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कोरोना: जिस रिपोर्ट को रोकने के लिए चीन ने लगा दिया था पूरा जोर, वो अब हुई जारी

कोरोना: जिस रिपोर्ट को रोकने के लिए चीन ने लगा दिया था पूरा जोर, वो अब हुई जारी

अमेरिका (US) के चीन (China) पर खुलकर हमलावर होने के बाद अब यूरोपियन यूनियन (European Union) के सुर भी बदलते नज़र आ रहे हैं. चीन बीते दो हफ़्तों से यूरोपियन यूनियन की एक रिपोर्ट को सार्वजनकि होने से रोक रहा था, हालांकि उसके तमाम प्रयासों के बावजूद अब ये रिपोर्ट सामने आ गयी है.

अमेरिका (US) के चीन (China) पर खुलकर हमलावर होने के बाद अब यूरोपियन यूनियन (European Union) के सुर भी बदलते नज़र आ रहे हैं. चीन बीते दो हफ़्तों से यूरोपियन यूनियन की एक रिपोर्ट को सार्वजनकि होने से रोक रहा था, हालांकि उसके तमाम प्रयासों के बावजूद अब ये रिपोर्ट सामने आ गयी है.

अमेरिका (US) के चीन (China) पर खुलकर हमलावर होने के बाद अब यूरोपियन यूनियन (European Union) के सुर भी बदलते नज़र आ रहे हैं. चीन बीते दो हफ़्तों से यूरोपियन यूनियन की एक रिपोर्ट को सार्वजनकि होने से रोक रहा था, हालांकि उसके तमाम प्रयासों के बावजूद अब ये रिपोर्ट सामने आ गयी है.

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    बीजिंग. कोरोना संक्रमण (Coronavirus) को लेकर अमेरिका (US) के चीन (China) पर खुलकर हमलावर होने के बाद अब यूरोपियन यूनियन (European Union) के सुर भी बदलते नज़र आ रहे हैं. चीन बीते दो हफ़्तों से यूरोपियन यूनियन की एक रिपोर्ट को सार्वजनिक होने से रोक रहा था. हालांकि उसके तमाम प्रयासों के बावजूद अब ये रिपोर्ट सामने आ गयी है. इस रिपोर्ट में कोरोना (Covid-19) वायरस के मामले में चीन पर गलत सूचनाएं साझा करने के आरोप लगाए गए हैं.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार चीन नहीं चाहता था कि यूरोपियन यूनियन की ये रिपोर्ट बहार आए और कई यूरोपीय देश भी ऐसे माहौल में इस रिपोर्ट के सार्वजनिक किए जाने के खिलाफ थे. हालांकि यूरोपियन यूनियन की रिपोर्ट में इस तरह के आरोपों के बाद फिलहाल ईयू में चीनी मिशन की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. ईयू की एक प्रवक्ता ने कहा- 'इस रिपोर्ट पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती. यह हमारे पार्टनर्स और दूसरे देशों के बीच का मामला है, इसमें कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं है.' बता दें कि यह रिपोर्ट 21 अप्रैल को ही जारी होनी थी लेकिन चीनी अधिकारियों के दबाव के चलते इसे जारी नहीं किया गया था.



    यूरोप में चीन को लेकर घबराहट!
    बता दें कि इसी महीने फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फ़ाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में चीन पर आरोप लगाए थे और कहा था कि चीनी सरकार चाहती तो दुनिया में कोरोना से हुई तबाही को काफी हद तक कम किया जा सकता था. फ्रांस की तरफ से आए इस बयान के बाद जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने भी चीन को सहयोग देने की सलाह दी थी. हालांकि जानकारों का मानना है कि यूरोपीय देशों की सरकारें अमेरिका की तरह फिलहाल चीन से पंगा लेने के लिए तैयार नहीं हैं. इनमें से ज्यादातर देश मेडिकल उपकरणों, टेस्ट किट, PPE और अन्य ज़रूरी सामानों के लिए चीन पर ही निर्भर हैं. इसके अलावा चीन को शामिल किए बिना कोरोना वायरस की पूरी जानकारी हासिल करना नामुमकिन है और ये वैक्सीन बनाने में और अड़चने पैदा कर सकता है.

    चीन में क्यों बढ़ रहे हैं विदेशी संक्रमित
    उधर चीन के उत्तर पश्चिमी इलाक़े शांग्जी में शनिवार को कोरोना वायरस संक्रमण के सात नए मामले सामने आए. ये सभी सात नए संक्रमित लोग हाल ही में रूस से लौटे थे. चीन में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले यूरोप के कई देशों और अमेरिका की तुलना में बेहद कम हैं. बाहर से आ रहे लोगों में संक्रमण के मामले चीन के लिए सिरदर्द बने हुए हैं.

    कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण के कारण चीन ने मार्च से ही देश में विदेशी नागरिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था. राजधानी बीजिंग से किसी भी अंतरराष्ट्रीय उड़ान को बदलने पर प्रतिबंध है और साथ ही बंदरगाहों और सीमाओं पर चेक प्वाइंट्स बना रखे हैं. 24 अप्रैल को चीन में कोरोना वायरस के 12 नए मामले सामने आए. इससे एक दिन पहले छह नए मामले सामने आए थे. इन 12 मामलो में से 11 बाहर से आए हुए लोग थे.

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    Tags: China, Corona, Corona epidemic, Corona Virus, Donald Trump, European union

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