रूस के बाद अब चीनी हैकर्स चुरा रहे हैं Covid-19 वैक्सीन रिसर्च का डेटा

रूस के बाद अब चीनी हैकर्स चुरा रहे हैं Covid-19 वैक्सीन रिसर्च का डेटा
चीनी हैकर्स चुरा रहे हैं कोरोना वैक्सीन रिसर्च का डेटा

अब चीन (China) पर कोरोना वैक्सीन (Coronavirus Vaccine) से संबंधित रिसर्च डेटा हैकिंग (Hacking) की मदद से चुराने के आरोप लगे हैं. अमेरिकी न्याय विभाग ने दो चीनी हैकरों पर दुनियाभर की कंपनियों के व्यापार से जुड़ी करोड़ों डॉलर मूल्य की गुप्त जानकारियों को चुराने और हाल ही में कोरोना वायरस के लिए वैक्सीन विकसित करने वाली फर्मों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है.

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वाशिंगटन. रूस (Russia) के बाद अब चीन (China) पर कोरोना वैक्सीन (Coronavirus Vaccine) से संबंधित रिसर्च डेटा हैकिंग (Hacking) की मदद से चुराने के आरोप लगे हैं. अमेरिकी न्याय विभाग ने दो चीनी हैकरों पर दुनियाभर की कंपनियों के व्यापार से जुड़ी करोड़ों डॉलर मूल्य की गुप्त जानकारियों को चुराने और हाल ही में कोरोना वायरस के लिए वैक्सीन विकसित करने वाली फर्मों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है. आरोप है कि ये दोनों हैकर्स मिलकर अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और अन्य कई यूरोपीय देशों में जारी कोरोना वैक्सीन रिसर्च का डेटा हैक करने की कोशिश कर रहे थे.

समाचार एजेंसी AFP के मुताबिक इन हैकर्स ने वैक्सीन और उपचार विकसित करने के अपने काम के लिए मशहूर कम्प्यूटर कंपनियों के नेटवर्क की कमियों को निशाना बनाया. ये पता लगा रहे थे कि लैब में किस आईटी कंपनी से सुविधाएं ली गयीं हैं और उस आधार पर हैकिंग को अंजाम दे रहे थे. इन हैकर्स के खिलाफ व्यापार से जुड़ी गुप्त जानकारी चोरी करने और धोखाधड़ी के आरोप शामिल हैं. हैकर्स में एक 34 वर्षीय ली शिआउ और 33 वर्षीय दोंग जियाझी शामिल हैं. ऐसा शक जताया जा रहा है कि दोनों हैकर्स चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के इशारे पर ही ये काम कर रहे थे. कोर्ट में में हुई सुनवाई के मुताबिक इन हैकर्स के निशाने पर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, जर्मनी, जापान, नीदरलैंड, स्पेन, साउथ कोरिया, स्वीडन और ब्रिटेन जैसे देश थे. इन्होने सिर्फ रिसर्च इंस्टीट्यूट और लैब को ही निशाना बनाया हुआ था.






अमेरिका चीन को लेकर सख्त
अमेरिका ने एक बार फिर चीन के खिलाफ बयान दिया है. विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा- ऐसे वक्त में जबकि दुनिया के देश महामारी से जूझ रहे हैं, चीन ने इसका नाजायज फायदा उठाया. उसने मुश्किल वक्त में अपने पड़ोसियों को धमकाया. पोम्पियो ने लद्दाख में भारत और चीन की सैन्य झड़प का जिक्र तो नहीं किया, लेकिन उनका इशारा इसी तरफ था. पोम्पियो चीन के खिलाफ सहयोगी देशों को फिर से एकजुट करने की कोशिशों के तहत कई देशो की यात्रा पर निकले हैं. साउथ चाइना सी में अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. अमेरिका ने जापान और ऑस्ट्रेलिया के अलावा फिलीपींस और ताइवान की भी मदद की है. पोम्पियो ने कहा- हम चाहते हैं कि इस क्षेत्र में चीन ताकत का गलत इस्तेमाल करने से बाज आए. इसके लिए हम अपने सभी सहयोगियों से बातचीत कर रहे हैं. चीन को किसी गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए.

चीन को अदालत में घसीटने की इजाजत देने वाला विधेयक पेश
उधर अमेरिका के कई प्रभावशाली रिपब्लिकन सांसदों ने कोरोना वायरस वैश्विक महामारी फैलाने में चीन की भूमिका के लिए उस पर संघीय अदालत में मुकदमा चलाने की अनुमति देने वाला एक विधेयक सोमवार को सीनेट में पेश किया. ‘कोविड पीड़ितों के लिए नागरिक न्याय कानून’ संघीय अदालतों को उन दावों को सुनने का अधिकार देता है कि कोविड-19 के लिए चीन जिम्मेदार है या उसने इसे फैलाने में काफी योगदान दिया है. सांसदों - मार्था मैकसेली, मार्शा ब्लैकबर्न, टॉम कॉटन, जोश हावले, माइक राउंड्स और थोम टिलिस द्वारा पेश किया गया यह विधेयक चीन की उन लापरवाह कार्रवाइयों के लिए उससे उसकी संप्रभु प्रतिरक्षा को छीनता है जिससे वैश्विक महामारी फैली. साथ ही यह संघीय अदालतों को चीनी संपत्तियों को जब्त करने का भी अधिकार देता है.

इस विधेयक का स्वरूप काफी हद तक 2016 के आतंकवाद के प्रायोजकों के खिलाफ न्याय कानून (जास्टा) जैसा है जो आतंकवाद खासकर 9/11 के पीड़ितों को अधिक कानूनी उपचार उपलब्ध कराता है. मैकसेली ने कहा, 'चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के झूठ एवं धोखे का शिकार हुए अमेरिकियों या अपने प्रियजनों को गंवाने वाले, कारोबारी नुकसान झेलने वाले या कोविड-19 के चलते निजी तौर पर नुकसान झेलने वाले, चीन को जिम्मेदार ठहराने और उससे उचित मुआवजा मांगने के हकदार हैं.' उन्होंने कहा कि कोविड-19 से मरने वालों की संख्या और वित्तीय नुकसान बढ़ता ही जा रहा है, इसलिए इन नुकसानों की भरपाई अमेरिकी लोगों को करने के लिए चीन पर दबाव बनाया जाना चाहिए.
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