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कोरोना: अफगानिस्तान के सामने भुखमरी या संक्रमण में से किसी एक को चुनने की मजबूरी

News18Hindi
Updated: April 1, 2020, 6:08 PM IST
कोरोना: अफगानिस्तान के सामने भुखमरी या संक्रमण में से किसी एक को चुनने की मजबूरी
अफगानिस्तान में कोरोना वायरस के संक्रमण की जांच तक नहीं हो पा रही है.

काबुल (Kabul) में कोरोना (Coronavirus) के संक्रमण की चेतावनी के बावजूद बाजार में चहल पहल है. लोग दुकानों में काम कर रहे हैं. अपनी जरूरत का सामान इकट्ठा कर रहे हैं.

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काबुल: अफगानिस्तान (Afghanistan) के लोगों के सामने भयावह स्थिति है. उन्हें कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण या फिर भुखमरी में से किसी एक को चुनना है. सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए लोगों को घरों में रहने की सलाह दे रही है. लेकिन लोग काम पर नहीं जाएंगे तो वो अपने परिवार को खिलाएंगे क्या? इसी मजबूरी में कोरोना के संक्रमण के बावजूद लोग घरों से बाहर अपने काम पर जा रहे हैं.

द गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक काबुल में कोरोना के संक्रमण की चेतावनी के बावजूद बाजार में चहल पहल है. लोग दुकानों में काम कर रहे हैं. अपनी जरूरत का सामान इकट्ठा कर रहे हैं. मस्जिदों की प्रार्थना सभा में भी पहले की ही तरह भीड़ जुट रही है. आसमान पतंगों से अटा पड़ा है. घर में खाली बैठे बच्चे अपनी छतों पर जाकर पंतगे उड़ाकर अपना मन बहला रहे हैं.

काबुल में शनिवार को लॉक डाउन का ऐलान
काबुल में शनिवार को लॉक डाउन का ऐलान हो गया. शहर की करीब 60 लाख की आबादी को घरों में रहने को कहा गया है. पहले से ही जंग का मैदान बने अफगानिस्तान के सामने एक और बड़ा संकट खड़ा हो गया है.



रिपोर्ट के मुताबिक कई लोग लॉक डाउन को नहीं मान रहे हैं. उनके सामने बड़ा सवाल है कि अगर वो घर से बाहर नहीं निकलें तो अपने परिवार को खिलाएंगे क्या? सड़कों पर कोरोना वायरस के संक्रमण की चेतावनी वाले पोस्टर लगे हैं. उसी के नीचे मजदूर, मोची और वेंडर का काम करने वाले लोग काम की तलाश में खड़े दिखाई पड़ जाते हैं.



अफगानिस्तान में लोगों की लापरवाही की वजह से लॉक डाउन का ऐलान हुआ है. पब्लिक हेल्थ मिनिस्टर फिरोजुद्दीन फिरोज ने कहा है कि अगर हम कोरोना वायरस को गंभीरता से नहीं लेते हैं तो कोरोना हमें गंभीरता से ले लेगा. हेल्थ मिनिस्टर ने कहा है कि गाइडलाइ को फॉलो किया जाना बहुत जरूरी है.

अफगानिस्तान में संक्रमण की जांच तक नहीं हो पा रही
अफगानिस्तान में वायरस संक्रमण के 174 मामले सामने आ चुके हैं. संक्रमण की चपेट में आकर 4 लोगों की मौत हो चुकी है. लेकिन कहा जा रहा है कि ये आंकड़ा कुछ भी नहीं है. स्थितियां भयावह है क्योंकि बड़ी आबादी कोरोना के संक्रमण की जांच के दायरे से बाहर है. कोरोना के संक्रमण की जांच सिर्फ काबुल और देश के उत्तर पश्चिमी इलाकों में हो रही है.

अफगानिस्तान के हेल्थ मिनिस्टर ने कहा है कि ऐसी संभावना है कि कम से कम 2.5 करोड़ लोग वायरस से संक्रमित हो सकते हैं. कम से कम 1.6 करोड़ लोगों में कोरोना के लक्षण हैं. संक्रमण को रोका जा सकता है, अगर लोग सुरक्षा के उपाय अपनाएं और गाइडलाइन को फॉलो करें.

कई लोगों को लगता है कि लॉक डाउन अच्छा कदम है. लेकिन देश की बड़ी गरीब आबादी के सामने लॉक डाउन की वजह से भुखमरी का संकट खड़ा हो जाएगा. काबुल के एक दुकानदार ने द गार्जियन से बात करते हुए बताया कि वो किराने के सामान की दुकान चलाता है. अगर वो दुकान बंद कर देता है तो उसके 6 सदस्यों के परिवार के सामने भूखे मरने की नौबत आ जाएगी. इसलिए वो लॉक डाउन के बावजूद अपनी दुकान चला रहा है.

उसने कहा कि अगर वो दुकान नहीं चलाएगा तो किराये के पैसे कैसे देगा, परिवार के लिए खाना कहां से लाएगा. उसकी पत्नी टेलरिंग का काम करती है. उसने बताया कि पत्नी अपने घर से काम कर सकती है लेकिन उस तो दुकान खोलना ही होगा.

काबुल में 21 दिनों के लॉक डाउन का ऐलान
काबुल में 21 दिनों का लॉक डाउन लगाया गया है. स्थितियां अगर खराब होती हैं तो इसे आगे तक भी बढ़ाया जा सकता है. ऐसे में गरीब और बेघर लोगों के सामने जिंदगी की सबसे बड़ी समस्या आ पड़ी है.
संक्रमण से बचने के लिए अफगानिस्तान की सरकार ने जेलों से कुछ कैदियों को रिहा करने का फैसला किया है. लेकिन लोग कह रहे हैं कि पहले से ही बेरोजगारी और खराब आर्थिक स्थिति से गुजर रहे देश को हिंसा के बढ़ते मामलों से निपटना पड़ेगा.

काबुल के गवर्नर मोहम्मद याकूब हैदरी ने सभी कॉन्फ्रेंस और आयोजनों को रद्द कर दिया है. विवाह समारोह स्थल को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील किया जा रहा है. विदेश से आने वाले नागरिकों को इन आइसोलेशन वार्ड में ठहराया जाएगा.

अफगानिस्तान में खाद्य पदार्थों की कीमतों में इजाफा हुआ है. सरकार और धार्मिक नेताओं ने कालाबाजारी और जमाखोरी ने करने का आदेश जारी किया है. लेकिन दुकानदार हालात का फायदा उठा रहे हैं.

हेरात प्रांत के गवर्नर अब्दुल कयूम का कहना है कि अफगानिस्तान ने चार दशकों की जंग देखी है. लेकिन सबसे मुश्किल वक्त बस आने ही वाला है. अफगानिस्तान इस नई चुनौती का सामना करने के लिए तैयार नहीं है. उन्होंने कहा कि कम से कम तालिबान के लड़ाकों को आप देख सकते हैं आपको पता होगा कि उनके पास किस तरह के हथियार हैं. कोरोनो वायरस को तो हम देख भी नहीं सकते हैं. उसके लिए माइक्रोस्कोप की जरूरत है, जो अफगानिस्तान के पास नहीं है.

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First published: April 1, 2020, 6:08 PM IST
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