ट्रंप ने कहा- राज्यों को डेमोक्रेट गवर्नरों से 'लिबरेट' करो, US संवैधानिक संकट की ओर

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डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कोरोना वायरस (Coronavirus) को रोकने के मकसद से घरों में रहने के आदेश के खिलाफ प्रदर्शनों को बढ़ावा देते हुए अपने समर्थकों से तीन राज्यों को डेमोक्रेटिक गवर्नरों से 'मुक्त' (लिबरेट) कराने का अनुरोध किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 18, 2020, 1:52 PM IST
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वाशिंगटन. अमेरिका (USA) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कोरोना वायरस (Coronavirus) को रोकने के मकसद से घरों में रहने के आदेश के खिलाफ प्रदर्शनों को बढ़ावा देते हुए अपने समर्थकों से तीन राज्यों को डेमोक्रेटिक गवर्नरों से 'मुक्त' (लिबरेट) कराने का अनुरोध किया है. उधर ट्रंप की अपील के बाद रिपब्लिकन के नेतृत्व वाले कम से कम दो राज्यों ने पाबंदियों में ढील देने के लिए कदम उठाए हैं. हालांकि बाद में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने अपने ट्वीट (Tweet) पर सफाई दी और कहा कि इसका वो मतलब नहीं जो निकाला जा रहा है.

अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे फिर से शुरू करने का प्लान पेश करने के एक दिन बाद ट्रम्प ने 'लिबरेट' शब्द का इस्तेमाल करते हुए एक के बाद एक कई ट्वीट किए. इस शब्द का इस्तेमाल उनके समर्थकों ने उन आदेशों को हटाने की मांग के लिए किया था जिसने लाखों अमेरिकियों को घरों तक सीमित कर दिया है. उन्होंने संघीय सरकार के कामकाज की आलोचना करने के लिए न्यूयॉर्क के गवर्नर एंड्रयू कुमो पर बरसते हुए ट्वीट किया, 'लिबरेट मिनेसोटा, लिबरेट मिशिगन, लिबरेट वर्जीनिया.'

 
ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि कुमो को काम करने में ज्यादा वक्त बिताना चाहिए और शिकायत करने में कम. उधर ट्रंप के इस ट्वीट के बाद मिशीगन और वर्जीनिया के गवर्नरों ने ट्रंप से उनके बयान पर जवाब मांगने की बात कही है. जानकारों का मानना है कि देश भर में लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के खिलाफ कई राज्यों में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. न्यूयॉर्क, वर्जीनिया और न्यूजर्सी जैसे राज्यों में कोरोना ने आतंक मचाया हुआ है, ऐसे में लोगों का सड़कों पर आना स्थिति को और बिगाड़ सकता है. इसके साथ ही राष्ट्रपति और गवरानरों के बीच संवैधानिक संकट की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है.




प्रार्थना स्थलों को खोलने के मुद्दे पर धार्मिक नेताओं से की चर्चा
डोनाल्ड ट्रंप ने प्रार्थना स्थलों को चरणबद्ध तरीके से खोलने समेत कई मुद्दों पर शुक्रवार को धार्मिक नेताओं से बात की. यह बातचीत तब हुई है जब कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के कारण व्यापक रूप से प्रार्थना सभाएं ऑनलाइन आयोजित की जा रही हैं. इससे एक दिन पहले व्हाइट हाउस ने प्रार्थना स्थलों को उन 'बड़े स्थलों' में शामिल किया जिन्हें अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फिर से खोलने के पहले चरण में 'सामाजिक दूरी के सख्त नियमों' का पालन करते हुए फिर से खोला जा सकता है. व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी कर बताया कि इस बातचीत में यहूदी और इस्लामी नेताओं के साथ कई ईसाई प्रतिनिधियों ने भाग लिया. राष्ट्रपति ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा, 'हम इन्हें खोल सकते हैं लेकिन हम सुरक्षा का ध्यान पहले रख रहे हैं.'

वुहान की लैब में कोरोना बनने की थियरी पर अमेरिका गंभीर
ट्रंप ने बताया कि अमेरिका उन खबरों पर गौर कर रहा है जिनमें दावा किया जा रहा है कि दुनिया भर में 1,50,000 से ज्यादा लोगों की जान लेने वाला नोवल कोरोना वायरस चीन के वुहान शहर की वायरस विज्ञान प्रयोगशाला से 'निकला' है. बता दें कि फॉक्स न्यूज ने अपनी विशेष खबर में कहा कि अमेरिका उन दावों की व्यापक जांच कर रहा है कि क्या घातक वायरस वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से लीक हुआ है. साथ ही बताया कि खुफिया कर्मी प्रयोगशाला और वायरस के शुरुआती प्रकोप के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं.

इससे जुड़े एक सवाल पर ट्रंप ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में प्रेस वार्ता में संवाददाताओं से कहा. 'हम इस पर गौर कर रहे हैं, कई लोग इसपर गौर कर रहे हैं. ऐसा लगता है कि इसमें कुछ सच्चाई है.' समाचार चैनल ने सूत्र के हवाले से कहा कि खुफिया विश्लेषक उन घटनाक्रमों को जुटा रहे है जिसकी सरकार को जानकारी है और 'असल में जो हुआ उसकी सही-सही तस्वीर बना रहे हैं.' ट्रंप ने कहा, 'कई अजीब चीजें हो रही हैं लेकिन बहुत जांच होनी बाकी है और हम सच का पता लगा लेंगे.' उन्होंने कहा, 'मैं बस इतना कह सकता हूं कि यह कहीं से भी आया हो, चीन से जिस भी रूप में आया हो, इसके कारण अब 184 देश भुगत रहे हैं.'

 

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