एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन लेने के बाद होने वाली परेशानियों को लेकर यूरोपियन एजेंसी ने किया अलर्ट

इंदौर में रेमडेसिविर इंजेक्शन की बड़ी खेप पहुंचने से राहत मिली है. (सांकेतिक तस्वीर)

इंदौर में रेमडेसिविर इंजेक्शन की बड़ी खेप पहुंचने से राहत मिली है. (सांकेतिक तस्वीर)

यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी की सेफ्टी कमेटी ने इस बारे में एक रिपोर्ट तैयार की है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) वैक्सीन से असामान्य ब्लड क्लोटिंग (Blood Clot के मामले कम प्लेटलेट्स वाले लोगों में सामने आ सकते हैं. ऐसा साइड इफेक्ट है जिसकी तीव्रता बहुत कम है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 12, 2021, 7:33 AM IST
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यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी (EMA) की सुरक्षा समिति ने एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) की कोरोना वैक्सीन (Coronavirus Vaccine) से ब्लड क्लॉट (Blood Clot) बनने को लेकर नई चेतावनी दी है. एक रिपोर्ट में EMA ने कहा कि एस्ट्राजेनेका (भारत में कोविशिल्ड कहा जाता है) की कोरोना वैक्सीन लेने वालों और चिकित्सा पेशेवरों को कम प्लेटलेट्स वाले असामान्य ब्लड क्लॉट वाले मामलों को गंभीरता से देखना चाहिए, जो कि वैक्सीन लेने के बाद दुर्लभ प्रतिकूल प्रभाव हो सकता है.

यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी ने कहा है कि एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन लेने के बाद कोई खास रिस्क फैक्टर नहीं देखा गया है. वास्तव में यह उम्र और लोगों के शरीर से जुड़ी अन्य परेशानियों से संबंधित रिसर्च में पाया गया है. हालांकि, वैक्सीन से ऐसे साइड इफेक्ट की संभावना बहुत कम थी.

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यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी ने रिपोर्ट में कहा कि लोगों को इसके लक्षणों के बारे में पता होना चाहिए, ताकि वे इन्हें वक्त रहते पहचान सके और तत्काल मेडिकल सुविधा ले सके. यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी ने थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (प्लेटलेट स्तर में गिरावट) को "सामान्य" के रूप में वर्गीकृत किया है. इसका अर्थ है कि 100 में से एक व्यक्ति में ऐसे साइड इफेक्ट हो सकते हैं. वहीं, 10 में से एक से कम व्यक्तियों में ऐसे लक्षण मिल सकते हैं. क्लोटिंग के साथ थ्रोम्बोसाइटोपेनिया की घटना "बहुत दुर्लभ" के रूप में होती है. 10,000 टीकाकरण वाले व्यक्तियों में सिर्फ एक के साथ ऐसा हो सकता है.
एस्ट्राजेनेका ने इस वैक्सीन के पैकेज लीफलेट भी अपडेट किए हैं. इनमें मस्तिष्क, आंत, यकृत, प्लीहा में खून का रिसाव या ब्लड क्लॉट के बारे में चेतावनी, लक्षण और सावधानियां शामिल हैं. ईएमए ने कहा, 'बहुत दुर्लभ प्रकार का क्लोटिंग दिमाग की सतह पर नसों में हो सकता है. यहीं से आंतों और धमनियों तक खून पहुंचता है.'

ईएमए ने कहा, 'अब तक दर्ज किए गए ज्यादातर मामले 60 साल से कम उम्र की महिलाओं में ही सामने आए हैं. इनमें से ज्यादातर केस पहली खुराक लेने के दो हफ्ते के अंदर हुए. दूसरी खुराक के साथ सीमित अनुभव होता है.' रिपोर्ट में कहा गया है कि वैक्सीन से मिलने वाले लाभ लोगों के लिए जोखिम को कम करने के ज्यादा है, क्योंकि ये कोविड -19 को फैलने से रोकने और मौतों की संख्या को कम करने में प्रभावी रहा है.

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इसके साथ ही मेडिसिन एजेंसी ने इस बात पर जोर दिया है कि कोरोना वायरस से मुकाबले में लोगों को वैक्सीन लगाना जारी रखना चाहिए, तभी इस संकट से निपटने में मदद मिल सकती है. यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी के चीफ एमर कुक ने कहा, 'सुरक्षा समिति ने एस्ट्रेजनेका की कोरोना वायरस वैक्सीन के फायदों पर मुहर लगा दी है. कोविड-19 महामारी से लड़ाई में यह टीका काफी प्रभावी है और इसके साइड इफेक्ट बहुत मामूली हैं. यह लोगों का जीवन बचाने में मदद कर रहा है.'
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