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कोरोना के खौफ में जी रहे पाकिस्‍तानियों के लिए चुनौती बना कांगो वायरस

News18Hindi
Updated: March 22, 2020, 2:01 PM IST
कोरोना के खौफ में जी रहे पाकिस्‍तानियों के लिए चुनौती बना कांगो वायरस
इस वायरस से प्रभावित व्यक्ति को तेज बुखार आता है. कमर, मांसपेशियों, गर्दन में दर्द होता है.

इस वायरस से बचाव हो सकता है, अगर जानवरों के पास जाने से बचा जाए. फिलहाल इसकी कोई वैक्‍सीन नहीं है.

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  • Last Updated: March 22, 2020, 2:01 PM IST
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कराची. पाकिस्‍तान (Pakistan) में कांगो वायरस (Congo virus) का केस सामने आया है. पहले से ही कोरोना से खौफजदा लोगों के लिए यह डराने वाली खबर है. जिन्ना अस्पताल (Jinnah Hospital) की कार्यकारी अधिकारी डॉ. सिमी जमाली के मुताबिक 40 वर्षीय व्यक्ति में कांगो वायरस की पुष्टि हुई है. यह व्‍यक्ति पेशे से कसाई है. प्रभावित व्‍यक्ति को सिविल अस्पताल से जिन्ना अस्पताल में रेफर किया गया है.

कराची में रिपोर्ट होने वाला साल का पहला केस
डॉ. सिमी जमाली ने कहा कि इस साल कराची (Karachi) में रिपोर्ट किया जाने वाला कांगो का यह पहला मामला है. जिन्‍ना अस्‍पताल (Jinnah Hospital) में कोरोना वायरस के मरीजों के लिए बनाए गए आइसोलेशन वार्ड में मरीज को रखा गया. इसके बाद उसे दूसरे वार्ड में भेज दिया गया.

'एआरवाई न्‍यूज' की खबर के मुताबिक पिछले साल सितंबर में कांगो वायरस का एक मामला सामने आया था. उस मरीज की उम्र 33 साल थी और वह सिंध (Sindh) प्रांत के जिला शहजादपुर (Shazadpur) का था. पीड़ित को अस्पताल ले जाने के बाद उसके कई टेस्‍ट कराए गए थे, जिनमें उसको कांगो वायरस होने की पुष्टि हुई. डॉक्टरों ने मरीज को गहन चिकित्सा वार्ड में भर्ती किया है और उसकी देखरेख की जा रही है.



कांगो वायरस क्या है?
यह वायरस मवेशियों की खाल से चिपकी चीचड़ों में पाया जाता है. चीचड़ी के काटने से कांगों वायरस इंसान में प्रवेश कर जाता है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक नीरो नाम का वायरस इंसानी खून, थूक में पाया जाता है. यही इंसानों में कांगों बुखार फैलाता है.

कोरोना वायरस जैसे हैं इसके लक्षण भी
इस वायरस से प्रभावित व्यक्ति को तेज बुखार आता है. वहीं उसकी कमर, मांसपेशियों, गर्दन में दर्द होता है. उल्टी, मतली, गले में खराश और बदन पर पड़ने वाले लाल रंग के धब्बे इसके लक्षण हैं.

फिलहाल कांगो वायरस की कोई वैक्‍सीन नहीं है
इस वायरस से बचाव हो सकता है, अगर जानवरों के पास जाने से बचा जाए. अगर उनके पास जाना भी पड़े, तो उनको छूने के लिए दस्‍तानों का इस्‍तेमाल किया जाए. इस वायरस से सावधानी ही बचाव है, क्‍योंकि फिलहाल इसकी कोई वैक्‍सीन नहीं है. इसलिए जरूरी है कि सावधानी बरती जाए और अगर इसके लक्षण इसके होने की पुष्टि करें, तो फौरन डॉक्‍टर को दिखाएं.

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First published: March 22, 2020, 1:55 PM IST
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