अच्छी खबर! कोविड-19 के मरीजों की जान बचाने में कारगर है डेक्सामेथासोन दवा

अच्छी खबर! कोविड-19 के मरीजों की जान बचाने में कारगर है डेक्सामेथासोन दवा
इस समय दिल्ली में 8480 कोरोना पॉजिटिव मरीज़ होम आइसोलेशन में हैं. सांकेतिक तस्वीर)

इस रिसर्च के मुताबिक दवा के इस्तेमाल से कोरोना संक्रमण (Coronavirus) से बीमार मरीजों की मृत्यु दर एक तिहाई तक घट गयी. डेक्सामेथासोन 1960 के दशक से गठिया और अस्थमा के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा है.

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लंदन. इंग्लैंड (England) में वैज्ञानिकों की एक टीम ने दावा किया है उन्हें इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि डेक्सामेथासोन (Dexamethasone) नामक स्टेराइड के इस्तेमाल से कोरोना संक्रमण से गंभीर रूप से बीमार मरीजों को मौत से बचाया जा सकता है. इस रिसर्च के मुताबिक दवा के इस्तेमाल से बीमार मरीजों की मृत्यु दर एक तिहाई तक घट गयी. डेक्सामेथासोन 1960 के दशक से गठिया और अस्थमा के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा है. कोरोना के जिन मरीज़ों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही है, उनमें से आधे नहीं बच पा रहे हैं इसलिए इस जोखिम को एक तिहाई तक कम कर देना वाक़ में काफ़ी बड़ी कामयाबी है.

मंगलवार को नतीजों की घोषणा की गयी और जल्द ही अध्ययन को प्रकाशित किया जाएगा. अध्ययन के मुताबिक सख्ती से जांच करने और औचक तौर पर 2104 मरीजों को दवा दी गयी और उनकी तुलना 4321 मरीजों से की गयी, जिनकी साधारण तरीके से देखभाल हो रही थी. जिन मरीज़ों को गंभीर रूप से बीमार पड़ने की वजह से वेंटिलेटर का सहारा लेना पड़ रहा है, उनके मरने का जोखिम क़रीब एक तिहाई इस दवा की वजह से कम हो जाता है. जिन्हें ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़ रही है, उनमें पांचवें हिस्से के बराबर मरने का जोखिम कम हो जाता है. दवा के इस्तेमाल के बाद श्वसन संबंधी मशीनों के साथ उपचार करा रहे मरीजों की मृत्यु दर 35 प्रतिशत तक घट गयी. जिन लोगों को ऑक्सीजन की सहायता दी जा रही थी उनमें भी मृत्यु दर 20 प्रतिशत कम हो गयी.





ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की रिसर्च टीम को मिली कामयाबी
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ता पीटर होर्बी ने एक बयान में कहा, 'ये काफी उत्साहजनक नतीजे हैं.' उन्होंने कहा, 'मृत्यु दर कम करने में और ऑक्सीजन की मदद वाले मरीजों में साफ तौर पर इसका फायदा हुआ. इसलिए ऐसे मरीजों में डेक्सामेथासोन का इस्तेमाल होना चाहिए. डेक्सामेथासोन दवा महंगी भी नहीं है और दुनियाभर में जान बचाने के लिए इसका प्रयोग किया जा सकता है.' हाल में इसी अध्ययन में कहा गया था कि मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन कोरोना वायरस के उपचार में उपयोगी नहीं है. अध्ययन के तहत इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड में 11,000 से ज्यादा मरीजों को शामिल किया गया था.

 

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