक ईसाईयों की संख्या में वृद्धि के साथ वैटिकन ने बीजिंग से संबंध बहाल करने की पहल तेज कर दी है, लेकिन दोनों में तनाव बरकरार है. वैटिकन एकमात्र यूरोपीय देश है जिसके ताइवान से राजनयिक सबंध हैं जबकि चीन मानता है कि ताइवानउसका अलग हुए प्रांत है और उसके साथ एकीकरण होना है.

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