कोरोना का डेल्टा स्‍ट्रेन अपनी जड़ें जमा सकता है: WHO की चेतावनी

WHO के यूरोप निदेशक ने चेतावनी दी है कि कोविड-19 का नया स्‍ट्रेन क्षेत्र में जड़ जमा सकता है. (प्रतीकात्‍मक चित्र)

WHO के यूरोप निदेशक ने चेतावनी दी है कि कोविड-19 का नया स्‍ट्रेन क्षेत्र में जड़ जमा सकता है. (प्रतीकात्‍मक चित्र)

डब्ल्यूएचओ (WHO) यूरोप के क्षेत्रीय निदेशक ने कहा, ‘‘पिछली गर्मियों के दौरान कम उम्र के लोगों में मामले धीरे-धीरे बढ़ते गए और फिर बुजुर्ग लोगों में संक्रमण फैला, जिससे महामारी का प्रकोप अत्यधिक बढ़ गया.’’

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जिनेवा.  विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के यूरोप निदेशक ने चेतावनी दी है कि कोविड-19 का उच्च संचरण वाला प्रकार (स्‍ट्रेन) ‘‘क्षेत्र में जड़ जमा सकता है’’ क्योंकि कई देश प्रतिबंधों में ढील देने की तैयारी कर रहे हैं और अधिक सामाजिक कार्यक्रमों तथा सीमा पार यात्राओं की अनुमति दे रहे हैं. डब्ल्यूएचओ के डॉ. हंस क्लूगे ने बृहस्पतिवार को एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा कि इस प्रकार को ‘डेल्टा’ प्रकार के नाम से भी जाना जाता है और इस पर कुछ टीकों के प्रभावी नहीं होने के भी लक्षण हैं.

डब्ल्यूएचओ यूरोप के क्षेत्रीय निदेशक ने कहा, ‘‘पिछली गर्मियों के दौरान कम उम्र के लोगों में मामले धीरे-धीरे बढ़ते गए और फिर बुजुर्ग लोगों में संक्रमण फैला, जिससे महामारी का प्रकोप अत्यधिक बढ़ गया.’’ उन्होंने कहा कि कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी के कारण 2020 की गर्मियों और सर्दियों में मौतें हुईं और फिर लॉकडाउन लगा. उन्होंने चेतावनी दी कि आबादी का कुछ हिस्सा खासकर 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में अब भी टीका नहीं लगा है.

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क्लूगे ने कहा, ‘‘हमें फिर वही गलती नहीं दोहरानी चाहिए.’’  उन्होंने कहा कि वह यह नहीं कहते कि लोगों को नहीं घूमना चाहिए लेकिन यात्रियों से सावधानी बरतने की अपील की. उन्होंने महाद्वीप में टीकाकरण एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य के अन्य कदम उठाने की भी अपील की.


क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स



एक्सपर्ट्स का कहना है कि मध्य यूरोप में बढ़े मामलों के पीछे कोरोना का नया यूके स्ट्रेन जिम्मेदार है. नए वायरस को स्टडी कर रहे वैज्ञानिकों ने पाया था कि कोरोना वायरस शुरुआत से अब तक 23 बार म्यूटेशन की प्रक्रिया से गुजर चुका है. बीच के काफी सारे म्यूटेशन में वायरस खतरनाक नहीं हुआ, वहीं ये नया प्रकार संक्रमण की दृष्टि से काफी घातक माना जा रहा है. नए कोरोना वायरस में कांटेदार संरचना 8 बार म्यूटेशन से गुजरकर 8 गुनी ज्यादा कांटेदार हो चुकी है. नए वायरस में जो कांटेदार संरचना ज्यादा होती है, उसके जरिए वो शरीर में और आसानी से घुस जाता है. कोरोना की यह कांटेदार संरचना ही उसे हमारे लिए ज्यादा घातक बना चुकी है.

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