एस जयशंकर को विदेश मंत्री बनाने पर चीन ने तोड़ी चुप्पी, डोकलाम समेत तीन बार ड्रैगन को दिखा चुके हैं ताकत

बतौर विदेश सचिव जयशंकर 2017 के डोकलाम विवाद सुलझाने में भी कामयाब रहे थे. यह विवाद 73 दिनों तक चला जब चीन को विवादित इलाके में सड़क बनाने से भारत ने रोका था.

News18Hindi
Updated: June 3, 2019, 8:51 AM IST
एस जयशंकर को विदेश मंत्री बनाने पर चीन ने तोड़ी चुप्पी, डोकलाम समेत तीन बार ड्रैगन को दिखा चुके हैं ताकत
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर दायें व चीनी विदेश मंत्री वांग यी बायें.
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Updated: June 3, 2019, 8:51 AM IST
चीन के विदेश मंत्री एवं स्टेट काउंसलर वांग यी ने भारत का विदेश मंत्री नियुक्त होने पर एस. जयशंकर को बधाई दी और द्विपक्षीय संबंधों के विकास में सकारात्मक योगदान देने को लेकर उनकी सराहना की. साथ ही, उन्होंने चीन - भारत संबंधों में नयी प्रगति हासिल करने के लिए उनके साथ काम करने की तत्परता भी जाहिर की.

भारत के विदेश सचिव पद से सेवानिवृत्त होने के करीब 16 महीने बाद 64 वर्षीय जयशंकर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश का विदेश मंत्री नियुक्त किया. इस आश्चर्यजनक कदम का उद्देश्य देश की विदेश नीति को रणनीतिक तौर पर और भी मजबूत बनाना है.

जयशंकर 1977 बैच के भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी रहे हैं. बृहस्पतिवार को उन्हें नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी. चीनी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार रात एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘भारत का विदेश मंत्री नियुक्त होने पर श्रीमान जयशंकर को हम बधाई देते हैं.’’

इसमें कहा गया है कि वांग ने उन्हें एक बधाई संदेश भेजा है. जयशंकर 2009-13 तक चीन में भारत के दूत थे. वह 2015-2018 के बीच भारत के विदेश सचिव थे. उन्होंने चीन के साथ डोकलाम गतिरोध को दूर करने में अहम भूमिका निभाई थी.

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुरू किया ट्वीट का जवाब देना.


तीन बार भारत-चीन सीमा संकट सुलझाया
अप्रैल 2013 में चीनी फौज भारतीय सीमा में घुसपैठ कर लद्दाख के देपसांग क्षेत्र पर अपना नियंत्रण जतलाने के लिए टेंट लगा लिए थे. उस समय भारतीय सुरक्षाबल और चीनी फौज 21 दिनों तक आमने-सामने थे. तब एस जयशंकर ने चीन में भारतीय राजदूत के तौर पर इस विवाद को हल करने में मुख्य भूमिका निभाई. वहीं बतौर विदेश सचिव जयशंकर ने 2017 के डोकलाम विवाद सुलझाने में भी कामयाब रहे. यह विवाद 73 दिनों तक चला जब चीन को विवादित इलाके में सड़क बनाने से भारत ने रोका था. वहीं चीन द्वारा जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को स्टेपल वीज़ा देने वाले मामले को भी जयशंकर ने ही 2010 में सुलझाया.
कौन हैं एस जयशंकर
उल्लेखनीय है कि 64 साल के एस जयशंकर 28 जनवरी 2015 से 2018 तक भारत के विदेश सचिव रहे, मोदी सरकार ने ही उन्हें विदेश सचिव नियुक्त किया था. वो 1977 बैच के IFS अधिकारी हैं और विदेश मामलों पर उनकी अच्छी पकड़ है. भारत-चीन संबंधों को जयशंकर करीब से जानते हैं और कई बार केंद्र सरकार के लिए ट्रबल-शूटर की भूमिका में दिखे हैं. जयशंकर ने अमेरिका के साथ परमाणु डील का रास्ता साफ करने और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा को गणतंत्र दिवस पर मेहमान बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. बतौर मुख्यमंत्री जब मोदी 2012 में चीन गए थे, उसी दौरान जयशंकर की मुलाकात उनसे हुई थी.

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