क्या इस बार मुसलमान कर पाएंगे हज? सऊदी अरब में 78000 से ज्यादा हुए संक्रमित

क्या इस बार मुसलमान कर पाएंगे हज? सऊदी अरब में 78000 से ज्यादा हुए संक्रमित
क्या इस साल शुरू हो पाएगी हज यात्रा?

सऊदी अरब (Saudi Arabia) में अभी तक 78000 से ज्यादा संक्रमण के केस सामने आ चुके हैं 425 लोगों की इससे मौत हो चुकी है. सऊदी अरब में 31 मई के बाद से मक्का को छोड़कर पूरे देश से कर्फ्यू खत्म कर दिया जाएगा. मक्का में कर्फ्यू खत्म करने का फैसला 21 जून से लागू होगा.

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रियाद. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने अमेरिका (US), भारत (India), ब्राजील (Brazil) और पेरू (Peru) के आलावा मिडिल ईस्ट (Middle East) के कुछ देशों के कोरोना संक्रमण (Coronavirus) के मामले बढ़ने की चेतावनी जारी की है. इन देशों में सऊदी अरब (Saudi Arabia) भी शामिल है जहां अभी तक 78000 से ज्यादा संक्रमण के केस सामने आ चुके हैं 425 लोगों की इससे मौत हो चुकी है. सऊदी अरब में 31 मई के बाद से मक्का को छोड़कर पूरे देश से कर्फ्यू खत्म कर दिया जाएगा. मक्का में कर्फ्यू खत्म करने का फैसला 21 जून से लागू होगा. इस कदम से स्पष्ट है कि हज यात्रा पर बढ़ते कोरोना मामलों के बीच अभी भी सवालिया निशान लगा हुआ है.

सऊदी प्रेस एजेंसी ने बताया है कि 31 मई के बाद से कर्फ्यू खत्म कर दिया जाएगा. हालांकि अभी भी उमरा हज की इजाजत नहीं होगी. मक्का में 21 जून तक 24 घंटे कर्फ्यू रहेगा. 21 जून के बाद से यहां नमाज पढ़ने की अनुमति होगी. इसके अलावा पूरे किंगडम में 31 मई के बाद से घरेलू विमानों पर लगी रोक और मस्जिदों में नमाज पर प्रतिबंध भी हटा दिया जाएगा. लोगों को सभी कंपनियों के ऑफिस में काम पर जाने की अनुमति भी होगी. इससे पहले सऊदी अरब ने हज पर जाने वाले तीर्थयात्रियों से कहा है कि वे अपनी बुकिंग में कोई जल्दबाज़ी न करें क्योंकि कोरोना वायरस की वजह से अनिश्चितता बनी हुई है.

क्या कहा रहा है सऊदी?
हज मामलों के मंत्री मोहम्मद सालेह बंतेन ने कहा है कि सऊदी अरब हाजियों की सुरक्षा को लेकर फ़िक्रमंद है और लोगों से उन्होंने गुज़ारिश की है कि वे अपनी बुकिंग को लेकर किसी भी तरह की कोई जल्दबाज़ी न दिखाएं. इस साल जुलाई और अगस्त के महीने में मक्का और मदीना में बीस लाख तीर्थयात्रियों के पहुंचने की संभावना थी. कोरोना वायरस के संक्रमण के ख़तरे को देखते हुए ऐतिहातन उमरा यात्रा भी बंद है. यहां तक की मक्का, मदीना और राजधानी रियाद के लोगों पर भी उमरा करने पर पाबंदी जारी है.
हज मंत्री बंतेन ने कहा, 'सऊदी अरब हज और उमरा करने वाले लोगों के लिए पूरी तैयार है लेकिन इन परिस्थितियों में जब हम वैश्विक महामारी की बात कर रहे हैं जिसके लिए हम अल्लाह से दुआ कर रहे हैं कि वो सबकी सुरक्षा करे. इस दौरान सऊदी अरब अपने नागरिकों और मुसलमानों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है.'



मिडिल ईस्ट में हुईं हैं कम मौतें लेकिन मुश्किल बरकरार
बता दें कि मिडिल ईस्ट के इन देशों के पास एक ऐसी चीज़ है जो कोरोना के ख़िलाफ़ इनकी लड़ाई को मज़बूती दे रही है. यह चीज़ इनकी नौजवान आबादी है. मध्यपूर्व देशों की 60 फ़ीसदी आबादी की औसत उम्र 30 साल से नीचे है. इस वजह से इनके कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित होने की आशंकाएं कम हो गई हैं. दुनिया के ज़्यादातर देशों में कोरोना ने अधिक उम्र वाले लोगों को अपना शिकार बनाया है. इसके आलावा सऊदी समेत अन्य मिडिल ईस्ट के देशों ने कर्फ़्यू लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे क़दम उठाने में कोई कोताही नहीं की.

हालांकि यमन, सीरिया और लीबिया में हेल्थकेयर सिस्टम के बर्बाद हो जाने के चलते अभी भी संक्रमण का प्रबल खतरा बना हुआ है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ यमन पहले की मानवीय संकट के अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा है. इसके आलावा अल्जीरिया, लेबनान और इराक़ में लोगों ने एक राष्ट्रपति और दो प्रधानमंत्रियों के खिलाफ आंदोलन छेड़ा हुआ है. उधर इराक़ में गोली लगने से 600 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है. थिंक टैंक चैटम हाउस में मीडिल ईस्ट प्रोग्राम की प्रमुख लिना खातिब मानती हैं कि सऊदी अरब और ईरान जैसे देशों को मध्य पूर्व में अपना असर बढ़ाने से जुड़ी रणनीति पर दोबारा सोचना होगा. उन्हें अपनी प्राथमिकताएं दोबारा तय करनी होंगी. उन्हें यमन या सीरिया में अपने हितों का बलिदान करना पड़ सकता है.

 

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