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दुनिया भर में लोग कर रहे हैं 'वर्क फ्रॉम होम', क्या इंटरनेट ब्रेकडाउन करीब है?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि भविष्य में वर्क फ्रॉम होम का सबसे ज्यादा फायदा महिलाओं को हागा.

कोरोना संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए 'सोशल डिस्टेंसिंग' और आइसोलेशन की सलाह दी जा रही है. इसी को देखते हुए दुनिया भर के ज्यादातर देशों के ऑफिसों ने अपने कर्मचारियों को 'वर्क फ्रॉम होम' यानी घर से काम करने के लिए कह दिया है.

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    वाशिंगटन. दुनिया भर में कोरोना संक्रमण (Coronavirus) के मामले हर दिन बढ़ते ही जा रहे हैं और ये अब 2 लाख का आंकड़ा पार करने के बेहद नज़दीक हैं. कोरोना वायरस से दुनिया हर में करीब 8 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है और WHO इसे महामारी घोषित कर चुका है. इस संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए 'सोशल डिस्टेंसिंग' और आइसोलेशन की सलाह दी जा रही है. इसी को देखते हुए दुनिया भर के ज्यादातर देशों के ऑफिसों ने अपने कर्मचारियों को 'वर्क फ्रॉम होम' यानी घर से काम करने के लिए कह दिया है. हालांकि अब सवाल उठने लगे हैं कि ये कितने दिन चल सकता है और क्या इंटरनेट इस लायक है कि घरों से कम कर रहे इन लोगों का ट्रैफिक सह पाएगा?

    पॉलिटिको में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के कई देशों में अभी से इंटरनेट स्पीड स्लो हो जाने के मामले सामने आने लगे हैं. स्पेन में रहने वालीं कोर्नाड इटरब को भी कोरोना के चलते कंपनी ने घर से काम करने के लिए कह दिया है. कोर्नाड एक एप डवलपर हैं और उन्हें घर से काम करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उनके मुताबिक पहले ऐसा कभी नहीं था लेकिन अब लगातार इंटरनेट स्लो है और वीडियो कॉल्स ड्राप हो रही हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें फाइल्स अपलोड करने में काफी दिक्कत आ रही है और ये सिर्फ उनकी ही नहीं बल्कि उनके सभी सहकर्मियों के साथ भी हो रहा है. हालांकि स्पेन की सरकार ने भरोसा दिलाया है कि वर्क फ्रॉम होम के बावजूद भी इंटरनेट में लोगों को किसी तरह की दिक्कत का सामना नहीं होगा.

    50% से ज्यादा बढ़ गया है ट्रैफिक
    इंटरनेट ट्रैफिक से जुड़े रिसर्च करने वाली एजेंसी Akamai की एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना के केस बढ़ने के बाद लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई है और इसका सीधा असर इंटरनेट ट्रैफिक पर दिख रहा है. ग्लोबल इंटरनेट ट्रैफिक में इन दिनों में 50% से भी ज्यादा की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. बीते दिनों अमेरिका और ब्रिटेन की इंटरनेट प्रोवाइडर कंपनियों को काफी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है और उन्होंने लोगों से मोबाइल डेटा की जगह फिक्स्डलाइन ब्रॉडबैंड इस्तेमाल करने के लिए कहा है.

    ये कंपनियां इसके पीछे कोरोना वजह नहीं मान रहीं हैं लेकिन साफ़ है कि ट्रैफिक में इजाफा परेशानियां खड़ी कर रहा है. हालांकि ये दिक्कतें फिलहाल ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो कांफ्रेंसिग जैसी भारी भरकम डेटा इस्तेमाल करने वाली सर्विसेज में ही देखने को मिल रही हैं. फ्रांस के डिजिटल मिनिस्टर केडरिक ओ ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि इंटरनेट ट्रैफिक काफी ज्यादा है और इस पर काबू पाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं.

    इंटरनेट प्रोवाइडर कंपनियों की है अग्नि परीक्षा
    जानकारों का मानना है कि इंटरनेट पर लोग सिर्फ वर्क फ्रॉम होम से ही नहीं बढ़ा है. स्कूलों-कॉलेजों में छुटियां कर दीं गई हैं और होम मेकर औरतें भी सोशल डिस्टेंसिंग के चलते घरों में मौजूद हैं. बच्चे जहां पढ़ाई के लिए यूट्यूब और एजुकेशनल एप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं वहीं बाकी लोगों ने सोशल मीडिया और नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम जैसे वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर ज्यादा वक़्त बिताना शुरू कर दिया है. असेंबली टेलिकॉम रेग्युलेटरी फर्म के फाउंडर मैथ्यू हॉट के मुताबिक घरों के लिए सलाह जारी करनी होगी और उन्हें बताना होगा कि ऐसी स्थिति में इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए वरीयता निश्चित करें.

    मैथ्यू के मुताबिक ये कंपनियों की परीक्षा है कि वे कैसे इस मांग और सप्लाई की चेन को बाधित होने से रोक सकती हैं. फ्रांस और स्पेन में इंटरनेट प्रोवाइडर ने यूजर्स को फ्री में अतिरिक्त डेटा देना शुरू कर दिया है. हालांकि इस फ्री डेटा के साथ ये भी अपील की जा रही है कि वीडियो कॉलिंग और ऑनलाइन गेमिंग की जगह इसका सही इस्तेमाल किया जाए.

    AT&T ने जारी एक बयान में कहा है कि कोरोना से पीड़ित व्यक्तियों को बिल भरने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा और हम भरोसा दिलाते हैं कि आपको इंटरनेट इस्तेमाल करने में किसी भी तरह की दिक्कत पेश नहीं आएगी. हालांकि जानकारों का मानना है कि इंटरनेट की बढ़ती मांग को संभालना कुछ बड़ी कंपनियों को छोड़कर बाकी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है.



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