वर्ल्ड बैंक के अर्थशास्त्री ने की भारत की तारीफ, कहा- खाने की कमी पर देना होगा सबसे ज्यादा ध्यान

वर्ल्ड बैंक के अर्थशास्त्री ने की भारत की तारीफ, कहा- खाने की कमी पर देना होगा सबसे ज्यादा ध्यान
वर्ल्ड बैंक के अर्थशास्त्री ने कहा है कि दक्षिण एशिय़ा के देशों को खाने की कमी को लेकर सबसे ज्यादा ध्यान देना होगा.

वर्ल्ड बैंक (World Bank) के अर्थशास्त्री ने कोरोना वायरस (Coronavirus) से निपटने में भारत सरकार के उठाए कदमों की तारीफ की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 19, 2020, 10:20 PM IST
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कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण की वजह से दक्षिणी एशिया (South Asia) को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है. वर्ल्ड बैंक (World Bank) की इसी महीने आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया की इकोनॉमी (economy) पर कोरोना के संक्रमण के गंभीर असर होंगे. सार्क के देशों अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल, पाकिस्तान, मालदीव और श्रीलंका की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ने वाला है. इन देशों में 40 साल का सबसे बड़ा आर्थिक संकट सामने होगा. इनमें से करीब आधे देश मंदी की भयानक चपेट में आने वाले हैं.

द हिंदू से बात करते हुए रिपोर्ट के लेखक और साउथ एशिया के चीफ इकोनॉमिस्ट हंस टिमर ने इस बारे मे जानकारी दी है. उन्होंने कहा है कि दक्षिण एशियाई देशों को इस संकट से बचने के लिए प्रवासी मजदूरों को संभालना होगा, सर्विस सेक्टर के रेवन्यू लॉस पर ध्यान देना होगा और गरीबों के लिए फूड सिक्योरिटी के ऊपर काम करना होगा.

हंस टिमर ने कहा है कि लॉकडाउन की वजह से सार्क देशों का निर्यात, निवेश का माहौल, ग्लोबल वैल्यू चेन और दूसरी चीजें प्रभावित हुई हैं. इसके जबरदस्त संकट की स्थिति पैदा हुई है. उनका कहना है कि खराब से खराब हालात में अगर दक्षिण एशियाई देशों में ऐसा माना जाए कि तीन महीने तक लॉकडाउन रहता है तो इस दौरान इस इलाके में ग्रोथ रेट नेगेटिव में जा सकता है.



भारत सरकार के उठाए कदमों की अर्थशास्त्री ने की तारीफ



हालांकि संकट से निपटने में भारत सरकार के उठाए कदमों की हंस टिमर तारीफ करते हैं. उनका कहना है कि गरीब और घनी आबादी वाले देशों में कोरोना के संक्रमण को रोक पाना सबसे कठिन चुनौती है. इस दिशा में भारत सरकार ने सराहनीय काम किए हैं. झुग्गी बस्तियों और मजदूरों वाले कस्बों में संक्रमण को रोकना काफी मुश्किल काम है. लॉकडाउन की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित भी यही लोग हुए हैं.

हंस टिमर का कहना है कि लॉकडाउन जरूरी है लेकिन ये पर्याप्त उपाय नहीं है. इसके साथ ही फूड डिस्ट्रीब्यूशन, टेम्पररी वर्क प्रोग्राम और संक्रमण के टेस्ट और संक्रमण को ट्रेस करने के तरीके भी अपनाने होंगे. तभी इकोनॉमी को दोबारा से खोला जा सकता है.

अर्थव्यवस्था में जान डालने के लिए करने होंगे जबरदस्त प्रयास
उनका कहना है कि कोरोना के चलते दुनियाभर में मजदूरों का संकट पैदा होगा. खाड़ी के देशों से कई मजदूर वापस लौटे हैं. कुछ अभी भी वहां फंसे हैं. इसकी वजह से दुनियाभर में आर्थिक मंदी आएगी और तेल की कीमतों में कमी होगी. मजदूरों को अपने इलाकों में काम खोजना होगा. घरेलू प्रवासी मजदूरों के सामने भी समस्या आएगी. इसलिए सरकार को अर्थव्यवस्था खोलने से पहले इस दिशा में काम करना होगा और नौकरी के अवसर पैदा करने होंगे.

हंस टिमर का कहना है कि टूरिज्म इंडस्ट्री बुरी तरह से प्रभावित होगा. ये इंडस्ट्री उस वक्त तक सामान्य नहीं हो पाएगी, जब तक करोनो की वैक्सीन नहीं खोज ली जाती. सार्क देशों में मालदीव का सबसे ज्यादा नुकसान होगा. क्योंकि वहां टूरिज्म अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देता है. मालदीव के सामने चुनौती है कि वो कैसे अपने टूरिज्म इंडस्ट्री को बचाता है.

पर्यटकों को भीड़ से बचाकर वो इस सेक्टर को दोबारा से खड़ा कर सकता है. इस दौरान डिजिटल सर्विस और रिमोट लर्निंग में नए अवसर पैदा हो सकते हैं. ई कॉमर्स को भी बढ़ावा मिल सकता है. टूरिज्म से अलग इन क्षेत्रों में विकास की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं.

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First published: April 19, 2020, 10:20 PM IST
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