अमेरिका में कोरोना से बिगड़े हालात, हर छठा आदमी भूखा और दफनाने की जगह भी ख़त्म

अमेरिका में हर छठा आदमी भूखा सो रहा: रिपोर्ट (फोटो- AFP)

Coronavirus in US: अमेरिका में कोरोना महामारी के मामले फिर बढ़ने के बाद हालत बिगड़ते नज़र आ रहे हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक महामारी से अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान पहुंचा है और हर छठा अमेरिकी भूखा सोने के लिए मजबूर है.

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    वाशिंगटन. अमेरिका (US) में कोरोना महामारी (Coronavirus) ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है. अमेरिका में कोरोना से मरने वालों की संख्या 3 लाख 58 हजार से भी ज्यादा हो चुकी है और कई इलाकों में संक्रमण की दर में फिर से तेजी दर्ज की जा रही है. कोरोना ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है और हालात 2008 में आई आर्थिक मंदी से भी बुरे बताए जा रहे हैं. अमेरिका में भूख (every sixth US citizen is starving) एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है साथ ही कई राज्यों में अब लोगों को दफनाने के लिए भी जगह नहीं बची है.

    WHO से जुड़े एक्सपर्ट्स ने अमेरिका में कोरोना वायरस की एक और लहर की आशंका जताई है. इसकी वजह क्रिसमस और नए साल की छुट्टी के दौरान हुए प्रोग्राम में जुटी भीड़ को माना जा रहा है. अभी तक देश में दो करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं. अमेरिका में महामारी के कारण बड़े पैमाने पर लोगों ने रोजगार गंवाया और इसका असर यह हुआ कि अमेरिका में अब भूख की समस्या खड़ी हो गई. अमेरिका की सबसे बड़ी भूख राहत संस्था फीडिंग अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां दिसंबर के आखिर में 5 करोड़ से ज्यादा लोग खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे थे. यानी हर छठवां अमेरिकी भूख से जूझ रहा है. स्थिति ये है कि हर चौथा अमेरिकी बच्चा भूखा सोने के लिए मजबूर है.

    बेरोजगारी बढ़ने से बिगड़े हैं हालात
    इस रिपोर्ट के मुताबिक महामारी के फैलने के बाद से ही बेरोजगारी बड़ी तेजी से बढ़ रही है और अमेरिका में खाने के जरूरतमंदों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है. रोज के खाने के लिए सरकार की मदद पर निर्भर लोगों की संख्या जून के मुकाबले अब अमेरिका में दोगुना ज्यादा हो गयी है. फीडिंग अमेरिका नेटवर्क ने एक महीने में 54.8 करोड़ खाने के पैकेट बांटे हैं. महामारी शुरू होने से पहले की तुलना में यह 52% ज्यादा है. ये संस्था शहर में क्रिसमस से ठीक पहले हर साल औसतन 500 लोगों को खाना मुहैया कराती थी. जबकि इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 8,500 हो गया है. संस्था ने बताया है कि वे जहां भी इस तरह के खाना बांटने के कार्यक्रम कर रहे हैं वहां कई किलोमीटर लम्बी लाइन लग जाती है.



    कम्युनिटी मॉडल के जरिए की जा रही मदद
    इस रिपोर्ट में बताया गया है कि ब्लैक, एशियन और लैटिन-अमेरिकी समुदाय के लोगों की स्थिति काफी बुरी है. खाद्य संकट से निपटने के लिए अमेरिका में लोग अब एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं. कई जगह लोगों ने कम्युनिटी फ्रिज लगाए हैं. जिनके पास खाना नहीं है, वे इन फ्रिज से मुफ्त खाना ले जा सकते हैं. एक फ्रिज की जिम्मेदारी दो लोगों को सौंपी गई है. इसके अलावा सोशल मीडिया ग्रुप के जरिए भी भूखों की मदद की जा रही है. सिर्फ न्यूयॉर्क में 1.20 लाख लोग ऐसे हैं, जिनके पास 50 लाख डॉलर (करीब 36 करोड़ रुपए) या इससे अधिक की संपत्ति है. हालांकि महामारी के दौरान न्यूयॉर्क फूड बैंक ने 7.7 करोड़ खाने के पैकेट बांटे हैं. यह किसी अन्य साल की तुलना में 70% ज्यादा है.

    कैलिफोर्निया में अंत्येष्टि स्थलों पर नहीं बची और शवों के लिए जगह
    अमेरिका में कोरोना वायरस के कारण हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. वायरस का प्रकोप इतना बढ़ गया है कि अंत्येष्टि स्थलों में शवों के लिए जगह तक नहीं बची है. दक्षिण कैलिफोर्निया में अंत्येष्टि स्थलों के एक संगठन की ओर से कहा गया है कि उन्हें शोक संतप्त परिवारों को लौटाना पड़ रहा है क्योंकि यहां शवों के ढेर लग रहे हैं तथा अब और शवों के लिए जगह नहीं बची है.





    लॉस एंजिलिस में कॉन्टीनेंटल फ्यूनरल होम्स की माग्दा मेल्डोनाडो ने कहा, 'इस क्षेत्र में मैं बीते 40 साल से काम कर रही हूं और मैंने इससे पहले कभी नहीं सोचा था कि ऐसा कुछ भी हो सकता है. हमें परिवारों को कहना पड़ रहा है कि हम उनके परिजन को यहां नहीं ले पाएंगे.' मेल्डोनाडो ने बताया कि कॉन्टीनेंटल फ्यूनरल होम्स में प्रतिदिन औसतन 30 शव लाए जा रहे हैं जो सामान्य से छह गुना अधिक है. अधिकतर अंत्येष्टि स्थलों में यही स्थिति है. कैलिफोर्निया के लॉस एंजिलिस काउंटी में अब तक दस हजार संक्रमितों की मौत हो चुकी है. इससे पहले न्यूयॉर्क में भी कई कब्रिस्तान इसी तरह पूरी तरह भर जाने की घोषणा कर चुके हैं.

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