कोरोना को लेकर स्पेन में हर्ड इम्युनिटी का प्रयोग विफल, सिर्फ 5% लोगों में बनी एंटीबॉडी

स्पेन में सिर्फ 5 प्रतिशत लोगों में ही कोरोना का एंटीबॉडी बन पाया (प्रतीकात्मक तस्वीर)
स्पेन में सिर्फ 5 प्रतिशत लोगों में ही कोरोना का एंटीबॉडी बन पाया (प्रतीकात्मक तस्वीर)

विशेषज्ञों (Experts) का कहना है कि 'हर्ड इम्यूनिटी' (Herd immunity) के लिए कम से कम 70 प्रतिशत आबादी में रोग प्रतिरक्षा तंत्र तैयार होना चाहिए ताकि संक्रमण-रहित लोग संक्रमित ना हों.

  • Share this:
नई दिल्ली. कई देशों के विशेषज्ञों ने कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण को कम करने के लिए हर्ड इम्यूनिटी (Herd immunity) का सिद्धांत का समर्थन किया था. लेकिन स्पेन (Spain) में यह प्रयोग विफल रहा है. स्पेन में सिर्फ 5 प्रतिशत लोगों में ही कोरोना का एंटीबॉडी बन पाया, जबकि इस देश में 95 प्रतिशत लोग वायरस के प्रति अतिसंवेदनशील पाए गए हैं. स्पेन में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर यह परीक्षण किया गया था. इसमें लोगों में सार्स-कोव-2 के संक्रमण का पता सीरो टेस्ट भी किया गया.

अध्ययन (Study) के लिए 361,000 से अधिक लोगों की दो चरणों में रैंडम सैंपलिंग की गई, ताकि मरीज के नमूने में एंटीबॉडी का पता लगाया जा सके. जितने ज्यादा लोगों के शरीर में एंटीबॉडी मौजूद होगी, उतने ज्यादा हर्ट इम्युनिटी हासिल होगी और कोरोना वायरस को खत्म किया जा सकेगा. शोधकर्ताओं का कहना है कि दोनों जाचों के परिणाम के आधार पर दो निष्कर्ष निकलकर सामने आए.  पहला कि कुछ लोगों की दोनों जांच में IgG एंटीबॉडी पाई गई और दूसरा कि कुछ लोगों में किसी एक जांच में ही इसकी उपस्थिति मिली.

27 अप्रैल से 11 मई के बीच किया गया शोध



बता दें कि हर्ड इम्यूनिटी का आशय ऐसी स्थिति से है जब बहुत लोग वायरस से प्रभावित हो जाते हैं और संक्रमण का फैलना रूक जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि 'हर्ड इम्यूनिटी' के लिए कम से कम 70 प्रतिशत आबादी में रोग प्रतिरक्षा तंत्र तैयार होना चाहिए ताकि संक्रमण-रहित लोग संक्रमित ना हों. आबादी के आधार पर अध्ययन का मकसद स्पेन में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर कोरोना वायरस संक्रमण में ‘सीरो’ की मौजूदगी का आकलन करना था. अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि इस अध्ययन के लिए 35,883 घरों को चुना गया. इसके तहत 27 अप्रैल से 11 मई के दौरान भागीदारों को कोविड-19 के लक्षणों के बारे में जवाब लिए गए. अनुसंधानकर्ताओं ने दो तरह की जांच का विश्लेक्षण किया तो पाया कि ‘प्वाइंट ऑफ केयर’ टेस्ट में सीरो की मौजूदगी 5 प्रतिशत और इम्युनो जांच में इसकी मौजूदगी 4.6 प्रतिशत थी.
भौगोलिक आधार पर कुछ अंतर भी देखने को मिले. मैड्रिड में इसका स्तर ज्यादा (10 प्रतिशत से अधिक) रहा और तटीय क्षेत्र में यह स्तर (तीन प्रतिशत से नीचे) कम रहा. अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक नतीजों से पता चलता है कि स्पेन की ज्यादातर आबादी में कोरोना वायरस संक्रमण के लिए सीरो का परिणाम नकारात्मक रहा. लैंसेंट पत्रिका में कहा गया, 'पीसीआर जांच से पुष्ट अधिकतर मामलों में एंटीबॉडी का पता चला लेकिन कोविड-19 के लक्षण वाले बहुत सारे लोगों की पीसीआर जांच नहीं हुई. सीरोलॉजी जांच के आधार पर पुष्ट संक्रमण के कम से कम एक तिहाई मामले में मरीज में किसी तरह के लक्षण नहीं थे.’ अनुसंधानकर्ताओं ने कहा, ‘ये नतीजे जाहिर करते हैं कि महामारी की नयी लहर से बचने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त रखने की जरूरत है.'
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज