कोरोना : कतर में वेतन न मिलने से आक्रोशित श्रमिकों का प्रदर्शन

कतर में प्रवासी श्रमिकों ने वेतन न मिलने को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. फाइल फोटो
कतर में प्रवासी श्रमिकों ने वेतन न मिलने को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. फाइल फोटो

श्रम मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वेतन में देरी को लेकर 22 मई को बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों ने शीरेब क्षेत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने कहा, 'मंत्रालय ने तत्काल जांच के बाद यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं कि आने वाले दिनों में सभी को वेतन का तुरंत भुगतान किया जाए.'

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दोहा. कतर (Qatar) में हुए एक दुर्लभ घटनाक्रम में प्रवासी श्रमिकों ने वेतन नहीं मिलने को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. कतर सरकार ने शनिवार को यह जानकारी दी. कोरोना वायरस महामारी (Corona Virus) के कारण कतर में अर्थव्यवस्था (Economy) बुरी तरह प्रभावित हुई है और तेल के दाम भी निचले स्तर पर हैं. सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल हुई तस्वीरों में शुक्रवार को राजधानी दोहा के शीरेब जिले में 100 से अधिक व्यक्ति मुख्य सड़क अवरुद्ध कर तालियां बजाते और नारे लगाते हुए प्रदर्शन करते नजर आ रहे हैं जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है.

प्रवासी श्रमिकों ने किया शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन
श्रम मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वेतन में देरी को लेकर 22 मई को बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों ने शीरेब क्षेत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने कहा, 'मंत्रालय ने तत्काल जांच (मंत्रालय) के बाद यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं कि आने वाले दिनों में सभी को वेतन का तुरंत भुगतान किया जाए. साथ ही वेतन भुगतान न करने वाली कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है. भरपूर तेल संपदा वाला खाड़ी देश कतर सस्ते विदेशी श्रमिकों पर निर्भर है जिनमें से अधिकतर भारत, श्रीलंका और नेपाल के हैं.

गौरतलब है कि कोरोना वायरस की वजह से ज्‍यादातर देशों में लॉकडाउन लगा हुआ है और आने-जाने पर पाबंदी है. ऐसे में विदेशों में फंसे श्रमिकों के हालात बद्तर हैं. उनकी नौकरियां जा चुकी हैं और कई ऐसे हैं जिन्‍हें वेतन भी नहीं मिल पाया है. वहीं इंटरनेशनल उड़ानें रद्द किए जाने की वजह से उनकी वतन वापसी भी नहीं हो पा रही है. वहीं कई तरह के प्रतिबंधों से देशों की अपनी अर्थव्‍यवस्‍था भी कमजोर हुई है. लोगों को नौकरियों से निकाला जा रहा है. संस्‍थान बंदी की कगार पर हैं. कोरोना वायरस महामारी के कारण पूरे विश्व में जारी लॉकडाउन की वजह से तेल की मांग बिल्कुल गिर गई है, जिसके कारण कच्चे तेल का भाव कई सालों के निचले स्तर पर है. तेल की कीमत और डिमांड घटने के कारण तेल उत्पादक देशों की वित्तीय हालत गड़बड़ा रही है, जिसके कारण खाड़ी देशों को बॉन्ड बेचने पड़ रहे हैं.
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