डॉक्टर को नहीं पता था कैसे काम करता है वेंटिलेटर, कोरोना मरीज की गई जान

डॉक्टर को नहीं पता था कैसे काम करता है वेंटिलेटर, कोरोना मरीज की गई जान
अमेरिका में एक मरीज की जान सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि डॉक्टर को वेंटिलेटर के बारे में जानकारी नहीं थी.

न्यूयॉर्क में एक डॉक्टर की नासमझी की वजह से एक कोरोना (Coronavirus) संक्रमित मरीज की जान चली गई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 30, 2020, 4:50 PM IST
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न्यूयॉर्क: अमेरिका (America) में कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण ने बुरी तरह से कहर बरपाया है. अमेरिकी हॉस्पिटल में कोरोना संक्रमित मरीजों की भरमार है. आमतौर पर हम समझते हैं कि अमेरिका में बड़े काबिल डॉक्टर और सबसे अच्छा हेल्थ सिस्टम है. लेकिन एक वाकये ने अमेरिकी हेल्थ सिस्टम की पोल खोल दी है.

न्यूयॉर्क के एक हॉस्पिटल में कोरोना संक्रमित मरीज की सिर्फ इसलिए जान चली गई क्योंकि डॉक्टर ने वेंटिलेटर ज्यादा ऊंचाई पर लगाया था. डॉक्टर को पता ही नहीं था कि वेंटिलेटर कैसे काम करता है. डॉक्टर की गफलत ने मरीज की जान ले ली.

डॉक्टर की नासमझी ने ली मरीज की जान
डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक न्यूयॉर्क शहर के डॉक्टरों ने ही इस वाकये के बारे में बताया है. उनका कहना है कि मरीजों की संख्या बढ़ने पर हॉस्पिटल में कुछ ऐसे ट्रेनी डॉक्टरों को लगा दिया गया, जिनके पास आईसीयू में काम करने का अनुभव है ही नहीं. वो वेंटिलेटर ऑपरेट करना नहीं जानते हैं.
मार्च महीने में एक ट्रेनी डॉक्टर की नासमझी की वजह से ही मोन्टेफियोरे हॉस्पिटल में 60 साल की एक मरीज की जान चली गई. रेजीडेंट डॉक्टर ने बताया है कि कोरोना संक्रमित मरीज के वेंटिलेटर को ट्रेनी डॉक्टर ने ज्यादा ऊंचाई पर कर दिया था.



जबकि ट्रेनी डॉक्टर का कहना है कि मरीज की मौत इसलिए हुई क्योंकि उसे कई दिनों तक यूं ही छोड़ दिया गया था. मरीज को किसी टीम को नहीं सौंपा गया था. डॉक्टरों की देखरेख के अभाव में मरीज की मौत हुई है.

कोरोना की वजह से अमेरिकी अस्पतालों का बुरा हाल
अमेरिका के अस्पतालों का बुरा हाल है. कोरोना वायरस के संक्रमण ने पूरे हेल्थ सिस्टम को तबाह कर रखा है. हॉस्पिटलों में इतने मरीज आ गए हैं कि डॉक्टर कम पड़ गए हैं. डॉक्टर बता रहे हैं कि इमरजेंसी मेडिसीन में काम करना उनकी ट्रेनिंग का हिस्सा है. लेकिन फिलहाल स्थितियां काबू से बाहर हो गई हैं.

डॉक्टरों के मुताबिक फैमिली मेडिसीन, डायगॉनस्टिक रेडियोलॉजी, पीडियाट्री, सायकियाट्री और ऑप्थैलमोलॉजी के रेजीडेंट डॉक्टरों को आईसीयू में काम करने का अनुभव नहीं होता है. जबकि इमरजेंसी के हालात में ऐसे डॉक्टरों को काम करना पड़ रहा है.

मार्च महीने में मोंटेफियोरे हॉस्पिटल के क्रिटिकल केयर फिजीशियन इंचार्ज जब कोरोना से संक्रमित मरीज के पास पहुंची, उसकी धड़कन बंद हो चुकी थी. जब उन्होंने पास खड़े फैमिली मेडिसीन के दो रेजीडेंट डॉक्टरों से पूछा कि क्या उन्हें वेंटिलेटर की सेटिंग्स पता है तो उन्होंने जवाब दिया- नहीं. हॉस्पिटल की रेजीडेंट डॉक्टर ने खुद इस वाकये के बारे में बताया है.

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